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ट्रंप ने अपने ही ख़ुफ़िया प्रमुखों पर क्यों साधा निशाना
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने ही देश की ख़ुफ़िया एजेंसियों को ईरान के मामले में अनुभवहीन कहा है और उत्तर कोरिया को लेकर किए गए उनके आंकलन को भी ख़ारिज कर दिया है.
ट्रंप ने ट्वीट करके कहा, "ईरान से सावधान रहो. ख़ुफ़िया अधिकारियों को दोबारा स्कूल में जाना चाहिए. "
अमरीकी ख़ुफ़िया अधिकारियों ने वैश्विक सुरक्षा ख़तरों को लेकर किए अपने आंकलन में कहा था कि ईरान अब परमाणु हथियार नहीं बना रहा है.
ट्रंप ने इसी से चिड़ कर ये प्रतिक्रिया दी है.
ख़ुफ़िया अधिकारियों ने अपने आंकलन में ये भी कहा था कि उत्तर कोरिया के अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने की संभावना नहीं है.
नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक डेन कोट्स और अन्य ख़ुफ़िया प्रमुखों ने मंगलवार को सीनेट के समक्ष अपनी द वर्ल्डवाइड थ्रेट एसेसमेंट रिपोर्ट (वैश्विक ख़तरों का आंकलन) पेश की थी.
बीते साल अमरीका साल 2015 में ईरान के साथ हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते से अलग हो गया था. राष्ट्रपति ट्रंप के इस फ़ैसले की न सिर्फ़ अमरीका बल्कि दुनियाभर में आलोचना हुई थी.
बीते साल ट्रंप ने उत्तर कोरिया के साथ राजनयिक रिश्ते बेहतर करने की दिशा में ठोस क़दम उठाते हुए उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ मुलाक़ात भी की थी.
इस मुलाक़ात के बाद ट्रंप ने कहा था कि किम उत्तर कोरिया को परमाणु हथियारों से मुक्त करने के लिए सहमत हो गए हैं.
किम से मुलाक़ात के बाद ट्रंप ने कहा था कि अब उत्तर कोरिया का परमाणु ख़तरा ख़त्म हो गया है. हालांकि कई विशेषज्ञों ने ट्रंप के इस दावे पर सवाल उठाए थे.
ख़ुफ़िया प्रमुखों ने रिपोर्ट में और क्या कहा?
इस रिपोर्ट में रूस और चीन की ओर से होने वाले संभावित साइबर हमलों को लेकर भी चेताया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये दोनों ही देश साल 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों को प्रभावित करने की कोशिशें कर सकते हैं.
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि उत्तर कोरिया के नेता अपनी सत्ता के अस्तित्व के लिए विनाशकारी हथियारों को ज़रूरी मानते हैं और उत्तर कोरिया के अपने हथियार कार्यक्रम को समाप्त करने की संभावना नहीं है.
ट्रंप ने ईरान के बारे में क्या कहा?
ट्रंप ने अपने ट्वीट में कहा है कि ईरान के ख़तरों के मामले में अमरीकी ख़ुफ़िया अधिकारी भोले हैं और ग़लत हैं.
ट्रंप ने कहा कि ईरान न सिर्फ़ मध्य पूर्व में बल्कि इसके बाहर भी परेशानी पैदा कर रहा है लेकिन अमरीका के 'बेकार ईरान समझौते' से अलग होने के बाद से वो काफ़ी बदल गया है.
हालांकि ट्रंप ने ये भी कहा कि ईरान अभी भी संभावित ख़तरों और संघर्ष का स्रोत बना हुआ है. उन्होंने हाल के दिनों में ईरान की ओर से दागे गए रॉकेटों का भी हवाला दिया.
सीनेट के समक्ष सीआईए की निदेशक गीना हास्पेल ने कहा था कि तकनीकी रूप से देखा जाए तो ईरान परमाणु समझौते का पालन कर रहा है.
अमरीका ने इस समझौते से अलग होकर ईरान पर और सख़्त प्रतिबंध लगाए हैं.
हालांकि इंटेलिजेंस रिपोर्ट में चेताया गया है कि ईरान की क्षेत्रीय महत्वकांक्षाएं और बेहतर सैन्य क्षमताएं भविष्य में अमरीकी हितों के लिए ख़तरा हो सकते हैं.
क्या ट्रंप पहली बार ख़ुफ़िया अधिकारियों से टकरा रहे हैं?
बीते साल भी ट्रंप को डेमोक्रेट और रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं की ओर से घोर आलोचना का सामना करना पड़ा था. उन्होंने 2016 अमरीकी चुनावों में रूसी दख़ल के आरोपों पर रूस का बचाव किया था.
अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियां इस निष्कर्ष पर पहुंची थीं कि राष्ट्रपति चुनावों में रूस ने दख़ल दी. ख़ुफ़िया एजेंसियों ने कहा था कि रूस चुनावों को डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन के ख़िलाफ़ करने के प्रयास कर रहा था.
लेकिन जुलाई 2018 में हेल्सिंकी में रूसी राष्ट्रपति के साथ हुई सीधी मुलाक़ात के बाद ट्रंप ने कहा था कि रूस के पास अमरीकी चुनावों में दख़ल देने की कोई वजह नहीं है.
हालांकि, आलोचना होने के 24 घंटे के भीतर ही उन्होंने अपने बयान से पलटने की कोशिश की थी.
अमरीका के विशेष जांच अधिकारी रॉबर्ट म्यूलर राष्ट्रपति चुनावों में रूसी दख़ल के आरोपों की स्वतंत्र जांच कर रहे हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार ये कहते रहे हैं कि ये जांच उनसे बदला लेने की कोशिश है.
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