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‘इमरान ख़ान मारते भी हैं और रोने भी नहीं देते’: उर्दू प्रेस रिव्यू
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते पाकिस्तान में बढ़ती मंहगाई, दाता दरबार दरगाह में चरमपंथी हमला और नवाज़ शरीफ़ की ज़मानत की समाप्ति से जुड़ी ख़बरें सुर्ख़ियों में रही.
सबसे पहले बात बढ़ती महंगाई की. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि उन्हें बढ़ती महंगाई का एहसास है लेकिन क़र्ज़ उतारने के लिए मुश्किल वक़्त से गुज़रना पड़ेगा.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार रावलपिंडी में एक अस्पताल का उद्घाटन करते हुए इमरान ख़ान ने कहा, ''हमारे पास दो ही ऑप्शन थे. या तो हम और क़र्ज़ बढ़ने दें या फिर हम क़ीमतें बढ़ाएं. क़र्ज़ों की बीमारी को ख़त्म करने के लिए ऑपरेशन करना पड़ेगा. हम जब सरकार में आए तो 1300 अरब रुपए का क़र्ज़ विरासत में मिला. क़र्ज़ उतारने के लिए आमदनी में इज़ाफ़ा और ख़र्च में कमी करनी पड़ती है.''
दरअसल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था संकट के दौर से गुज़र रही है और रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ें काफ़ी महंगी हो गई हैं. पेट्रोल, गैस, बिजली की क़ीमतें आसमान छू रही हैं.
एक्सप्रेस अख़बार के अनुसार पाकिस्तान की जीडीपी विकास दर मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए केवल 3.29 फ़ीसदी रही जबकि अनुमान 6.2 फ़ीसदी था. ये दर पिछले नौ सालों में सबसे कम रही है.
750 अरब रुपये के नए टैक्स
पाकिस्तान को आर्थिक तंगी से निकालने के लिए आईएमएफ़ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) से बेलआउट पैकेज की बात चल रही है.
एक्सप्रेस के अनुसार पाकिस्तान और आईएमएफ़ के बीच बेलआउट पैकेज को लेकर समझौता हो गया है. अख़बार ने सुर्ख़ी लगाई है '750 अरब का टैक्स और आठ अरब डॉलर का पैकेज'.
अख़बार लिखता है कि तीन साल के प्रोग्राम के तहत आईएमएफ़ पाकिस्तान को क़िस्तों में आठ अरब डॉलर की रक़म देगा. अख़बार के अनुसार समझौते के तहत पाकिस्तान क़रीब 750 अरब रुपए के नए टैक्स लगाएगा.
समझौते की शर्तों के अनुसार तमाम क्षेत्रों को दी जाने वाली सब्सिडी ख़त्म कर दी जाएगी और घाटे में चल रही कंपनियों का निजीकरण कर दिया जाएगा. डॉलर की क़ीमत और ब्याज दर बाज़ार के हिसाब से तय होगा. इसके अलावा पाकिस्तान आईएमएफ़ से मिलने वाले पैसे का चीन और दूसरे साथी देशों से मिलने वाले क़र्ज़ को चुकाने के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकेगा.
लेकिन अख़बार नवा-ए-वक़्त के मुताबिक़, आईएमएफ़ से बातचीत अभी पूरी तरह मुक़म्मल नहीं हुई है और दो दिन और बातचीत होगी. अख़बार के अनुसार इमरान ख़ान ने अपनी टीम से कहा है कि आईएमएफ़ से अपनी शर्तों को थोड़ा और नरम करने के लिए कहा जाए.
इमरान ख़ान की हो रही आलोचना
अख़बार दुनिया का भी यही कहना है कि इमरान ख़ान आईएमएफ़ की शर्तों को लेकर काफ़ी दबाव में हैं और वो शर्तों को और नरम करना चाहते हैं. पाकिस्तान में विपक्षी पार्टियां इसको बड़ा मुद्दा बना रही हैं और इमरान ख़ान सरकार की आलोचना कर रही हैं.
