हॉन्ग कॉन्ग सरकार वापस लेगी विवादित प्रत्यर्पण बिल

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हॉन्ग कॉन्ग की नेता और चीफ़ एग्ज़िक्यूटिव कैरी लैम ने कहा है कि वो विवादित प्रत्यपर्ण बिल को वापस लेने के लिए तैयार हैं. इस बिल की वजह से पिछले कई महीनों से हॉन्ग कॉन्ग में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं.
इस विवादित बिल को अप्रैल में प्रस्तावित किया गया था, जिसमें आपराधिक मामलों के अभियुक्तों को चीन को प्रत्यर्पित करने का प्रावधान था.
इस बिल पर जून में रोक लग गई थी लेकिन लैम ने इसे पूरी तरह हटाने से इनकार कर दिया था.
प्रदर्शनकारी इस बिल को पूरी तरह से हटाने की मांग कर रहे थे. ये लोग हॉन्ग कॉन्ग में पूर्ण लोकतंत्र की मांग भी कर रहे हैं.
कैरी लैम ने क्या कहा?
कैरी लैम ने एक रिकॉर्डेड संदेश के ज़रिए इस बिल को पूरी तरह से हटाने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि सरकार जनता की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए बिल को औपचारिक तौर पर वापस लेने के लिए तैयार है.
लैम ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने हॉन्ग कॉन्ग की जनता को हैरान-परेशान कर दिया और प्रदर्शन में जिस तरह से हिंसा हो रही थी, उससे हॉन्ग कॉन्ग एक बेहद ख़तरनाक स्थिति की तरफ़ बढ़ चला था.
उन्होंने कहा, ''इस बात से फ़र्क नहीं पड़ता कि लोगों को सरकार के फ़ैसले से किस तरह की असहमतियां हैं, लेकिन किसी भी समस्या को हल करने के लिए हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया जा सकता.''
''फ़िलहाल हमारे लिए इस हिंसा को रोकना सबसे अहम है, इसके साथ ही क़ानून व्यवस्था को कायम करना भी ज़रूरी है.''
लैम ने कहा कि वह अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हॉन्ग कॉन्ग के लोगों से मिलने जाएंगी और उनकी चिंताओं को सुनेंगी.

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प्रदर्शनकारियों की मांग
प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि नए प्रत्यर्पण बिल को पूरी तरह से हटा दिया जाए. इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने उन पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ भी एक स्वतंत्र जांच करने की मांग रखी है जिन्होंने प्रदर्शनकारियों पर निर्दयतापूर्वक बलप्रयोग किया.
इस घोषणा से पहले सोमवार को कैरी लैम का एक ऑडियो लीक हो गया था जिसमें वो काफ़ी दुखी स्वर में अपने इस्तीफ़े की बात कह रही थीं.
इस ऑडियो में लैम हॉन्ग कॉन्ग के हालात के लिए ख़ुद को ज़िम्मेदार ठहरा रही थीं.
अब इस बिल को वापस हटाने की घोषणा होने के बाद अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.
बीजिंग की तरफ झुकाव रखने वाली सांसद रेगीना इप ने बीबीसी से कहा कि यह क़दम एक सकारात्मक पहल है.

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उन्होंने कहा, ''इस फ़ैसले से सबकुछ तो शांत नहीं होगा लेकिन उम्मीद करते हैं कि इससे शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले प्रदर्शनकारियों के मन में जो शंकाएं हैं, वो ज़रूर दूर हो जाएंगी.''
''लोग अलग-अलग वजहों से सड़क पर उतरे हैं. हॉन्ग कॉन्ग में लोगों के बीच पैसों की जो खाई है. उन्हें उससे नाराज़गी है. लोग अपने घरों के हालात से परेशान हैं. इसके साथ ही उन्हें देश की राजनीतिक व्यवस्था से भी दिक्कतें हैं. मुझे ख़ुशी है कि चीफ़ एग्जिक्यूटिव ने कहा है कि वो ख़ुद लोगों से मिलने जाएंगी और उनकी परेशानियां सुनेंगी.''
वहीं दूसरी तरफ लोकतंत्र के पक्षधर नेता वु ची-वाई ने कैरी लैम के फ़ैसले को फ़र्ज़ी करार दिया है.
उन्होंने कहा, ''पुलिस को अपनी बर्बरता पूर्ण कार्रवाई को रोकना होगा, नहीं तो यह प्रदर्शन ऐसे ही जारी रहेगा.''
लोकतंत्र की मांग करने वाले कार्यकर्ता जोशुआ वोंग ने कहा कि बिल को वापस लेना एक बहुत ही देर से लिया गया छोटा क़दम है.
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इसी तरह एक और कार्यकर्ता नैथन लॉ ने बीबीसी से कहा कि उनका अभियान जारी रहेगा.
एमनेस्टी इंटरनेशनल की तरफ़ से कहा गया है कि बिल को वापस लेने का स्वागत किया जाता है लेकिन इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों पर जिस तरह से पुलिस ने बलप्रयोग किया, उसकी जांच होनी चाहिए.
प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि जितने भी लोगों को गिरफ़्तार किया गया है, उन्हें माफ़ कर दिया जाए, राजनीतिक सिस्टम में बड़े बदलाव हों और अधिकारी इन प्रदर्शनों को दंगों का नाम ना दें.

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हॉन्ग कॉन्ग पर 150 साल से अधिक समय तक ब्रिटिश शासन था. इसके बाद साल 1997 में इसे चीन को सौंप दिया गया था.
हॉन्ग कॉन्ग को चीन की "एक देश, दो प्रणालियां" वाली व्यवस्था के तहत अर्ध स्वायत्तता मिली है. मगर कुछ लोगों को लगता है कि चीन हॉन्ग कॉन्ग पर अपना अधिकार जमा रहा है.
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