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जेफ बेज़ोस अमेज़ॉन शुरू करने से 25 साल पहले क्या करते थे?
खुद से पूछिए कि आपका दिल क्या चाहता है?
दुनिया का सबसे अमीर आदमी और अमेज़ॉन कंपनी का मालिक जेफ बेज़ोस के अनुसार यह वो सवाल है जिसे किसी भी फ़ैसला से पहले हमलोगों को खुद से पूछना चाहिए.
और यही सवाल उन्होंने अमेज़ॉन की स्थापना से 25 साल पहले खुद से पूछा था. उस वक़्त वो एक अच्छी ख़ासी और आराम की नौकरी छोड़ने का मन बना रहे थे.
वो वॉल स्ट्रीट इवेस्टमेंट बैंक में काम करते थे और यहां से रिजाइन करने के बाद उन्होंने सिएटल में अपने पिता के गैराज से अमेज़ॉन की शुरुआत की थी.
और इस शुरुआत की तारीख़ थी- 05 जुलाई 1994.
वो वाकया, जिसने जेफ़ बेज़ोस का नज़रिया बदल दिया
साल 2010 में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में उन्होंने एक भावुक भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने अपने सफर के बारे में वहां के छात्रों को बताया था कि अमेज़ॉन की शुरुआत कैसे हुई थी और कैसे वो दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी बन गई. जेफ़ बेज़ोस ने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से ही अपनी पढ़ाई पूरी की थी.
यहां उन्होंने अपने बचपन का एक किस्सा सुनाया था, जिसने जीवन के प्रति उनका नज़रिया हमेशा के लिए बदल दिया.
जेफ़ बेज़ोस उस वक़्त 10 साल के थे, जब वो अपने दादा-दादी के साथ एक कार ट्रिप पर गए थे. इस दौरान उन्होंने इंसान की ज़िंदगी पर तंबाकू के असर का लेखा-जोखा किया था.
उन्होंने यह लेखा-जोखा अपनी दादी को यह बताने क लिए किया था कि सिगरेट की वजह से उन्होंने अपने जीवन का कितना वक़्त नष्ट कर दिया है.
यह सुनकर उनकी दादी रो पड़ीं. इसके बाद उनके दादा ने सड़क के किनारे गाड़ी रोकी, उससे बाहर उतरे और जेफ़ बेज़ोस के लिए गाड़ी का दरवाजा खोल दिया.
बेज़ोस ने कहा, "वो एक बुद्धिमान और शांत व्यक्ति थे. उन्होंने कभी मुझे नहीं डांटा था, लेकिन शायद यह पहली दफा था जब उन्होंने मुझे फटकार लगाई और वो चाहते थे कि मैं अपनी दादी से माफ़ी मांगू."
"मेरी दादा ने मेरी ओर देखा और कुछ देर बाद प्यार से कहा- जेफ़ एक दिन तुम यह समझ पाओगे कि विनम्र होना, एक बुद्धिमान होने से कहीं कठिन है."
जेफ बेज़ोस तब से यह नहीं भूल पाए हैं कि हर फ़ैसले की अहमियत होती है, जो हम अपनी सोच समझ से लेते हैं.
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कठिन फ़ैसला
1964 में जन्में बेज़ोस पढ़ाई में तेज़ थे और अपने दोस्तों और सहकर्मियों की तरह उन्होंने नौकरी की शुरुआत मैकडोनल्ड्स से की थी.
न्यू जर्सी के प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन करने के महज आठ साल बाद वो डीई शॉ एंड कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट बन गए थे.
डीई एंड शॉ एक वॉल स्ट्रीट इवेंस्टमेंट बैंक है, जहां से उन्होंने रिजाइन करके अमेज़ॉन की शुरुआत की थी.
2010 में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में दिए अपने भाषण में उन्होंने कहा था कि इंटरनेट की पहुंच तेज़ी से बढ़ रही थी और मैंने एक ऑनलाइन बुकस्टोर खोलने का फ़ैसला किया, जहां हज़ारों किताबें होती.
जेफ़ बेज़ोस ने कहा, "मैं अपना जॉब छोड़ना चाहता था और कुछ अलग करना चाहता था. मेरी पत्नी मुझे प्रोत्साहित करती थी और वो चाहती थी कि मैं अपने सपने को पूरा करूं."
"मेरे एक बॉस थे, जिन्हें मैं काफ़ी मानता था. मैंने उन्हें अपने आइडिया के बारे में बताया. वो मुझे पार्क ले गए, जहां उन्होंने मुझे आराम से सुना और कहा कि यह एक बेहतरीन आइडिया है, पर यह उनके लिए है, जिनके पास कोई काम नहीं है. उन्होंने कहा कि मेरे पास अच्छी नौकरी है."
"इस बात पर मैंने बहुत सोचा और काफ़ी सोचने के बाद मैंने फ़ैसला किया कि मुझे अपने सपने को पूरा करना है."
"मैं इस बात पर पछतावा नहीं करना चाहता था कि मैंने प्रयास ही नहीं किया, लेकिन अगर मैं प्रयास ही नहीं करता तो मुझे पछतावा ज़रूर होता. और मुझे अपने फ़ैसले पर गर्व है."
नई कंपनी की शुरुआत के लिए जेफ़ के मां-बाप ने अपनी जमा पूंजी उन्हें दी थी. 25 साल बाद आज अमेज़ॉन का नाम पूरी दुनिया में है. किताब बाज़ार में कंपनी का बोलबाला है.
भारत में भी अमेज़ॉन तेज़ी से अपना नाम और स्थान बना रहा है.
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