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रुस-चीन ने साथ उड़ाए लड़ाकू विमान, कोरिया-जापान ने दिया जवाब
रूस का कहना है कि उसने पहली बार चीन के साथ साझा हवाई गश्ती अभ्यास किया है. इसकी जवाब में दक्षिण कोरिया और जापान को अपने लड़ाकू विमानों को तुरंत उड़ाना पड़ा.
रूस के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक चार बमवर्षक विमानों ने लड़ाकू विमानों की मदद से जापान सागर और पूर्वी चीन सागर के ऊपर से एक पूर्व निर्धारित रास्ते पर गश्ती उड़ानें भरी हैं.
वहीं दक्षिण कोरिया का कहना है कि जब रूसी विमानों ने उसके हवाई क्षेत्र में दख़ल दी तो उसके लड़ाकू विमानों ने चेतावनी देते हुए फ़ायरिंग की.
वहीं जापान ने इस घटनाक्रम के बाद दक्षिण कोरिया और रूस दोनों से विरोध जताया है.
ये घटना विवादित डोकडो/ताकेशीमा द्वीप के ऊपर हुई है. इस द्वीप पर अभी दक्षिण कोरिया का प्रशासन है लेकिन जापान भी इस पर दावा करता है.
हाल के सालों में रूसी और चीनी बमवर्षक विमानों और जासूसी विमानों ने इस क्षेत्र में उड़ानें भरी हैं लेकिन रूस और चीन के बीच हुई ये इस तरह की पहली घटना है.
रूस का क्या कहना है?
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक उसके स्ट्रेटेज़िक मिसाइलों से लैस दो टीयू-95एमएस विमानों ने दो चीनी होंग-6के बमवर्षक विमानों के साथ एक पूर्व निर्धारित रूट पर तटस्थ जल क्षेत्र के ऊपर उड़ान भरी.
इन बमवर्षक विमानों के साथ लड़ाकू विमान और जासूसी विमान भी थे.
टीवी पर प्रसारित एक बयान में लेफ्टिनेंट जनरल सर्गेई कोबीलाश ने कहा, "एक समय ये गश्ती दल एक रेखा में एक दूसरे से लगभग दो मील दूर उड़ रहा कई विमानों का दल बन गया."
उन्होंने कहा कि इस दौरान 11 बार विदेशी लड़ाकू विमानों ने उनका पीछा किया.
उन्होंने दक्षिण कोरियाई पायलटों पर विवादित द्वीप के ऊपर ख़तरनाक करतब दिखाने के आरोप लगाए.
उन्होंने दक्षिण कोरियाई विमानों की छद्म फ़ायरिंग की भी पुष्टि की.
उन्होंने कहा कि विमानों का ये दल डोकडा/ताकेशीमा द्वीप से पच्चीस किलोमीटर दूर था.
उन्होंने दक्षिण कोरियाई पायलटों पर हवा में हुड़दंग के आरोप भी लगाए.
ये गठबंधन उड़ा देगा अमरीका की नींद?
बीबीसी के रक्षा संवाददाता जोनाथन मार्कस का मानना है कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में रूस और चीन के लंबी दूरी के बमवर्षक विमानों की ये 'साझा हवाई गश्त' रूस और चीन के बीच बन रहे शक्तिशाली सैन्य गठबंधन का मज़बूत संकेत देती है.
हालांकि अभी तक दोनों देशों ने औपचारिक गठबंधन नहीं किया है लेकिन उनके साझा अभ्यास बड़े और अधिक परिष्कृत हैं.
ये दोनों देशे, जिनके बीच कुछ विवाद भी हैं, आर्थिक और सैन्य मोर्चे पर एक दूसरे के क़रीब आ रहे हैं. दोनों का वैश्विक नज़रिया भी एक जैसा ही है.
ये पश्चिमी उदारवादी लोकतंत्र के ख़िलाफ़ हैं, इसके विकल्प के मॉडल को बढ़ावा देने को आतुर हैं, अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति बेहद रक्षात्मक हैं और अक्सर दूसरे की तुलना में किसी न किसी तरह की जोख़िम भरी सवारी करने के लिए तैयार हैं.
