'ट्रेड वॉर' के बीच चीन अमरीका से ज़्यादा आयात को तैयार

अमरीका से पहले की तुलना में और अधिक सामान और सेवाएं ख़रीदने के लिए चीन राज़ी हो गया है.

दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते को बीते कुछ वक़्त में चीन और अमरीका के बीच व्यापारिक असंतुलन को कम करने के लिए सही वक़्त पर लिया गया फ़ैसला बताया जा रहा है.

इसपर अमरीका ने कहा है कि चीन के इस क़दम से उनके सालाना 335 अरब डॉलर के व्यापार घाटे में बड़ी कमी आएगी.

चीन और अमरीका का व्यापारिक रिश्ता

अमरीका और चीन की ओर से जारी किए गए एक साझा बयान में कहा गया है कि चीन अमरीका से कृषि और ऊर्जा संबंधित आयात में सार्थक बढ़ोतरी के लिए सहमत हो गया है.

इसमें कहा गया है कि ताज़ा निर्णय से अमरीका को विकास में मदद मिलेगी और रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे.

  • साल 2016 में अमरीका ने चीन से 462 अरब डॉलर से ज़्यादा का सामना ख़रीदा था.
  • चीन जितना भी माल निर्यात करता है, उसमें से 18.2% माल अमरीका ख़रीदता है.
  • साल 2006 से लेकर 2016 के बीच अमरीका द्वारा चीनी सामान के निर्यात में 59.2% बढ़ोतरी हुई.

बहरहाल दोनों ही पक्षों में से किसी ने भी इस पर टिप्पणी नहीं की है कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच उभरते व्यापारिक युद्ध का ख़तरा भी कम होगा?

दोनों देशों ने आपसी आयात-निर्यात पर जो नई शर्तें और टैक्स लागू करने की बात कही थी, क्या उन्हें टाल दिया जाएगा या फिर उन्हें हटाया जाएगा- इसके बारे में भी दोनों देशों ने कुछ स्पष्ट नहीं कहा है, क्योंकि इन फ़ैसलों से अरबों डॉलर की क़ीमत वाले दोनों देशों के उत्पादों पर नए टैरिफ़ का ख़तरा बताया जा रहा था.

हालांकि ये सही है कि दोनों ही देशों ने एक-दूसरे के सामान पर नए टैरिफ़ (सीमा-शुल्क) अभी लागू नहीं किए हैं.

घाटा कम करने का लक्ष्य

चीन और अमरीका के साझा बयान में इस बारे में भी कोई सूचना नहीं दी गई है कि व्हाइट हाउस द्वारा पहले जारी किए गए 200 बिलियन डॉलर के घाटे को कम करने के टारगेट का क्या हुआ.

हालांकि उन्होंने ये ज़रूर कहा है कि चीनी लोगों की बढ़ती खपत और उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, साथ ही उच्च गुणवत्ता वाले आर्थिक विकास की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए चीन संयुक्त राज्य अमरीका के सामानों और सेवाओं की ख़रीद में वृद्धि करने जा रहा है.

कुछ वक़्त पहले ही अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने चीनी सामान पर 150 बिलियन डॉलर तक का टैरिफ़ लगाने की धमकी दी थी.

नए टैरिफ़ लागू करने की बात कहते हुए ट्रंप ने कहा था कि ची'न अमरीका की बौद्धिक संपदा, जैसे टेक्नोलॉजी और उनके कॉपीराइट्स की चोरी करता रहा है और चीन को ये बात समझनी चाहिए.'

दोनों देशों की धमकी

अमरीका ने स्टील और एल्यूमीनियम के आयात पर सीमा-शुल्क लागू किया है. जो देश थोक में अमरीका से इस्पात और एल्यूमीनियम का आयात करते हैं उन्हें इस शुल्क में छूट दी गई है, लेकिन चीन का नाम उनमें शामिल नहीं है.

इसका करारा जवाब देते हुए चीन ने भी ये धमकी दी थी कि अमरीका विमान, कार, सोयाबीन, सूअर का मांस, शराब, फल और मेवा चीन से आयात करता है और वो भी इन सब चीज़ों पर शुल्क लगायेंगे.

चीन की सरकारी मीडिया एजेंसी शिन्हुआ ने रविवार को एक लेख प्रकाशित किया जिसमें कहा गया कि चीन और अमरीका के बीच हुआ ताज़ा समझौता दोनों ही देशों के लिए एक अच्छी स्थिति है. इससे अमरीका को अपना व्यापारिक घाटा कम करने में मदद मिलेगी और चीन को आयात की गुणवत्ता बढ़ाने का मौक़ा मिलेगा.

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