इमरान ख़ान ने तनाव के बीच जनरल बाजवा का कार्यकाल क्यों बढ़ाया

पाकिस्तान के वर्तमान सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा नवंबर में रिटायर होने वाले थे लेकिन सोमवार को प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के ऑफिस से इस बात की घोषणा की गई कि जनरल बाजवा और तीन साल के लिए सेना प्रमुख बने रहेंगे.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने इस फ़ैसले पर कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति प्रक्रिया और भारत के साथ कश्मीर पर बढ़े तनाव को लेकर यह ज़रूरी फ़ैसला है. क़ुरैशी ने इस फ़ैसले को पाकिस्तान की सुरक्षा से भी जोड़ा है.

पाकिस्तान के पास दुनिया की छठी सबसे बड़ी सेना है जिसका देश के परमाणु हथियारों पर भी नियंत्रण है.

पाकिस्तानी सेना ने पाकिस्तान बनने के बाद से कई तख़्तापलट किए हैं और अब तक क़रीब आधे समय तक देश पर उनका ही राज रहा है.

अभी पाकिस्तान में चुनी हुई सरकार है पर पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियां इमरान ख़ान को सिलेक्टेड पीएम कहती हैं.

क़मर बाजवा तीन साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद नवंबर में रिटायर होने वाले थे लेकिन तीन साल बढ़ाने को लोग विदेश नीति पर सैन्य वर्चस्व से जोड़कर देखते हैं.

भारत के साथ रिश्तों में बढ़ी तल्खी

इमरान ख़ान सरकार ने सोमवार को कार्यकाल बढ़ाने के दौरान कहा कि सैन्य प्रमुख ने घरेलू मामलों में भी अहम भूमिका निभाई है. उनके आलोचक कहते हैं- इसमें 'राजनीति' भी शामिल है.

इमरान ने कहा, "यह फ़ैसला क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल को देखते हुए लिया गया है."

जुलाई में जब इमरान ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से मुलाक़ात की तब बाजवा उनके साथ थे.

अमरीकी अधिकारियों और तालिबान का कहना है कि उन्होंने अमरीका और तालिबान के बीच महीनों तक चली वार्ता में ट्रंप प्रशासन का सहयोग किया.

तालिबान का नेतृत्व पाकिस्तान में स्थित है.

जब भारत ने जम्मू-कश्मीर को दी गई स्वायत्तता ख़त्म करने का फ़ैसला किया तब से पाकिस्तान के साथ रिश्तों में तल्खी बढ़ी है.

पुलवामा से शुरू हुई ताज़ा घटनाक्रम

कश्मीर को लेकर 1947, 1965 और 1999 में दोनों देशों के बीच युद्ध हो चुके हैं.

फ़रवरी में, भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में चरमपंथी हमला हुआ था, जिसमें सीआरपीएफ़ के 40 जवानों की मौत हुई थी.

अब कश्मीर पर है तनातनी

भारत ने इसके लिए पाकिस्तान स्थित जिहादी समूह को ज़िम्मेदार बताया था. इसे लेकर दोनों देशों के बीच इसी साल फ़रवरी में सैन्य टकराव की स्थिति बन गई थी.

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से समूचे राज्य में संचार सेवाएं बंद हैं और स्थानीय आबादी के सड़क पर आने की आशंका है. दोनों देशों के बीच एक और सैन्य टकराव की आशंका पैदा हो रही है.

ट्रंप की इमरान और मोदी से बात की केंद्र में कश्मीर

सोमवार को अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फ़ोन पर स्थिति का जायज़ा लिया.

व्हाइट हाउस के मुताबिक़ ट्रंप ने इस बातचीत में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने की ज़रूरत पर जोर दिया.

ट्रंप ने इमरान ख़ान से भी बात की और कश्मीर के मसले पर दोनों ओर संयम बरतने का आग्रह किया.

चरमपंथी समूहों पर आगे क्या रुख़ होगा?

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि जनरल बाजवा का कार्यकाल कश्मीर, क्षेत्रीय सुरक्षा और अफ़ग़ान शांति प्रक्रिया की वजह से बढ़ाया गया है.

क़ुरैशी ने सोमवार को बताया कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने क़मर जावेद बाजवा की नियुक्ति तीन साल बढ़ाने का यह फ़ैसला इस पूरे क्षेत्र और कश्मीर की स्थिति को देखते हुए लिया है.

उनसे पूछा गया था कि सेना प्रमुख के तीन साल कार्यकाल बढ़ाने से क्या कश्मीर और अफ़ग़ानिस्तान में कोई सुधार की उम्मीद है?

इस पर उन्होंने कहा, "अभी हमें यह पता नहीं है कि भारत वाले कश्मीर में स्थिति कैसी है क्योंकि वहां कर्फ़्यू लगा है. जब कर्फ़्यू उठा लिया जाएगा तब जाकर हमें पता चलेगा कि वास्तव में इस दौरान वहां क्या हुआ."

कश्मीर के अलावा अफ़ग़ान समझौते पर भी असर?

