पाकिस्तानी रुपया 164 पर पहुंचा, इमरान के बस से बाहर हुए हालात

    • Author, टीम बीबीसी हिन्दी
    • पदनाम, नई दिल्ली

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था हर दिन नए संकट में फँसती जा रही है.

अमरीकी डॉलर की तुलना में पाकिस्तानी रुपया बुधवार को 164 तक चला गया. ऐसा इंटर बैंकिंग ट्रेड में हुआ है. दूसरी तरफ़ खुले बाज़ार में भी रुपया 160 के पार पहुंच गया. बुधवार को पाकिस्तानी रुपया एक डॉलर की तुलना में 7.2 रुपए कमज़ोर हुआ.

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही संकट में घिरी है ऐसे में रुपए में जारी गिरावट से संकट और गहरा गया है. रुपया ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर आ गया है.

पाकिस्तान में इस हफ़्ते सोने की क़ीमत में भी भारी बढ़ोतरी देखी गई. बुधवार पाकिस्तान में सोने का कारोबार 80,500 रुपए प्रति 12 ग्राम की दर से हुआ. पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार भी 7.6 अरब डॉलर के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है.

पिछले हफ़्ते स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) के गवर्नर डॉक्टर रज़ा बक़ीर ने कहा था, "रुपए में यह गिरावट कुछ वक़्त के लिए ही है."

तीन जून से रुपए में गिरावट का दौर देखा जा रहा है और यह अभी तक 9 फ़ीसदी यानी 13.58 रुपए तक कमज़ोर हुआ है.

पाकिस्तान का वर्तमान वित्तीय वर्ष 30 जून का समाप्त हो रहा है. रज़ा बक़ीर ने कहा कि यह गिरावट इसलिए देखी जा रही है क्योंकि कई कंपनियों को 30 जून तक अपने सभी अंतरराष्ट्रीय भुगतान करने होंगे और इसके लिए उन्हें डॉलर की ज़रूरत पड़ रही है.

इमरान ख़ान के प्रधानमंत्री बनने के बाद से पिछले 10 महीने में पाकिस्तानी रुपए में 29 फ़ीसदी की गिरावट आई है. पिछले साल 18 अगस्त को पाकिस्तानी रुपया 123.35 पर था जो 26 मई, 2019 को 160 के पार चला गया.

पाकिस्तान के इतिहास में इतनी छोटी अवधि में इतनी बड़ी गिरावट पहली बार हुई है. आईएमएफ़ से छह अरब डॉलर के क़र्ज़ के समझौते को देखते हुए पाकिस्तानी रुपए में और गिरावट की आशंका जताई जा रही है.

पाकिस्तान प्रॉफिट से पाक कुवैत इन्वेस्टमेंट को एवीपी रिसर्च के अदनान शेख ने कहा है, ''रुपया इस साल के अंत तक 175 से 180 तक जा सकता है.'' अदनान शेख ने कहा, ''रुपए में गिरावट तय है. इसे रोका नहीं जा सकता. आज या कल इसमें गिरावट तय है. भुगतान के लिए डॉलर की मांग बढ़ रही है और हमारे पास पर्याप्त डॉलर नहीं हैं. ऐसे में हमें डॉलर ख़रीदना पड़ेगा. जब हम डॉलर ख़रीदेंगे तो रुपए में गिरावट आएगी ही.''

इमरान ख़ान सरकार में आने से पहले रुपए में गिरावट को लेकर काफ़ी आक्रामक रहते थे. लेकिन अब ख़ुद इमरान ख़ान लाचार दिख रहे हैं.

इमरान के हाथ से फिसलते हालात

आर्थिक संकट को देखते हुए ही 10 जून को राष्ट्र के नाम संबोधन में पाकिस्तानी पीएम इमरान ख़ान ने सभी पाकिस्तानियों से कहा था कि 30 जून तक अपनी संपत्ति की घोषणा कर दें ताकि वैध और बेनामी संपत्ति का फ़र्क़ पता चल सके.

