पाकिस्तान में मोहम्मद बिन सलमान के लिए क्यों बिछ रही है सरकार

पाकिस्तान में इमरान और सलमान के पोस्टर
    • Author, आबिद हुसैन
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू संवाददाता, इस्लामाबाद

पाकिस्तान का फॉरेन रिज़र्व यानी विदेशी मुद्रा भंडार ख़त्म हो रहा है, चालू खाता बदहाल है और उसका वित्तीय भविष्य संकट में है. बावजूद इसके सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के स्वागत में पाकिस्तान खूब पैसा उड़ा रहा है.

इसकी वजह भी साफ़ है. प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को देश के लिए पैसा चाहिए और जल्दी से जल्दी चाहिए.

और एमबीएस यानी मोहम्मद बिन सलमान अरबों रुपए के वादे के साथ पाकिस्तान आ रहे हैं. एमबीएस चार एशियाई देशों के दौरे पर हैं. पाकिस्तान के अलावा वो मलेशिया, इंडोनेशिया और भारत जाने वाले हैं.

लेकिन पाकिस्तान और सऊदी अरब के रिश्ते पुराने और गहरे हैं और पैसा इसका सिर्फ़ एक पहलू है.

पाकिस्तान सरकार ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए हैं और कहा है कि प्रिंस सलमान के दौरे से दो दोस्ताना मुस्लिम देशों के संबंधों में एक बेहतर बदलाव आएंगे.

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कितना आलीशान है सऊदी क्राउन प्रिंस का दौरा?

इससे पहले 2006 में जब सऊदी शाह अब्दुल्लाह बिन अब्दुलअज़ीज़ पाकिस्तान आए थे तब भी कुछ ऐसी ही शान-ओ-शौक़त से उनका स्वागत किया गया था.

पाकिस्तान सिर्फ़ स्वागत में ही पैसा नहीं ख़र्च कर रहा है बल्कि प्रिंस की सुरक्षा के लिए ख़ास ख़याल रखने का इतज़ाम कर रहा है. प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने उनकी सुरक्षा का मसला स्वयं अपने हाथों में ले रखा है.

सऊदी प्रिंस सलमान का पाकिस्तान दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में हुए चरमपंथी हमले में 40 से अधिक भारतीय सैनिकों की मौत का ज़िम्मेदार भारत ने पाकिस्तान को बताया है. ऐसे में क्षेत्र में तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है.

सऊदी प्रिंस का विमान जब पाकिस्तान के वायुक्षेत्र में प्रवेश करेगा तो जेएफ़-थंडर लड़ाकू विमान उसकी सुरक्षा में रहेंगे. यही नहीं बाकी सभी फ्लाइटों को भी इस दौरान उड़ने नहीं दिया जाएगा.

मोहम्मद बिन सलमान

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सऊदी प्रिंस के साथ एक हज़ार लोगों का प्रतिनिधिमंडल आ रहा है. ऐसे में इस्लामाबाद के पांच सितारा होटलों के सैकड़ों कमरे बुक किए गए हैं. रिपोर्टों के मुताबिक़ स्वागत के लिए हज़ारों कबूतरों को भी पकड़ा गया है.

पिछले साल पैसा जुटाने के लिए अपनी लग्ज़री कारों को नीलाम करने वाली पाकिस्तानी सरकार ने स्वागत के लिए तीन सौ लैंड क्रूज़र गाड़ियों का काफ़िला भी जुटाया है.

यही नहीं अपने दो दिन के दौरे पर प्रिंस सलमान प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के निवास में ही रहेंगे. इससे पहले किसी भी राजकीय मेहमान ने कभी भी ऐसा नहीं किया है.

पाकिस्तान पैसा पाने के लिए इतना बेताब क्यों हैं?

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून में छपी एक ख़बर के अनुसार स्टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्तान के द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार देश की सेंट्रल बैंक का फ़ॉरेन रिज़र्व घट कर सिर्फ़ 7.05 अरब डॉलर ही रह गया है और उसे अपना कामकाज जारी रखने के लिए पैसों की ज़रूरत है.

