श्रीलंका में सभी मुसलमान मंत्रियों ने इस्तीफ़ा दिया

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श्रीलंका में एक बौद्ध भिक्षु के एक मुस्लिम मंत्री और एक गवर्नर की इस्तीफ़े की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठने के कुछ दिनों के बाद सोमवार को दो मुसलमान गवर्नरों ने इस्तीफ़ा दे दिया.
श्रीलंका में अप्रैल में ईस्टर संडे को चर्चों और होटलों को निशाना बनाकर सिलसिलेवार धमाके हुए थे, इन धमाकों के बाद श्रीलंका में कुछ मुसलमान संगठनों पर भी उंगलियां उठी थी. शुक्रवार को एक बौद्ध भिक्षु अतुरालिए रतना थिरो ने मंत्री रिशाद बाथिउद्दीन और गवर्नर एएलएएम हिज़्बुल्लाह और अजत सैली के इस्तीफ़े की मांग करते हुए भूख हड़ताल शुरू कर दी थी.
बौद्ध भिक्षु रतना थिरो सांसद भी हैं और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमासिंघे की पार्टी यूएनपी के सांसद हैं.
रतना थिरो और कुछ अन्य कट्टर बौद्ध संगठनों ने मुस्लिम नेताओं पर ईस्टर संडे के संदिग्धों से संबंध होने का आरोप लगाया था और उनके इस्तीफ़े की मांग की थी. हालाँकि मुस्लिम मंत्रियों और संगठनों ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए इनका खंडन किया था.
रतना थिरो और बौद्ध संगठनों की मांग है कि इन मंत्रियों और गवर्नरों की जाँच की जाए. बौद्ध भिक्षु के आमरण अनशन पर बैठने के बाद श्रीलंका के अलग-अलग हिस्सों में जमकर प्रदर्शन हुए थे.
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बौद्ध भिक्षु और संगठनों के समर्थन में सोमवार को कैंडी में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए. कैंडी के दलादा मालिगवा के बौद्ध मंदिर में ही रतना थिरो आमरण अनशन कर रहे थे.
इसके बाद, सोमवार दोपहर को दो मुस्लिम गवर्नरों अजत सैली और हिज़्बुल्लाह ने इस्तीफ़ा दे दिया. राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरीसेना ने गवर्नरों का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया है.
गवर्नरों के इस्तीफ़े के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल सभी मुस्लिम मंत्रियों, उप मंत्रियों और राज्य मंत्रियों ने भी त्याग पत्र दे दिया है.
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