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने पाकिस्तानी संसद में सत्तारुढ़ पार्टी पर हमला करते हुए कहा कि इमरान ख़ान की सरकार पीटीआई (इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़) नहीं बल्कि पीटीआईएमएफ़ की सरकार है.
बिलावल ने कहा कि आईएमएफ़ ने वित्त मंत्रालय, एफ़बीआर और स्टेट बैंक पर क़ब्ज़ा कर लिया है. एक धुंआधार तक़रीर में बिलावल ने कहा, "हमारे वित्त मंत्री, एफ़बीआर और स्टेट बैंक के गवर्नर को अचानक हटा दिया जाता है. अवाम सब देख रही है. वो ज़रूर सवाल करेगी कि ये फ़ैसले कौन कर रहा है, कहीं ऐसा तो नहीं कि आईएमएफ़ ये सारे फ़ैसले कर रहा है.''
उन्होंने इमरान ख़ान पर हमला बोलते हुए कहा, "ग़रीबों का आर्थिक क़त्ल हो रहा है. ये मारते भी हैं और रोने भी नहीं देते. ये तो वही पुराना जनरल ज़ियाउल हक़, परवेज (जनरल परवेज़ मुशर्रफ़) वाला पाकिस्तान है.''
दाता दरबार दरगाह पर हमला
लाहौर की मशहूर सूफ़ी दरगाह दाता दरबार के बाहर हुए चरमपंथी हमले का ज़िक्र भी सारे अख़बारों में है. अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार इस हमले के एक और ज़ख़्मी की शुक्रवार को मौत हो गई.
इस तरह इस हमले में मरने वालों की संख्या 12 हो गई है. अख़बार के अनुसार पुलिस ने शक की बुनियाद पर छह लोगों को गिरफ़्तार भी किया है.
ग़ौरतलब है कि बुधवार को दाता दरगाह के बाहर हुए चरमपंथी हमले में पुलिस के वैन को निशाना बनाया गया था. इस आत्मघाती हमले में पांच पुलिसकर्मी समेत कुल 10 लोग मारे गए थे और 25 ज़ख्मी हुए थे. बाद में दो और लोगों की मौत हो गई.
रैली की शक्ल में किया सरेंडर
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ भ्रष्टाचार के मामले में जेल की सज़ा काट रहे हैं. लेकिन उनकी ख़राब सेहत को देखते हुए अदालत ने उन्हें छह हफ़्तों की ज़मानत दे दी थी.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार इसी हफ़्ते उनकी ज़मानत की मुद्दत ख़त्म हुई और उन्होंने जेल अधिकारियों के सामने ख़ुद को पेश कर दिया. लेकिन उन्होंने अपने निवास स्थान से जेल तक का सफ़र एक रैली की शक्ल में तय किया.
उनकी पार्टी मुस्लिम लीग (नवाज़ गुट) के हज़ारों समर्थक भी उस जुलूस में शामिल हुए. जेल जाने से पहले नवाज़ शरीफ़ ने अपने कार्यकर्ताओं को एक संदेश देते हुए कहा, "ज़ुल्म की ये रात ख़त्म होगी और काल कोठरी से मुझे निजात मिलेगी. मेरे कार्यकर्ता जानते हैं कि मुझे किस गुनाह की सज़ा दी जा रही है.''
नवाज़ शरीफ़ के भाई और पार्टी के अध्यक्ष शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि जेल के दरवाज़े नवाज़ शरीफ़ को अवाम से ज़्यादा दिनों तक अलग नहीं रख सकते. शहबाज़ शरीफ़ इन दिनों लंदन में हैं. वहीं से उन्होंने ये बयान जारी कर कहा कि एक बार फिर साबित हो गया है कि शरीफ़ ख़ानदान आरोपों से डरकर भागने वाला नहीं है.
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