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डोनल्ड ट्रंप ने कहा- अमरीका और चीन एतिहासिक व्यापार सौदे के क़रीब
अमरीका और चीन के बीच जुलाई 2018 में शुरू हुए ट्रेड वार को दोनों देश अब ख़त्म करने की कगार पर आ गए हैं.
ट्रेड वार को ख़त्म करने के लिए दिसंबर में बनी आपसी सहमति को अमलीजामा पहनाने के लिए दोनों देश बातचीत कर रहे हैं.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि चीन के साथ व्यापार वार्ता में कुछ सबसे जटिल मुद्दों पर अमरीका की सहमति बन गई है.
उन्होंने कहा कि अगले चार हफ़्तों में यह समझौता हो सकता है, लेकिन कुछ बाधाएं अभी भी रहती हैं.
चीन ने भी इस पर सकारात्मक उम्मीद जताई है, चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी इस पर ठोस प्रगति की बात की है.
दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे अमरीका-चीन ट्रेड वार को सुलझाने को लेकर दोनों देश दिसंबर से बातचीत कर रहे हैं.
ट्रंप ने कहा कि चीन के साथ 'कई बहुत ही जटिल मुद्दों' पर हमने 'कुछ रास्ते तलाशे' हैं.
चीन के उप-प्रधानमंत्री लियू ही के साथ बातचीत से पहले ट्रंप ने व्हाइट हाउस में ये बाते कही.
अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि कोई समझौता होता है तो वो चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक समिट भी करेंगे.
ट्रंप ने कहा, "यह एक एतिहासिक डील होगा- अगर होता है. इस डील के होने के बहुत अच्छे आसार हैं."
दोनों देशों के बीच पिछले कुछ हफ़्तों के दौरान जिन मुद्दों को लेकर समझौते पर बातचीत हो रही है उनमें एक दूसरे पर लगाए गए व्यापार शुल्क को तेज़ी से वापस लेना अहम है.
ट्रंप ने इनमें से कुछ को बनाए रखने का सुझाव भी दिया है.
उन्होंने कहा कि यदि अब यह समझौता नहीं होता है तो चीन के साथ पहले की तरह ही व्यापार करना अमरीका के लिए बहुत मुश्किल होगा.
विरोधी संकेत
दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ने बीते वर्ष एक दूसरे के ख़िलाफ़ अरबों डॉलर का टैरिफ लगाया था.
दिसंबर में दोनों ने इसे मुद्दे को सुलझाने के लिए बातचीत करना शुरू किया और अब जा कर इस पर कुछ अहम सहमति बनती नज़र आ रही है.
बीबीसी चीन के संवाददाता रॉबिन ब्रांट ने कहा कि दोनों पक्ष- फिर से- परस्पर विरोधी संकेत दे रहे थे.
शिन्हुआ के मुताबिक चीन के उप-प्रधानमंत्री लियू ने कहा कि अमरीका और चीन के बीच व्यापार समझौते को लेकर महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक नई सहमति बनी है.
यानी लियू का बयान ट्रंप के बयान से मेल खाता है लेकिन अमरीकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइज़र ने इस पर और सतर्क रहने की बात कही है.
उन्होंने कहा है कि रिपोर्ट के मुताबिक व्यापार वार्ता में अभी कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात बाकी है.
ब्रांड ने कहा कि अब भी दोनों देशों के बीच अहम मुद्दों पर एक निश्चित दूरी बनी हुई है.
क्या बातचीत हो रही है?
अमरीका ने चीन पर अमरीकी कंपनियों की बौद्धिक संपदा की चोरी का आरोप लगाते हुए उन पर तकनीक हस्तांतरित करने को लेकर दबाव डाला है.
अमरीका चाहता है कि चीन अपनी आर्थिक नीतियों में बदलाव करे. उसका कहना है कि चीन सब्सिडी और अन्य समर्थन के जरिए ग़लत तरीके से घरेलू कंपनियों का साथ देता है.
साथ ही वो चाहता है कि चीन अधिक-से-अधिक अमरीकी उत्पादों को ख़रीदे ताकि व्यापार घाटे को कम किया जा सके.
उधर चीन ने अमरीका पर सबसे बड़ा व्यापार युद्ध शुरू करने का आरोप लगाया है और अर्थव्यवस्था में व्यापक संरचनात्मक बदलाव करने की उनकी कोई संभावना नहीं दिखती है.
दांव पर क्या है?
यदि दोनों देशों के बीच समझौता नहीं होता है तो अमरीका चीन से आने वाले 200 बिलियन डॉलर के उत्पादों पर 10 फ़ीसदी लगने वाले वर्तमान टैरिफ को दोगुना तक बढ़ा सकता है और साथ ही कई अन्य उत्पादों पर नए टैरिफ भी देखने को मिल सकते हैं.
ट्रंप ने पहले भी अमरीका आने वाले सभी चीनी उत्पादों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है.
अब तक चीन से आने वाले 250 बिलियन डॉलर मूल्य के उत्पादों पर अमरीका ने टैरिफ लगाया है. वहीं, चीन ने भी जवाबी कार्रवाई के तहत 110 बिलियन डॉलर के अमरीकी उत्पादों पर टैरिफ लगा दिया.
इस नुकसानदायक ट्रेड वार से विश्व व्यापार और विश्व की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ना की पूरी संभावना जताई जा रही है.
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