हालांकि बीते हफ़्ते अफ़ग़ान शांति प्रक्रिया को भी तब एक ज़ोरदार झटका लगा जब राजधानी काबुल में एक शादी के समारोह के दौरान आत्मघाती हमले में कम से कम 63 लोगों की मौत हो गई जबकि 100 से ज़्यादा लोग घायल हो गए. इस हमले की ज़िम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली है.

हमले पर चिंता जताते हुए जानकारों का कहना है कि इससे तालिबान के साथ एक शांति समझौते पर असर पड़ेगा और उन्होंने अमरीकी सेना की वापसी से यहां सुरक्षा के बिगड़ने की आशंका भी जताई.

कार्यकाल बढ़ाने के कारण?

इसी बीच सेना के आलोचकों का कहना है कि सेना ने इमरान ख़ान को पाकिस्तान की राजनीति में एक नई ताक़त के रूप में उभरने के लिए 2018 का आम चुनाव जीतने में मदद की.

सेना प्रमुख के कार्यकाल को बढ़ाया जाना ग़ैरमुनासिब बताते हुए विपक्षी पार्टी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के वरिष्ठ सदस्य फरहतुल्लाह बाबर ने ट्वीट किया कि मज़बूत संस्थाएं किसी व्यक्ति पर निर्भर नहीं करतीं चाहे वह व्यक्ति कितना भी मज़बूत, सक्षम और प्रतिभावान ही क्यों न हो.

जब जनरल राहील शरीफ़ ने आश्चर्यजनक रूप से रिटायर होने से 10 महीने पहले यह घोषणा की कि वह किसी भी विस्तार को स्वीकार नहीं करेंगे, जो कि उन्हें ऑफर तक नहीं किया गया था, तो इमरान ने 25 जनवरी 2016 को ट्वीट किया कि "कार्यकाल के विस्तार को स्वीकार नहीं करने की घोषणा से जनरल राहील शरीफ़ का कद बढ़ा है."

सेना प्रमुखों के कार्यकाल बढ़ाने के ख़िलाफ़ रहे हैं इमरान

सत्ता में आने से पहले इमरान ख़ान सेना प्रमुख का कार्यकाल बढ़ाए जाने के पक्षधर नहीं थे. उन्होंने कहा था कि किसी भी सेना प्रमुख का कार्यकाल बढ़ाना सेना के नियमों को बदलने का काम है जो एक संस्था के रूप में सेना को कमज़ोर करता है.

इमरान का यह बयान 2010 में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के सेना प्रमुख असफाक़ परवेज़ कयानी के कार्यकाल को बढ़ाए जाने के बाद आया था.

उस समय एक टेलीविज़न इंटरव्यू में इमरान ने कहा था, "ऐतिहासिक रूप से चाहे युद्ध ही क्यों न चल रहा हो पश्चिम के देश अपने सेना प्रमुख का कार्यकाल नहीं बढ़ाते. संस्थाएं अपने नियम क़ायदे का अनुसरण करती हैं और जब एक व्यक्ति के लिए इसमें बदलाव किया जाता है तो संस्थाएं नष्ट हो जाती हैं, जैसा कि जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने किया और सभी तानाशाह करते रहे हैं."

सेना प्रमुख और इमरान की जुलगबंदी

सेना घरेलू राजनीति में किसी तरह की दख़ल से इनकार करती रही है. लेकिन निजी तौर पर सुरक्षा अधिकारी कहते हैं कि वे (सेना) दो पुरानी पार्टियों से इतर पाकिस्तान की राजनीति का पुनर्निर्माण देखना चाहते हैं- या कम से कम उस नेतृत्व में बदलाव चाहते हैं जिसे वो भ्रष्ट मानते हैं.

पाकिस्तान की दोनों प्रमुख पार्टियों से देश के दो पूर्व प्रधानमंत्री और एक राष्ट्रपति फ़िलहाल भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में हैं.

सेना के वरीयता क्रम पर भी इसका असर

इन सब के बीच एक और चर्चा जोरों पर है. ताज़ा घोषणा से जॉइंट चीफ़ ऑफ़ स्टाफ के प्रमुख जनरल ज़ुबैर हयात को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं.

अभी यह देखा जाना बाक़ी है कि क्या नवंबर में ख़त्म हो रहे उनके कार्यकाल को भी बढ़ाया जाएगा?

अगर उन्हें विस्तार नहीं दिया जाता है तो क्या जनरल बाजवा उनके ऑफिस को भी नवंबर के बाद संभालेंगे या एक नया प्रमुख लाया जाएगा.

वहीं इमरान ख़ान के इस फ़ैसले से पाकिस्तान सेना के शीर्ष क्रम पदोन्नति पर भी प्रभाव पड़ेगा.

वरीयता क्रम में लेफ़्टिनेंट जनरल की पदोन्नति इस पर निर्भर करेगी कि नए जॉइंट चीफ़ ऑफ़ स्टाफ की नियुक्ति की जाती है या नहीं.

नवंबर में लेफ़्टिनेंट जनरल सरफ़राज़ सत्तार सबसे वरिष्ठ अधिकारी हो जाते और उनके बाद लेफ़्टिनेंट जनरल नदीम रज़ा और लेफ़्टिनेंट जनरल हुमायूं अज़ीज़.

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