मेहुल चोकसी मामले में भारतीय अधिकारियों ने ग़लत जानकारी दी: एंटीगा के पीएम

एंटीगा और बारबुडा के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन ने पंजाब नैशनल बैंक में हज़ारों करोड़ रुपए के घोटाले के अभियुक्त कारोबारी मेहुल चोकसी के मामले में भारतीय अधिकारियों को ज़िम्मेदार ठहराया है.

संयुक्त राष्ट्र की महासभा में भाग लेने न्यूयॉर्क पहुंचे गैस्टन ब्राउन ने समाचार एजेंसी एएनआई से मेहुल चोकसी के बारे मे खुलकर बात की.

उन्होंने कहा कि मेहुल चोकसी को एंटीगा और बारबुडा में रखने की कोई इच्छा नहीं है. उनके अनुसार मेहुल चौकसी उनके देश के लिए बिल्कुल उपयोगी नहीं हैं.

लेकिन इसके लिए उन्होंने भारत को भी ज़िम्मेदार ठहराया.

गैस्टन ब्राउन ने एएनआई से बातचीत के दौरान कहा, ''मेहुल चोकसी के लिए भारतीय अधिकारियों ने ये कहते हुए स्वीकृति दी थी कि वो एक अच्छे व्यक्ति हैं. भारत में वास्तव में क्या हुआ और सच ये है कि हमें ग़लत जानकारी दी गई, इस स्थिति के लिए भारतीय अधिकारियों को ज़िम्मेदारी लेनी होगी. हमारे अधिकारियों ने भारत के ही ज़रिए दी गई जानकारी के आधार पर मेहुल चोकसी को नागरिकता दी. और बाद में हमें कहा गया कि वो एक धोखेबाज़ हैं.''

गैस्टन ब्राउन ने बताया कि कैसे मेहुल चोकसी के कारण वहाँ की नागरिकता लेने की उनके देश की स्कीम - सिटिज़नशिप बाय इनवेस्टमेंट प्रोग्राम - को नुक़सान पहुंचा है. मेहुल चोकसी ने इसी प्रोग्राम के ज़रिए ही एंटीगा की नागरिता प्राप्त की थी.

हाल ही में गैस्टन ब्राउन ने मेहुल चोकसी की नागरिकता को रद्द करने का ऐलान किया था.

प्रधानमंत्री गैस्टन ने विश्वास दिलाया कि मेहुल चोकसी को जल्द ही निर्वासित कर दिया जाएगा.

गैस्टन ब्राउन का कहना था, ''उनकी सभी अपील ख़त्म होने के तुरंत बाद उन्हें निर्वासित कर दिया जाएगा. ये सिर्फ़ कुछ ही दिनों की बात है.''

ये पूछे जाने पर कि क्या भारतीय अधिकारी मेहुल चोकसी से पूछताछ कर सकते हैं, प्रधानमंत्री गैस्टन का कहना था, ''भारतीय अधिकारियों को एंटीगा बारबुडा आने का पूरा अधिकार है. सच्चाई ये है कि कई भारतीय अधिकारी पहले ही इस मामले की जाँच के लिए एंटीगा और बारबुडा आ चुके हैं. अगर वह (मेहुल चौकसी) सहयोग करने के इच्छुक हैं तो भारतीय अधिकारी जाँच करने के लिए स्वतंत्र हैं. इससे मेरी सरकार का कोई लेना देना नहीं है."

हालाँकि गैस्टन ब्राउन ने अभी मेहुल चोकसी के भारत आने का समय नहीं बताया है.

ऐसा माना जा रहा है कि उन्होंने ये क़दम भारत के दबाव में उठाया है.

मेहुल चोकसी को 15, जनवरी 2018 को एंटीगा और बारबुडा की नागरिकता मिल गई. इस साल 17 जून को मेहुल चोकसी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में हलफ़नामा दायर किया था जिसमें उन्होंने कहा कि वो अभी एंटीगा में हैं और पीएनबी घोटाले में सहयोग करना चाहते हैं.

पीएनबी घोटाले के तहत नीरव मोदी और मेहुल चोकसी पर 13 हज़ार करोड़ रूपए के ग़बन का आरोप है. ये मामला 2018 में सामने आया था.

पीएनबी घोटाला

2018 की शुरुआत में पंजाब नेशनल बैंक में 11,300 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया.

इस घोटाले में हीरा व्यापारी नीरव मोदी के अलावा उनकी पत्नी ऐमी, उनके भाई निशाल, और चाचा मेहुल चोकसी मुख्य अभियुक्त हैं.

बैंक का दावा था कि इन सभी अभियुक्तों ने बैंक के अधिकारियों के साथ साज़िश रची और बैंक को नुकसान पहुंचाया.

पंजाब नेशनल बैंक ने जनवरी में पहली बार नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और उनके साथियों के ख़िलाफ़ शिकायद दर्ज कराई. इस शिकायत में उन पर 280 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया गया था.

14 फ़रवरी को आंतरिक जांच पूरी होने के बाद पंजाब नेशनल बैंक ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को इस फ़र्ज़ीवाड़े की जानकारी दी.

ये भारत का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला था. इस मामले में चोकसी और उनके भांजे नीरव मोदी अभियुक्त हैं. सीबीआई और प्रत्यर्पण निदेशालय (ईडी) को चोकसी की तलाश है. नीरव मोदी भी देश के बाहर हैं और सरकार का दावा है कि उन्हें भी देश में लाने की कोशिशें जारी हैं.

15 फ़रवरी को प्रवर्तन निदेशालय ने दख़ल दिया और नीरव मोदी के मुंबई, सूरत और दिल्ली के कई दफ़्तरों पर छापामारी की. प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया.

लेकिन ये सभी अभियुक्त जनवरी में ही देश छोड़ने में कामयाब रहे. भारतीय एजेंसियां उनके प्रत्यर्पण की कोशिश में लगी हुई हैं.

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