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मोदी पर इमरान के बयान को लेकर क्या कहा पाकिस्तानी अख़बारों नेः उर्दू प्रेस रिव्यू
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपे उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते भारत में चल रहे लोकसभा चुनावों और उससे जुड़े इमरान ख़ान के बयान को लेकर काफ़ी कुछ लिखा गया जिसमें उन्होंने कहा था कि मोदी की जीत से कश्मीर संकट के सुलझने की संभावना ज़्यादा है.
जंग अख़बार में अफ़ज़ाल रेहान ने एक लेख लिखा है जिसका शीर्षक है 'भारतीय चुनावों में विजेता कौन?'
अफ़ज़ाल कहते हैं कि अपने सियासी फ़ायदे के लिए मोदी ने जिस तरह से पाकिस्तान के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी की है और जिस तरह झूठ पर झूठ बोले उनकी बुनियाद पर अगर वो चुनाव जीत भी जाते हैं तो भी ऐतिहासिक तौर पर वो बड़े लीडर कहलाने के हक़दार कभी भी नहीं बन पाएंगे.
इस संबंध में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने जो बयान दिया कि मोदी की जीत से कश्मीर समस्या के हल होने की अधिक संभावना है, इस पर अफ़ज़ाल रेहान लिखते हैं, "इस तरह का बयान कोई ऐसा व्यक्ति ही दे सकता है जो भारतीय सियासत की बुनियादी सच्चाइयों से वाक़िफ़ न हो."
वो आगे लिखते हैं, ''हमें अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि पिछली सरकार (नवाज़ शरीफ़ की सरकार) के पास भारतीय नेतृत्व ख़ुद चल कर आई थी जिससे विवादास्पद मुद्दों के हल होने की उम्मीद बांधी जा सकती थी, मगर हमने उसकी क्या दुर्गति बनाई. वाजपेयी आए तो करगिल हो गया और फिर वही परवेज़ मुशर्रफ़ बाद में भारतीय नेताओं से बातचीत के लिए बेक़रार नज़र आए. दिल्ली और आगरा की यात्रा पर गए मगर नाकाम लौटे. अगर हमें तरक़्क़ी करनी है तो शांति, भाईचारा और दोस्ती के अलावा कोई दूसरा ऑपशन नहीं है.''
इमरान ख़ान का बयान
इमरान ख़ान का वो बयान पाकिस्तानी मीडिया में छाया रहा जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर मोदी दोबारा पीएम बनते हैं तो कश्मीर मसले का हल ढूंढने में ज़्यादा आसानी होगी.
लेकिन ख़ुद इमरान के विदेश मंत्री इस बारे में कुछ और ही कहते हैं.
उन्होंने कहा कि इमरान ख़ान के बयान को बिना किसी संदर्भ के पेश किया गया है.
अख़बार दुनिया के अनुसार शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा है कि ''किसी के यार हैं न मददगार, भारत में जो जीतेगा उसी से बात होगी.''
विदेशी पत्रकारों का बालाकोट दौरा
पाकिस्तान ने इस हफ़्ते कई विदेशी पत्रकारों और राजनयिकों को बालाकोट स्थित उस मदरसे का दौरा करवाया जिस पर भारतीय वायुसेना ने हमला किया था.
अख़बार दुनिया ने इस पर सुर्ख़ी लगाई है, ''विदेशी पत्रकारों का बालाकोट दौरा, भारत के झूठे दावे की सच्चाई दुनिया ने देख ली.''
अख़बार के अनुसार भारत में रहने वाले विदेशी पत्रकार समेत कई विदेशी पत्रकारों और कई राजनयिकों ने बालाकोट स्थित चरमपंथी शिविर को हवाई हमले में तबाह करने और तीन सौ से अधिक चरमपंथियों को मार गिराने के भारतीय दावों की हक़ीक़त ख़ुद अपनी आंखों से देख ली.
अख़बार के अनुसार पत्रकारों और राजनयिकों ने मदरसे के छात्रों और शिक्षकों से खुलकर बातचीत की और अपनी आंखों से देखा कि मदरसे को किसी क़िस्म का कोई नुक़सान नहीं पहुंचा है.
अख़बार के अनुसार पाकिस्तानी सेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि भारत को लगातार झूठे दावे की रट लगाए रखने के बजाए, सच्चाई को स्वीकार कर लेना चाहिए.
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