ये अमरीका की रणनीति के लिए बड़ी चुनौती है. यदि एक मुखर लेकिन गिरावट की ओर जा रहे रूस और उदयमान चीन के बीच रिश्ते और मज़बूत होते हैं तो अमरीका की चिंता बढ़ना तय है.
अगले कुछ सालों में चीन आर्थिक और तकनीकी मोर्चे पर अमरीका से आगे निकलता दिख रहा है.
दक्षिण कोरिया ने क्या कहा?
दक्षिण कोरिया की सेना का कहना है कि पांच विमानों ने मंगलवार सुबह स्थानीय समयानुसार नौ बजे के क़रीब उसके क्षेत्र में दख़ल दी.
एफ़-15 और एफ़-16 विमानों को रोकने के लिए तुरंत उड़ाया गया. सेना का कहना है कि उसने पहले उल्लंघन के दौरान मशीन गन से 280 गोलियां दागी गईं.
दक्षिण कोरिया ने सुरक्षा परिषद के समक्ष भी अपना विरोध दर्ज करवाया है और परिषद से कार्रवाई करने की मांग की है.
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "हमने इस स्थिति को बेहद गंभीरता से लिया है, अगर दोबारा ऐसा हुआ तो हम सख़्त क़दम उठाएंगे."
दक्षिण कोरिया ने चीन के सामने भी विरोध दर्ज करवाया है वहीं चीन का कहना है कि दक्षिण कोरिया का हवाई रक्षा पहचान क्षेत्र उसका इलाक़ाई हवाई क्षेत्र नहीं है ऐसे में कोई भी यहां से उड़ान भर सकता है.
और जापान का क्या लेना देना है?
जापानी सरकार ने दक्षिण कोरिया और रूस दोनों के ख़िलाफ़ शिकायत दी है.
क्योंकि जापान इन द्वीपों पर अपना अधिकार मानता है. जापान की सरकार का कहना है कि रूस ने उसके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है.
जापान ने ये भी कहा है कि दक्षिण कोरिया की प्रतिक्रिया अफ़सोसनाक है.
क्या होता है हवाई रक्षा पहचान क्षेत्र?
एयर डिफ़ेंस आइंडेंटिफ़िकेशन ज़ोन (एडीआईज़ेड) यानी हवाई रक्षा पहचान क्षेत्र वो हवाई इलाक़ा होता है जिसकी निगरानी कोई देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्य से करता है. विदेशी विमानों को एयर डिफ़ेंस ज़ोन में दाख़िल होने से पहले अपनी पहचान घोषित करनी होती है.
ये हवाई क्षेत्र राष्ट्रीय हवाई क्षेत्र से काफ़ी दूर तक होता है ताकि किसी संभावित ख़तरे के मद्देनज़र पर्याप्त चेतावनी जारी की जा सके.
लेकिन एडीआईज़ेड पर कोई अंतरराष्ट्रीय क़ानून मान्य नहीं होता क्योंकि स्वनिर्धातिर सीमाएं दूसरे देशों के दावों से टकरा सकती हैं, इसी वजह से कई बार उल्लंघन भी होता है.
पूर्वी चीन सागर क्षेत्र में भी हालात ऐसे ही हैं क्योंकि वहां दक्षिण कोरिया, चीन और जापान के हवाई रक्षा पहचान क्षेत्र एक दूसरे के ऊपर होते हैं.
वहीं संयुक्त राष्ट्र के कन्वेंशन के मुताबिक देश अपने ज़मीनी क्षेत्र के ऊपर और समंदर में तट से 12 नॉटिकल मील दूर तक के हवाई क्षेत्र को नियंत्रित कर सकते हैं.
इस मामले में दक्षिण कोरिया की कहना है कि रूसी विमान अपने एडीआईजेड से बहुत दूर निकलकर द्वीपों के ऊपर के हवाई क्षेत्र में दाख़िल हो गए थे.
हालांकि अन्य राष्ट्र इन द्वीपों पर दक्षिण कोरिया की संप्रभुता को स्वीकार नहीं करते हैं.
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