भारत-अमरीका व्यापार: क्या भारत ने वाक़ई ज़्यादा टैरिफ़ लगाया

    • Author, रिएलिटी चैक टीम
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

दावा: भारत ने आयात पर बहुत ऊंचे टैरिफ़ लगाए हैं- डोनल्ड ट्रंप के मुताबिक़ दुनिया में अब तक सबसे ज़्यादा.

निष्कर्ष: यह सही है कि भारत में औसत टैरिफ़ दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से काफ़ी ज़्यादा है, और ये अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भी सबसे अधिक है. लेकिन, दूसरे देशों ने भी विशेष उत्पादों पर ऊंचे टैरिफ़ लगाए हैं और अमरीका ने चीन के साथ व्यापार युद्ध के दौरान चीनी उत्पादों पर 360 अरब डॉलर से ज़्यादा का टैरिफ़ लगाया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमरीका में हैं और डोनल्ड ट्रंप के साथ उनकी मुलाक़ातें हो रही हैं. इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनने की उम्मीद है.

दोनों देशों में इसे लेकर तनाव की स्थिति बनी रहती है. राष्ट्रपति ट्रंप कहते रहे हैं कि भारत की टैरिफ़ दरें (आयात पर लगने वाला कर) "अस्वीकार्य" हैं. उन्होंने भारत को टैरिफ़ का "राजा" भी कहा है.

उन्होंने एक बार कहा था, ''भारत ने अमरीका पर कई सालों में अब तक का सबसे ज़्यादा (ट्रेड) टैरिफ लगाया है. भारत टैरिफ़ का राजा है. यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है.''

वरिष्ठ अमरीकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंड्से ग्राहम ने हाल ही में कहा था कि जब बात अमरीकी उत्पादों पर टैरिफ़ की हो तो भारत अपने सबसे बुरे रूप में होता है.

इस साल आई अमरीका की एक आधिकारिक रिपोर्ट कहती है कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के अन्य सदस्यों पर भारत की टैरिफ़ दरें "किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था में सबसे ज़्यादा" हैं.

साल 2018 में भारत की औसत टैरिफ़ दर 17.1% थी, जो अमरीका, जापान और यूरोपीय संघ के मुक़ाबले बहुत ऊंची हैं. इन देशों में टैरिफ़ 3.4% से 5.2% तक है.

भारत के टैरिफ़ की तुलना

भारत में लगने वाला टैरिफ़ अन्य उभरते देशों की तुलना में भी ज़्यादा है. 2018 में दक्षिण कोरिया की औसत दर 13.7%, ब्राजील की 13.4% थी. ऐसे में डोनल्ड ट्रंप का कहना सही है कि अगर इन दरों को देखें तो वैश्विक स्तर पर भारत सबसे ऊंचे टैरिफ़ वाला देश है.

अमरीका और चीन के बीच चले व्यापार युद्ध के कारण पिछले साल दोनों देश एक-दूसरे पर टैरिफ़ की दरें बढ़ाते रहे.

हालांकि, ये अभी तक डब्ल्यूटीओ के वार्षिक आंकड़ों में नहीं दिखाई दिया है लेकिन वैश्विक व्यापार नीति में टैरिफ़ का इस्तेमाल दोनों देशों के लिए टैरिफ़ के औसत स्तर को बढ़ा सकता है.

क्या कहता है भारत?

भारत कहता है कि उसकी औसत दरें व्यापार पर डब्ल्यूटीओ के नियमों की सीमाओं के तहत ही हैं.

यह माप आयात की मात्रा के साथ वास्तव में एकत्र किए गए सभी शुल्कों के औसत की गणना करता है.

साल 2017 में, भारत का व्यापार-भारित औसत टैरिफ़ 11.7%, ब्राज़ील का 10% और दक्षिण कोरिया का 8.1% था.

लेकिन, अमरीका, यूरोपीय संघ और जापान के लिए व्यापार-भारित औसत टैरिफ़ क्रमश: 2.3%, 3%, और 2.4% के साथ बहुत कम था.

ऊंची दरें लगाने वाले देशों में भारत अकेला नहीं है. जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया भी खास आयातों पर ज़्यादा टैरिफ़ लगाते हैं.

अमरीका तंबाकू की कुछ प्रकारों पर 350% और यूरोपीय पनीर व चॉकलेट के कुछ प्रकारों पर 100% या उससे ज़्यादा टैरिफ़ लगाता है.

लेकिन, अमरीका की कुल औसत टैरिफ़ दरें ऐतिहासिक रूप से कम रही हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में अमरीका की दरें दुनिया में सबसे कम दरों में से एक थीं.

भारत ने अमरीका पर कौन से टैरिफ़ लगाए हैं?

जून में भारत ने अमरीका के 28 उत्पादों पर टैरिफ़ बढ़ाया है जिसमें बादाम, अखरोट, सेब और स्टील शामिल हैं.

अमरीकी अख़रोट पर शुल्क 120% तक पहुंच गया है जबकि छोले और कुछ प्रकार की दालों पर शुल्क बढ़कर 70% कर दिया गया है.

भारत ने यह कदम तब उठाया है जब अमरीका ने भारत को दिए जाने वाले विशेष व्यापार विशेषाधिकारों को वापस ले लिया था. इससे अमरीका से 5 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का आयात प्रभावित हुआ है.

भारत इस बात से भी नाराज़ था कि पिछले साल अमरीका ने भारत को स्टील और एल्युमीनियम टैरिफ़ से छूट देने से इनकार कर दिया था.

भारत अमरीका को ज़्यादातर रत्न, फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, खनिज ईंधन और वाहन निर्यात करता है.

वहीं, अमरीका भारत को कृषि उत्पादों के अतिरिक्त कीमती धातु व पत्थर, खनिज ईंधन, विमान और ऑपटिकल और मेडिकल उपकरण निर्यात करता है.

अमरीका और भारत में बढ़ता व्यापार

डोनल्ड ट्रंप ने भारत में हार्ले डेविड्सन बाइक पर लगने वाले टैरिफ़ पर खासतौर पर आपत्ति जताई थी. तब ये टैरिफ़ 100% प्रतिशत था जिसे अमरीका की शिकायत के बाद आधा कर दिया गया.

अमरीका ने सूचना तकनीक उत्पादों पर लगने वाले शुल्क को लेकर भी शिकायत की थी. साथ ही चिकित्सा उपकरणों पर मूल्य नियंत्रण, घरेलू ई-कॉमर्स कंपनियों को फ़ायदा पहुंचाने वाले नियमों और डिजिटल सेवा प्रदाताओं के लिए स्थानीय स्तर पर डाटा स्टोर करने के नियमों को लेकर भी शिकायत की थी.

इसके बावजूद, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़ रहा है. आधिकारिक अमरीकी आंकड़ों के अनुसार 2018 में भारत के 24.2 अरब डॉलर के अधिशेष के साथ यह 142.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया था.

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