पिछले साल अगस्त में पद संभालने के बाद से इमरान ख़ान मददगार देशों से मदद की गुहार लगा रहे हैं. वो चाहते हैं कि बेहद कड़ी शर्तों के तहत अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से लिए जाने वाले बेलआउट पैकेज को कम से कम किया जा सके.

1980 के दशक के बाद से ये तेरहवीं बार है जब पाकिस्तान बेलआउट पैकेज मांग रहा है.

वीडियो कैप्शन, पाकिस्तान के लिए सीपेक मदद या बोझ !

अबु धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन ज़ायेद के दौरे के कुछ दिन बाद ही सऊदी क्राउन प्रिंस पाकिस्तान के दौरे पर आ रहे हैं.

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात ने उसे 6 अरब डॉलर की मदद का वादा किया है.

वॉल स्ट्रीट जनर्ल की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान को उम्मीद है कि वो इन दो अरब देशों से क़रीब तीस अरब डॉलर मदद और क़र्ज़ के रूप में जुटा लेगा.

अभी ये स्पष्ट नहीं है कि प्रिंस सलमान के दौरे के दौरान किन-किन समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे. लेकिन पाकिस्तान को सबसे ज़्यादा उम्मीद ग्वादर बंदरगाह के पास तेल रिफ़ायनरी में आठ अरब डॉलर के प्रस्तावित निवेश से है.

वीडियो कैप्शन, पाकिस्तान: ग्वादर में बन रही सड़क का विरोध

चीन के 60 अरब डॉलर की लागत से बन रहे चीन-पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर (आर्थिक गलियारे) का सबसे प्रमुख हिस्सा ग्वादर बंदरगाह ही है.

पाकिस्तान की सरकार चीन के पैसे को बहुत महत्व देती है लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे जुड़ी शर्तें पाकिस्तान के लिए बेहद कड़ी साबित होंगी. आमतौर पर चीनी कमर्चारी ही चीनी प्रोजेक्टों पर काम करते हैं.

पाकिस्तान पर चीन के बढ़ते जा रहे प्रभाव को लेकर भी चिंताएं ज़ाहिर की गई हैं. इसलिए ही सऊदी अरब और खाड़ी के देशों की ओर से निवेश का पाकिस्तान स्वागत कर रहा है.

पाकिस्तानी सेना

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दौरे से सऊदी अरब को क्या मिलेगा?

पाकिस्तान को अपने सहयोगियों की उदारता पर चलने वाले देश के तौर पर देखना आसान है, लेकिन ये रिश्ते इतने भी सरल नहीं है.

सऊदी अरब को भी पाकिस्तान की उतनी ही ज़रूरत है जितनी पाकिस्तान को सऊदी अरब की.

क्राउन प्रिंस सऊदी राजशाही के एक अजीब दौर में पाकिस्तान की यात्रा कर रहे हैं क्योंकि सऊदी अरब यमन में चल रहे विनाशकारी गृहयुद्ध और पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या के बाद से स्वयं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी ख़राब होती छवि के संकट का सामना कर रहा है.

ऐसे में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान भरोसेमंद मित्र देशों पर पैसा लुटाकर रिश्ते और मज़बूत करना चाहते हैं. ये याद रखना भी ज़रूरी है कि पाकिस्तान सऊदी अरब के लिए हमेशा से ही महत्वपूर्ण रहा है.

दोनों देशों के बीच दशकों पुराने सैन्य रिश्ते हैं. चार दशक पहले जब इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मक्का पर चरमपंथियों ने हमला किया था तब पाकिस्तान के सैनिकों ने ही उनका ख़ात्मा किया था.

द इकोनामिस्ट पत्रिका के रक्षा मामलों के संपादक और दक्षिण एशिया मामलों के विशेषज्ञ शशांक जोशी कहते हैं, "ऐसा माना जाता है कि यदि सऊदी अरब पर कभी कोई बड़ा हमला होता है या कोई बड़ा सुरक्षा ख़तरा आता है तो पाकिस्तान उसे अपने जवान मुहैया कराएगा."

"कई अन्य खाड़ी देशों की तरह सऊदी अरब के पास पैसा तो बहुत है लेकिन मज़बूत सेना नहीं है. पाकिस्तान के पास बहुत पैसा तो नहीं है लेकिन एक बेहद शक्तिशाली और मज़बूत सेना है."

