हॉन्गकॉन्ग में प्रदर्शन पर चीन आग बबूला

शी जिनपिंग

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हॉन्गकॉन्ग के प्रदर्शकारियों का शांतिपूर्ण विरोध तब हिंसक हो गया जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने कई घंटों तक संसद की इमारत को अपने क़ब्ज़े में रखा. सैकड़ों पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा.

चीन ने प्रदर्शनकारियों की इस हरकत को गंभीर रूप से ग़ैर-क़ानूनी और क़ानून की धज्जियां उड़ाने वाली क़रार दिया है.

चीन सरकार ने शहर के प्रशासन से इसकी जांच करने को कहा है.

हॉन्गकॉन्ग चीन का ही हिस्सा है लेकिन 'एक देश दो सिस्टम' के मुताबिक़ चलता है यानी हॉन्गकॉन्ग के पास स्वायत्ता है. इसके नागरिकों को कुछ ऐसे अधिकार भी हैं जो बाक़ी चीन के नागरिकों को नहीं हैं.

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चीन की सरकार ने कहा कि संसद भवन को नुक़सान पहुंचाना 'एक देश दो सिस्टम' के फॉर्मूले को चुनौती देना है.

बीबीसी की एशिया-पैसिफिक एडिटर सिलिया हेट्टन कहती हैं कि अभी तक चीन सरकार दूर से ही प्रदर्शन को लेकर प्रतिक्रिया दे रहा था लेकिन सोमवार की हिंसा के बाद ऐसा लगता है कि चीन हॉन्गकॉन्ग पर सख़्त होगा.

सरकार ने प्रत्यर्पण बिल को पिछले महीने ही स्थगित कर दिया था और अब शायद ही इसे पास किया जाए लेकिन प्रदर्शनकारी इसे पूरी तरह ख़त्म करवाना चाहते हैं और हॉन्गकॉन्ग की चीफ़ एग्जेक्युटिव कैरी लेम को कुर्सी छोड़ने के लिए कह रहे हैं.

सोमवार को क्या हुआ

एक जुलाई को ब्रिटिश शासन से हॉन्गकॉन्ग को चीन को सौंपने की सालगिरह के तौर पर मनाया जाता है और हर साल लोकतंत्र के लिए मार्च होता है. लेकिन इस साल सोमवार के दिन ये सालगिरह सामान्य नहीं थी.

जहां हॉन्गकॉन्ग की चीफ़ एक्ज़िक्यूटिव यानी सबसे बड़ी नेता कैरी लैम को झंडा फहराना था, उस जगह के आस-पास प्रदर्शनकारियों ने रास्ते जाम कर दिए.

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दोपहर तक सैकड़ों प्रदर्शनकारी मुख्य प्रदर्शन की जगह से हटकर संसद भवन के अंदर तक घुस गए.

अंदर प्रदर्शनकारियों ने मुख्य सभागार में हॉन्गकॉन्ग के प्रतीक चिह्न के साथ छेड़खानी की और ब्रितानी औपनिवेशिक झंडा लहराया.

कुछ लोगों ने फर्नीचर तोड़ दिए और दीवारों पर नारे लिख दिए.

उन्हें पुलिस की बार-बार दी गई चेतावनी के बाद हटाया जा सका.

कैरी लैम

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कैरी लैम ने क्या कहा

कैरी लैम ने कहा कि इस तरह की घटना कई लोगों के लिए झटके की तरह है और निराश करने वाली है.

एक जुलाई को होने वाले सालाना शांतिपूर्ण मार्च अपेक्षाकृत हॉन्गकॉन्ग के मूल भाव शांति और व्यवस्था को दर्शाता है.

थोड़ा भावुक होते हुए वे बोलीं कि उन्हें उम्मीद है कि समाज पहले की तरह जल्द ही सामान्य हो जाएगा.

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उन्होंने इस बात से पूरी तरह इनकार किया कि वे प्रदर्शनकारियों की मांग पूरी कर पाने में नाकाम होने की वजह से ज़िम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि हर मांग को नहीं मानना बिल्कुल सही है.

उन्होंने कहा कि सरकार का कार्यकाल ख़त्म होते ही नया बिल भी ख़त्म हो जाएगा.

कैरी ने कहा कि हर प्रदर्शनकारी को आधिकारिक तौर पर माफ़ी देना क़ानून के दायरे में नहीं है.

कैरी लैम ने कहा कि हॉन्ग कॉन्ग का प्रशासन प्रदर्शनकारियों की किसी ग़ैर-क़ानूनी हरकत पर कार्रवाई करेगा.

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लोग अब भी क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं

प्रदर्शनकारी उस बिल की पूरी तरह विदाई चाहते हैं जिसमें ये प्रावधान प्रस्तावित है कि हॉन्गकॉन्ग के लोगों पर मुक़दमा चलाने के लिए उन्हें चीन प्रत्यर्पित किया जा सकता है.

सरकार की दलील थी कि सिर्फ़ गंभीर और आपराधिक मामलों के अभियुक्तों को ही चीन भेजा जाएगा और हॉन्गकॉन्ग के एक जज की मंज़ूरी के बाद ही प्रत्यर्पण होगा, लेकिन लोग इस बिल को हॉन्गकॉन्ग की 'स्वायत्तता पर हमले' के तौर पर देख रहे हैं.

इसे राजनीतिक विरोधियों को ठिकाने लगाने का औज़ार माना जा रहा है.

विरोध प्रदर्शन जून में शुरू हुए. पहले विरोध सिर्फ़ नए क़ानून को लेकर था लेकिन अब प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि सभी हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए और पुलिस की हिंसक कार्रवाई की जांच हो.

प्रदर्शनकारी चीन सरकार की हॉन्गकॉन्ग के अधिकारों और क़ानून में बढ़ते दख़ल को लेकर भी चिंतित हैं.

कई प्रदर्शनकारी कह रहे हैं कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक उनकी सभी मांगें नहीं मान ली जातीं.

डोनल्ड ट्रंप

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दूसरे देश भी हॉन्गकॉन्ग की इस अशांति को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

सोमवार के हिंसक प्रदर्शन से पहले अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने प्रदर्शकारियों के समर्थन में कहा कि ये लोग लोकतंत्र की मांग कर रहे हैं लेकिन दुर्भाग्य से कुछ सरकारें लोकतंत्र नहीं चाहती हैं.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेरेमी हंट ने कहा कि ब्रिटेन हर तरह की हिंसा का विरोध करता है लेकिन प्रशासन को भी समस्या की जड़ को समझना चाहिए कि जो हुआ वो क्यों हुआ. हॉन्गकॉन्ग के लोग इस बात से चिंतित हैं कि उनकी आज़ादी पर हमला हो रहा है.

ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने कहा कि हॉन्गकॉन्ग के लोग ग़ुस्से और निराशा से भर रहे हैं और एक देश दो सिस्टम का आइडिया झूठ के सिवाय कुछ नहीं है.

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