ब्रिटिश विदेश मंत्री ने बताया ईरान ने जवाबी कार्रवाई में किया टैंकर ज़ब्त

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ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेरेमी हंट ने कहा है कि ये स्पष्ट हो चुका है कि ईरान ने बदले की कार्रवाई के तहत खाड़ी में उनके एक तेल टैंकर पर कब्ज़ा कर लिया है.
ब्रिटिश विदेश मंत्री ने ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़ारिफ़ से फ़ोन पर बातचीत के बाद कहा कि ईरान ने इस कार्रवाई को इसी महीने अपने एक तेल टैंकर पर क़ब्जे़ का जवाब देने के लिए उनके एक टैंकर पर कब्ज़ा किया है जिसमें ब्रिटेन की भूमिका थी.
जेरेमी हंट ने कहा कि ब्रिटेन तनाव को दूर करने का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है मगर वो साथ ही खाड़ी में आवागमन करने वाले सभी जहाज़ों और टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ज़रुरी क़दम उठाएगा.
ईरान का कहना है कि ये तेल टैंकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन कर रहा था.
ईरान की न्यूज़ एजेंसी इरना के मुताबिक, फ़ोन पर बातचीत के दौरान ईरान केविदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने जेरेमी हंट से कहा कि अब इस जहाज़ को निश्चित तौर पर क़ानूनी कार्रवाई से होकर गुज़रना होगा.
स्टेना इंपेरो तेल टैंकर के मालिकों को चालक दल तक नहीं पहुँचने दिया जा रहा है मगर उन्होंने बताया कि उनकी सेहत अच्छी है. टैंकर ले जा रहे 23 चालक भारत, रूस, लातविया और फ़िलीपींस के नागरिक हैं.
हालांकि यह मसला सिर्फ़ एक टैंकर के ज़ब्त किए जाने का नहीं है. शुक्रवार को ही ब्रिटिश स्वामित्व वाले लाइबेरिया के एक टैंकर पर भी ईरान के हथियार बंद गार्डों ने कब्ज़ा कर लिय था लेकिन उसे उसी दिन छोड़ दिया गया.
आख़िर हुआ क्या है?
शुक्रवार को खाड़ी के मुख्य जलमार्ग पर ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने स्टेना इंपेरो को कब्ज़े में ले लिया था.
हंट ने बताया कि ईरानी जल सीमा में जाने से पहले ही यह टैंकर चार जहाज़ों और एक हेलीकॉप्टर से घिरा हुआ था.
"हम किसी भी सैन्य कार्रवाई के बारे में नहीं सोच रहे हैं. हम इस पूरे मसले का कूटनीतिक तरीक़े से हल करने का विकल्प देख रहे हैं."
ईरान के एक वरिष्ठ राजनयिक को जहाज़ को कब्ज़े में लिए जाने के बाद लंदन में विदेश कार्यालय में बुलाया भी गया था.
हंट ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि शनिवार को उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री से बात की.

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उन्होंने कहा "बीते शनिवार ईरान ने भरोसा दिलाया था कि वो तनाव को कम करना चाहता है लेकिन वो बिल्कुल इसके विपरीत कर रहा है, जिसने मुझे बेहद निराश किया है."
उन्होंने इस संबंध में ट्वीट किया.
"खाड़ी में हुई कल की घटना चिंताजनक स्थिति की ओर ध्यान दिलाती हैं. ये बताती हैं कि ईरान ने अवैध और अस्थिर करने वाले व्यवहार को अपना लिया है."
एक अन्य आपातकालीन कोबरा समिति की बैठक अभी होनी है.
ईरान की राष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी आईआऱएनए का कहना है कि इस टैंकर को मछली पकड़ने वाली एक नाव से टकराने के बाद जब्त कर लिया गया था.
हालांकि इस टैंकर पर सवार 23 क्रू मेंबर्स को किसी भी तरह की चोट लगने की ख़बर नहीं. इन 23 क्रू मेंबर्स में भारत, रूस, लाटविया और फीलिपीन्स के लोग शामिल हैं.
ईरान के विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़ ने कहा है कि यह ईरान ही है जो खाड़ी और होरमुज़ की खाड़ी की सुरक्षा को आश्वस्त करता है.
"जिब्राल्टर के विपरीत फारस की खाड़ी में हमारी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों को बनाए रखने के लिए है."
आख़िर इन तनातनी की पृष्ठभूमि क्या है ?
ईरान-अमरीका और ब्रिटेन के संबंधों में बीते कुछ महीनों में खटास आई है.
अमरीका और ईरान के बीच तो संबंध अप्रैल के बाद से बिगड़े हैं. जब अमरीका ने ईरान पर प्रतिबंधों को बढ़ाया तो ईरान ने भी अपना रुख़ स्पष्ट कर दिया.
ईरान और अमरीका के बीच हालिया तनाव उस वक़्त पैदा हुआ जब राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से अलग होने का फ़ैसला किया था.
इस समझौते पर 2015 में संयुक्त राष्ट्र समेत अमरीका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने हस्ताक्षर किए थे. समझौते में तय पाया गया था कि ईरान अपने परमाणु समझौते को कम करेगा और सिर्फ़ तीन फ़ीसदी यूरेनियम का इस्तेमाल कर सकेगा.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की ओर से परमाणु समझौते से अलग होने और पाबंदियों की बहाली के ऐलान में ईरान ने यूरेनियम संवर्धन में बढ़ोतरी की थी. ये यूरेनियम परमाणु बिजली घरों में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल होता है लेकिन इसे परमाणु बमों की तैयारी में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
इसके बाद बीते शुक्रवार को अमरीका ने दावा किया कि उसने एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया है.

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उन्होंने कहा कि जंगी जहाज़ यूएसएस बॉक्सर ने गुरुवार को 'रक्षात्मक कार्रवाई' तब की जब ड्रोन, जहाज़ के करीब़ 900 मीटर के दायरे में आ गया था. वहीं ईरान का कहना है कि उसे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है.
इसके बाद ईरान के विदेश उप मंत्री अब्बास अराक़ची ने एक ट्वीट किया.
"हमने ना तो स्ट्रेट ऑफ़ हॉरमुज़ में कोई ड्रोन खोया है और ना ही कहीं और. मुझे डर है कि यूएसएस बॉक्सर ने शायद ग़लती से अपने ही ड्रोन को तो नहीं मार गिराया."
क्या है अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया ?
व्हाइट हाउस नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रवक्ता ने कहा कि एक हफ्ते में इस तरह की यह दूसरी घटना थी जब ईरान ने ब्रिटेन को निशाना बनाया है. फ्रांस और जर्मनी ने ब्रिटेन का साथ देते हुए ईरान से कहा है कि वह ब्रिटेन के तेल टैंकर को जल्द से जल्द छोड़े.
जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने मार्ग के माध्यम से शिपिंग पर "अनुचित घुसपैठ" की निंदा की है. फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने भी चेतावनी दी है कि ऐसा करने से तनाव और बढ़ेगा.
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