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इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद को क्यों मिला नोबेल शांति पुरस्कार?
साल 2019 का नोबेल शांति पुरस्कार इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद को दिया जाएगा.
अंतरराष्ट्रीय शांति और सहयोग में उनके प्रयासों और ख़ास कर शत्रु देश इरिट्रिया के साथ शांति स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री अबी अहमद अली का नाम नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है.
2018 में प्रधानमंत्री बनने के बाद अबी अहमद ने इथियोपिया में बड़े पैमाने पर उदारीकरण की शुरुआत की.
2018 में प्रधानमंत्री बनने के बाद अबी अहमद ने इथियोपिया में बड़े पैमाने पर उदारीकरण की शुरुआत की. उन्होंने हज़ारों विपक्षी कार्यकर्ताओं को जेल से रिहा कराया और निर्वासित असंतुष्टों को देश में वापस लौटने की इजाज़त दी.
सबसे अहम काम जिसके लिए नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया वो ये है कि पड़ोसी देश इरिट्रिया के साथ दो दशक से भी अधिक समय से चले आ रहे संघर्ष को ख़त्म करते हुए उसके साथ शांति स्थापित की.
हालांकि, उनके सुधारों ने इथियोपिया की नस्लीय तनाव पर से पर्दा उठा दिया, इसके बाद हुई हिंसा में 25 लाख लोगों को अपना घरबार छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा.
इथियोपिया ने बीते वर्ष इरिट्रिया के साथ शांति समझौता किया. इसके साथ ही 1998-2000 में शुरू हुआ सैन्य गतिरोध 20 साल के बाद समाप्त हो गया.
सितंबर 2018 में अबी ने इरिट्रिया और जिबूती के बीच कई सालों से चली आ रही राजनीतिक शत्रुता तो खत्म कर कूटनीतिक रिश्तों को सामान्य बनाने में मदद की. इसके अलावा अबी ने केन्या और सोमालिया में समुद्री इलाके को लेकर चले आ रहे संघर्ष को ख़त्म करने में मध्यस्थता की.
नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाले 100वीं शख्सियत
नोबेल पुरस्कार पाने वाले अबी अहमद 100वें व्यक्ति होंगे.
ओस्लो में 10 दिसंबर को उन्हें 9 मिलियन डॉलर का यह शांति पुरस्कार प्रदान किया जाएगा.
2019 के नोबेल पुरस्कार के लिए 301 उम्मीदवार थे. इनमें 223 शख्सियत और 78 संस्थाएं शामिल थीं.
इस बार यह पुरस्कार किसे मिलेगा इस पर कई अटकलें चल रही थीं. लेकिन अंतिम सूची में किसे शामिल किया गया इसकी जानकारी नहीं मिल सकती क्योंकि नोबेल फाउंडेशन के नियमों के मुताबिक, चयनित संक्षिप्त सूची को 50 सालों तक प्रकाशित नहीं होने दिया जाता है.
इथियोपिया के मंडेला
43 साल के अबी अहमद को इथोपिया का 'नेल्सन मंडेला' भी कहा जाता है. नोबेल समिति ने अबी अहमद के नाम की घोषणा करते हुए कहा कि "अबी को पड़ोसी इरिट्रिया के साथ सीमा विवाद को ख़त्म करने को लेकर उनके निर्णायक पहलों के लिए" सम्मानित किया गया है.
उन्होंने कहा, "यह पुरस्कार पूर्वी और उत्तरी अफ़्रीकी देशों के बीच और इथियोपिया में शांति के प्रयासों में लगे सभी संबंधित लोगों के वास्ते है."
नोबेल समिति ने कहा, "शांति केवल एक ही पार्टी के प्रयास से नहीं स्थापित होती. जब प्रधानमंत्री अबी ने अपना हाथ बढ़ाया तो राष्ट्रपति अफ़वर्की ने इसे दोनों हाथों से थाम लिया और इस तरह दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया की शुरुआत हुई. नॉर्वे की नोबेल समिति यह उम्मीद करती है कि इस शांति समझौते से इथियोपिया और इरिट्रिया की पूरी आबादी के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा."
अबी के दफ़्तर ने कहा कि यह पुरस्कार एकता, सहयोग और सह-अस्तित्व के आदर्शों की गवाही है और प्रधानमंत्री इसमें लगातार सफलता हासिल कर रहे हैं.
क्या है अबी अहमद की कहानी?
अबी अहमद का जन्म दक्षिण इथियोपिया के जिमा ज़ोन में 1976 में हुआ. उनके पिता ओरोमो मुस्लिम थे और मां अम्हारा ईसाई.
उन्होंने कई विषयों में डिग्री हासिल की है. इसमें आदिस अबाबा विश्वविद्यालय से शांति एवं सुरक्षा में डॉक्टरी की डिग्री भी शामिल है. इसके अलावा उन्होंने लंदन के ग्रीनविच विश्वविद्यालय से ट्रासफॉरमेशनल लीडरशिप में मास्टर डिग्री हासिल की.
किशोरावस्था में वे तब के दर्ग्यू शासन के ख़िलाफ़ सशस्त्र संघर्ष में शामिल हो गए और आखिर में ख़ुफ़िया और संचार सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए लेफ़्टिनेंट कर्नल के पद तक पहुंचे.
1995 में उन्होंने रवांडा में संयुक्त राष्ट्र के शांतिदूत के रूप में कार्य किया.
इरिट्रिया के साथ 1998-2000 में सीमा विवाद के दौरान उन्होंने इरिट्रिया के डिफेंस फोर्स के इलाकों में एक टोही मिशन पर गई जासूसी टीम का नेतृत्व किया था.
2010 में अबी राजनीति में शामिल हुए. ओरोमो पीपल्स डेमोक्रेटिक ऑर्गेनाइजेशन के सदस्य बने और फिर संसद के सदस्य चुने गए.
संसद में उनका कार्यकाल के दौरान ही मुसलमानों और ईसाइयों के बीच संघर्ष शुरू हुआ. उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए 'शांति के लिए धार्मिक मंच' नामक फोरम की स्थापना की.
वे इस वक्त किसी भी अफ़्रीकी सरकार के सबसे युवा प्रमुख हैं.
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