पाकिस्तान की नेशनल कमांड अथॉरिटी क्या है?

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भारत के नियंत्रण रेखा पार करके पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को निशाना बनाने की ख़बर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है.
भारत के हमले के बाद पाकिस्तान से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं और बैठकों और प्रेस ब्रीफिंग का दौर जारी है.
जहां भारत सरकार का कहना है कि भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के भीतर जैश-ए-मोहम्मद के कैंप को तबाह किया है वहीं पाकिस्तान ने कहा है कि उसकी वायु सेना ने भारतीय विमानों को वापस खदेड़ दिया.
भारत के हमले की ख़बर आने के बाद पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की अध्यक्षता में सुरक्षा सलाहकार परिषद की बैठक हुई. इस बैठक के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान की संप्रुभता का उल्लंघन किया है.
पाकिस्तान की ओर से कहा गया है कि वह भारत के इस ग़ैर-ज़रूरी आक्रमण का जवाब "अपनी पसंद की जगह और समय" पर देगा.
अब सबकी निगाहें इसी पर टिकी हैं कि पाकिस्तान आगे क्या करने वाला है.
इसे देखते हुए पाकिस्तान में बुधवार को नेशनल कमांड अथॉरिटी (एनसीए) की बैठक बुलाई गई है. माना जा रहा है कि ये बैठक बहुत अहम होगी और इसमें कोई बड़ा फ़ैसला हो सकता है.
ऐसे में जानते हैं कि एनसीए क्या है और ये इतना महत्वपूर्ण क्यों है.


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क्या है एनसीए?
ये पाकिस्तान का उच्च सैन्य मंच है जहां देश की सुरक्षा नीति से जुड़े बड़े फ़ैसले लिए जाते हैं. पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के संचालन पर भी एनसीए ही फ़ैसला लेती है.
रणनीतिक तौर पर अहम परमाणु और मिसाइल संबंधी सभी नीतिगत मसलों पर निर्णय लेने वाला उच्चतम प्राधिकरण एनसीए ही है. साथ ही ये परमाणु व मिसाइल कार्यक्रम की देखरेख भी करता है.
युद्ध और तनाव की स्थिति में एनसीए सेना की तैनाती पर भी निर्णय लेती है. इसके तहत नीति निर्माण, सैन्य अभ्यास, तैनाती, अनुसंधान व विकास और पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के संचालन और नियंत्रण संबंधी निर्णय भी होते हैं.
राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व दोनों ही इसका हिस्सा होते हैं. प्रधानमंत्री इसके प्रमुख होते हैं. थल, वायु और नौ सेना के अध्यक्ष और रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री इसके सदस्य होते हैं.
बीबीसी संवाददाता शुमायला जाफ़री बताती हैं कि हवाई हमलों के बाद पाकिस्तान की ओर से दी गई प्रतिक्रिया में कहा गया है कि बुधवार को संसद का संयुक्त सत्र बुलाया जाएगा. साथ ही नेशनल कमांड अथॉरिटी की बैठक भी बुलाई गई है. एनसीए की बैठक में पाकिस्तान इस पर रणनीति बनाएगा कि उसे भारतीय हमले का किस तरह जवाब देना है.

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कब बुलाई जाती है एनसीए की बैठक?
आम तौर पर एनसीए की बैठक बहुत कम बुलाई जाती है. इसे बुलाने की ज़रूरत तब होती है जब सुरक्षा का मसला पैदा हुआ हो और सीमा में घुसपैठ हुई हो. ये बहुत गंभीर और उच्च स्तरीय मंच है.
साल 2000 में नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने परमाणु हथियारों से संबंधित फ़ैसले लेने के लिए एनसीए के गठन पर मुहर लगाई थी.
अप्रैल 1999 में तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा था कि परमाणु और मिसाइल तकनीक का उपयोग करने के लिए दो महीने के अंदर एक सेंट्रल कमांड सिस्टम तैयार हो जाएगा. उन्होंने कहा था कि इस सिस्टम में नेशनल कमांड अथॉरिटी, डेवेलपमेंटल कंट्रोल बोर्ड गवर्निंग बॉडी, स्ट्रैटेजिक फ़ोर्स कमांड और तीनों कमांड के लिए सेक्रेटेरिएट शामिल होंगे.
लेकिन, सैन्य आदेश और नियंत्रण का ये नया ढांचा उस वक़्त पूरा नहीं हो सका. सैन्य तख़्तापलट के बाद परवेज़ मुशरर्फ़ के राष्ट्रपति बनने पर इस पर अमल किया गया.
दो फ़रवरी 2000 को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने नेशनल कमांड अथॉरिटी की स्थापना की. इसमें इंप्लॉयमेंट कंट्रोल कमिटी, डेवेलपमेंट कंट्रोल कमेटी और स्ट्रेटेजिक प्लांस डिविज़न शामिल होते हैं.
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