वीगर मुसलमानों के दुख से इमरान ख़ान अनजान क्यों हैं?

''पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान चीन के मुसलमानों की स्थिति के बारे में कुछ नहीं जानते. उनके सामने जब कभी भी वीगर मुसलमानों की स्थिति का ज़िक्र होता है वे खुद को इस मामले से अनजान बता देते हैं.''

दो दिन पहले फ़ाइनेन्शियल टाइम्स की स्टेफनी फिन्डले को दिए एक इंटरव्यू में इमरान ख़ान ने कहा कि उन्हें चीन में रहने वाले मुसलमानों के बारे में जानकारी नहीं है. वे इससे पहले भी एक बार वीगर मुसलमानों के बारे में जानने से इनकार कर चुके हैं.

फ़ाइनेन्शियल टाइम्स की स्टेफनी फिन्डले ने इमरान ख़ान से सवाल पूछा कि वो चीन में रहने वाले वीगर मुसलमानों की स्थिति के बारे में क्या सोचते हैं. इसके उत्तर में इमरान ख़ान ने कहा, "सच कहूं तो मुझे इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं है."

उन्होंने माना कि वो दुनिया के सभी मुसलमानों के पक्ष की बात करते हैं, लेकिन कहा कि "मुस्लिम दुनिया अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रही है. अगर मुझे इसकी जानकारी होती तो मैं बात करता. इसकी ख़बरें अधिक नहीं छपतीं."

जब स्टेफनी से सवाल किया कि कई पाकिस्तानी पुरुष हिरासत में ली गईं अपनी पत्नियों को बचाने के लिए चीन गए हैं, तो इमरान ख़ान ने जवाब दिया कि उन्होंने इसके बारे में कुछ नहीं सुना है.

इमरान ख़ान ने और भी कई मुद्दों पर बात की और कहा कि "बीते 20 सालों में ये वो दौर है जब पाकिस्तान की विदेश नीति सरकार के हाथों में है."

आर्थिक मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे यकीन है कि हमें इसके बाद अब और कभी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास जाना नहीं होगा. उन्होंने चीन के निवेश की बात की और कहा कि पाकिस्तान के लिए ये बेहद अहम है.

पहले भी वीगर मुसलमानों की बात पर निरुत्तर हुए थे इमरान ख़ान

ये पहली बार नहीं है जब इमरान ख़ान के सामने वीगर मुसलमानों का सवाल आया है और वो इससे जुड़े सवालों का जवाब देने से बचते नज़र आए.

दो महीने पहले तुर्की के सरकारी टेलीविज़न टीआरटीवर्ल्ड को दिए एक इंटरव्यू में भी उन्होंने कहा था कि उन्हें वीगर मुसलमानों के बारे में अधिक जानकारी नहीं है.

उनसे सवाल पूछा गया था कि चीन के साथ आपके व्यापारिक संबंध हैं, क्या इसका मतलब ये है कि आप चीन में मुश्किल परिस्थितियों में रहने वाले मुसलमानों के बारे में चुप्पी बनाए रखेंगे.

इसके उत्तर में इमरान ख़ान का कहना था, "मुझे इस मामले में अधिक जानकारी नहीं है. मैं आपको बता सकता हूं कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए चीन ताज़ा हवा के झोंके की तरह है. उन्होंने हमारी काफी मदद की है."

उन्होंने कहा कि चीन से हमें काफी उम्मीदें हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि अगर इसके बारे में उन्हें पता चलता है तो वे इस मामले में मीडिया से बात करने की बजाय सीधे चीन से बात करेंगे.

चीन के वीगर मुसलमान

चीन ने अपने पश्चिमी प्रांत शिनजियांग में अल्पसंख्यक वीगर मुसलमानों के लिए नज़रबंद बस्ती बना रखी है. बीते साल बीबीसी ने अपनी एक पड़ताल में ये पाया था.

चीन ने पिछले कुछ सालों में ऐसी तमाम जेल सरीखी इमारतें शिनजियांग सूबे में बना डाली हैं.

चीन ने इस बात से लगातार इनकार किया है कि उसने मुसलमानों को बिना मुक़दमा चलाए क़ैद कर के रखा है. चीन का कहना है कि ये पुनर्शिक्षा केंद्र हैं जहां लोगों को फिर से शिक्षित किया जा रहा है.

सांस्कृतिक और जनजातीय रूप से चीन के वीगर मुसलमान खुद को मध्य एशियाई देशों के नज़दीकी मानते हैं. वो तुर्की भाषा बोलते हैं.

हाल में तुर्की ने चीन के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई और कहा कि चीन ने लाखों मुसलमानों को नज़रबंदी शिविर में बंद रखा है. तुर्की ने चीन से उन शिविरों को बंद करने की मांग की.

बीते कुछ सालों में सैकड़ों वीगर मुसलमानों की मौत हुई है. एक करोड़ वीगर और बहुसंख्यक हान चीनियों के बीच संघर्ष वर्षों से चल रहा है और इसी संघर्ष में ज़्यादातर वीगर मुसलमान मारे गए हैं.

चीन इस अशांति के लिए अलगाववादी इस्लामिक चरमपंथियों को ज़िम्मेदार ठहराता है. वहीं मानवाधिकार समूहों और निर्वासितों का कहना है कि धर्म और संस्कृति पर चीनी नियंत्रण के कारण लोगों में ग़ुस्सा है.

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