प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा था कि 30 जून तक अपनी बेनामी संपत्ति, बेनामी बैंक अकाउंट, विदेशों में रखे पैसे को सार्वजनिक कर दें क्योंकि 30 जून के बाद यह मौक़ा नहीं मिलने जा रहा.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा था, ''पिछले 10 साल में पाकिस्तान का क़र्ज़ छह हज़ार अरब से 30 हज़ार अरब रुपए तक पहुंच गया है. जो हम चार हज़ार अरब रुपए का सालाना टैक्स इकट्ठा करते हैं उसकी आधी रक़म क़र्ज़ों की किस्तें अदा करने में जाती हैं. बाक़ी का पैसा जो बचता है उससे मुल्क का खर्च नहीं चल सकता है. पाकिस्तानी वो कौम हैं जो दुनिया भर में सबसे कम टैक्स अदा करते हैं लेकिन उन चंद मुल्कों में से है जहां सबसे ज़्यादा ख़ैरात का बोझ है. अगर हम तैयार हो जाएं तो कम से कम हर साल 10 हज़ार अरब रुपए इकट्ठा कर सकते हैं.''

आईएमएफ़ की शर्तें

पाकिस्तान आईएमएफ़ से छह अरब डॉलर का क़र्ज़ ले रहा है और इस क़र्ज़ के एवज में इमरान ख़ान की सरकार ने वादा किया है कि वो देश की आर्थिक नीतियां उसकी शर्तों के हिसाब से आगे बढ़ाएंगे. पाकिस्तान पर दबाव है कि अगले 12 महीने में 700 अरब रुपए के फंड की व्यवस्था करे.

आईएमएफ़ ने पाकिस्तान को खर्चों में कटौती और टैक्सों में बढ़ोतरी के लिए कहा है. पाकिस्तान का बजट इस मामले में ऐतिहासिक होने वाला है क्योंकि इससे उसके भविष्य की राह तय होगी. आर्थिक संकट के साथ पाकिस्तान में अमीरों और ग़रीबों के बीच की खाई भी बेतहाशा बढ़ी है.

पाकिस्तान में भीषण विषमता कराची, लाहौर और इस्लामाबाद के बाज़ार को देखकर भी समझा जा सकता है. हाल के वर्षों में इन शहरों में ऑटोमोबाइल के बेहतरीन ब्रैंड के सारे स्टोर खोले गए हैं जबकि इन शहरों से ओझल होते ही बड़ी आबादी दो जून की रोटी के लिए संघर्ष कर रही है.

पाकिस्तान की पिछली मुस्लिम लीग की सरकार ने अपने आर्थिक सर्वे में बताया था कि कैसे आयात और निर्यात के बीच अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है.

इमरान ख़ान ने अपने चुनावी अभियानों में कहा था कि वो प्रधानमंत्री बनने के बाद ख़ुदकुशी करना पसंद करेंगे लेकिन क़र्ज़ नहीं लेंगे. इमरान ख़ान प्रधानमंत्री भी बन गए और लेकिन उन्हें क़र्ज़ के अलावा कोई विकल्प नहीं दिखा.

घटता विदेशी मुद्रा भंडार

पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार कम हो रहा है. हाल ही में भारत में संपन्न हुए आम चुनाव में क़रीब सात अरब डॉलर खर्च हुए हैं जबकि पाकिस्तान के पास इतना विदेशी मुद्रा भंडार बचा है. निर्यात न के बराबर हो गया है और महंगाई लगातार बढ़ रही है.

राजस्व घाटा आसमान छू रहा है तो भुगतान संतुलन भी पटरी से उतर गया है. क़र्ज़ के बदले ख़ुदकुशी की बात करने वाले इमरान ख़ान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की शरण में जाना पड़ा. आईएमएफ़ से पाकिस्तान का यह 22वां क़र्ज़ है. पाकिस्तान के कुल खर्चों का 30.7 फ़ीसदी हिस्सा क़र्ज़ों की किस्तों के भुगतान में चला जाता है.

पाकिस्तान का खर्च आयात पर लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन निर्यात से कुछ भी हासिल नहीं हो रहा है. पाकिस्तान ने अपनी आर्थिक सेहत नहीं सुधारी तो डिफॉल्टर होने का ख़तरा और बढ़ जाएगा. 2015 में पाकिस्तान का चालू खाता घाटा 2.7 अरब डॉलर था जो 2018 में बढ़कर 18.2 अरब डॉलर हो गया.

करंट अकाउंट डेफिसिट के कारण पाकिस्तान का व्यापार घाटा बढ़ता जा रहा है. चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के कारण पाकिस्तान का आयात लगातार बढ़ता गया. सीपीईसी चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना वन बेल्ट वन रोड का हिस्सा है जिसके तहत उसने पाकिस्तान में क़रीब 60 अरब डॉलर का निवेश किया है.

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