सऊदी प्रिंस के स्वागत में लगाए गए पोस्टर

शशांक जोशी कहते हैं कि ये कभी साबित तो नहीं हुआ है लेकिन हमेशा से शक किया जाता है कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच परमाणु हथियारों को लेकर भी सहमति है और ज़रूरत पड़ने पर पाकिस्तान सऊदी अरब को परमाणु तकनीक दे देगा. उदाहरण के तौर पर यदि सऊदी अरब का क्षेत्रीय प्रतिद्वंदी ईरान परमाणु हथियार बना लेता है तो सऊदी अरब पाकिस्तान से ये तकनीक हासिल करेगा.

सुन्नी बहुल पाकिस्तान में सऊदी अरब का धार्मिक प्रभाव भी बहुत ज़्यादा है. ख़ासतौर पर अफ़ग़ानिस्तान-सोवियत युद्ध के बाद सऊदी अरब ने पाकिस्तान के मदरसों में ख़ूब पैसा लगाया था. धार्मिक संस्थानों का ये नेवटर्क ईरान के प्रभाव को रोकने के लिए बनाया गया था.

मोहम्मद बिन सलमान के इस्लामाबाद दौरे से एक सप्ताह पहले ही शहर को ईरानी क्रांति के चालीस सालों की यादगार में पोस्टरों से पाट दिया गया था. लेकिन अब इनकी जगह प्रिंस सलमान के ही पोस्टर लगा दिए गए हैं.

इमरान ख़ान और सऊदी शाह

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान पद संभालने के बाद सऊदी अरब पहुंचे थे

ईरान पाकिस्तान का पड़ोसी देश है और यही वजह है कि सऊदी अरब पाकिस्तान में अपने प्रभाव को बरक़रार रखना चाहता है.

जोशी कहते हैं, "सऊदी अरब ये सुनिश्चित करना चाहेगा कि पाकिस्तान तेहरान के मुक़ाबले में रियाद के ज़्यादा करीब रहे."

ये भी सच है कि पाकिस्तान चार साल पहले यमन के ख़िलाफ़ लड़ रहे सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल नहीं हुआ था और इससे दोनों देशों के रिश्तों पर चोट पहुंची.

पाकिस्तान के स्तंभकार मुशर्रफ़ ज़ैदी कहती हैं, "लेकिन ये यात्रा सऊदी अरब के नेतृत्व में बदलाव के दौर में हो रही है, ये इतिहास के एक पन्ने का पलटा जाना है."

तालिबान का सवाल

मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तानी सेना प्रमुख

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सऊदी क्राउन प्रिंस की ये यात्रा इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि ये ऐसे समय में हो रही है जब इस क्षेत्र को लेकर वैश्विक राजनीति में भी बदलाव हो रहा है.

अफ़ग़ानिस्तान युद्ध को समाप्त करने के लिए अभूतपूर्व वार्ता हो रही है. इसमें पाकिस्तान, सऊदी अरब, ईरान, भारत और अमरीका सभी के हित दांव पर हैं.

तालिबान और अमरीकी अधिकारियों के बीच अगली मुलाक़ात इस्लामाबाद से प्रिंस सलमान के वापस लौटने के दिन ही हो सकती है. और सऊदी अरब इसमें दूर से देख रहा मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहेगा.

ये उच्चस्तरीय वार्ता इससे पहले क़तर में चल रही थी. क़तर वही छोटा खाड़ी देश है जिसका आजकल सऊदी अरब के साथ छत्तीस का आंकड़ा चल रहा है.

जोशी कहते हैं, "सऊदी अधिकारी पाकिस्तान में रहते हुए ये ज़रूर जानना चाहेंगे कि इस वार्ता में आख़िर चल क्या रहा है."

"सऊदी अरब की दिलचस्पी होगी कि शांति वार्ता में उसका करीबी तालिबान गुट मज़बूत हो न की ईरान के क़रीब रहने वाला गुट."

अपनी यात्रा के दौरान क्राउन प्रिंस पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा से भी मुलाकात करेंगे. इस दौरान भी तालिबान के मुद्दे पर चर्चा हो सकती है.

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