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क्यों सुलग रहा है ब्राज़ील का फ़ोर्टालेज़ा शहर?
ब्राज़ील के फ़ोर्टालेज़ा शहर में अचानक से आपराधिक हिंसा बढ़ने के बाद हालात क़ाबू में करने के लिए सेना को बुलाना पड़ा है.
ब्राज़ील के इस पाँचवें बड़े शहर में इस सप्ताह दर्जन भर से ज़्यादा हमले हुए जिनमें दुकानों, बैंकों और बसों को निशाना बनाया गया.
समझा जाता है कि ये हमले वहाँ की स्थानीय जेलों में नए और सख़्त क़ानूनों का विरोध करने के लिए किए गए. इन जेलों पर मुख्य रूप से अपराधी गिरोहों का नियंत्रण है.
नए क़ानूनों के तहत अधिकारियों ने जेलों मोबाइल फ़ोन के सिग्नल ब्लॉक कर दिए हैं और साथ ही अलग-अलग गिरोह के क़ैदियों को अलग-अलग रखने की नीति को भी समाप्त कर दिया.
इसी से नाराज़ होकर आपराधिक गिरोह शहर में हिंसा कर रहे हैं.
ये हमले ब्राज़ील में नए राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो के पद संभालने के कुछ ही दिन बाद हुए और इन्हें उनके लिए एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है. उन्होंने जिन वादों पर चुनाव में जीत हासिल की उनमें देश में अपराध को क़ाबू में लाने का वादा भी शामिल है.
शहर में सेना
प्रशासन ने हालात को काबू में करने के लिए सेना को बुलाया है जो फ़ोर्टालेज़ा में लगातार गश्त लगा रहे हैं. इसके अलावा सिएरा राज्य में भी तैनात किए गए हैं.
बोलसोनारो ने न्याय मंत्री सर्जियो मोरो के सैनिकों को तैनात करने के फ़ैसले की तारीफ की है और इसे बहुत फुर्ती और अच्छे तरीके से उठाया गया कदम बताया है.
सर्जियो मोरो को ब्राज़ील में व्याप्त भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एक अहम जांच 'ऑपरेशन कार वॉश' का नेतृत्व करने के लिए भी जाना जाता है.
50 लोगों की गिरफ़्तारी
ब्राज़ील के समाचार चैनलों पर कुछ वीडियो प्रसारित किए गए हैं जिनमें आपराधिक गिरोहों को सर्विस स्टेशनों में आग लगाते हुए देखा जा सकता है.
अभी तक इस हिंसा में शामिल करीब 50 अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया गया है.
वर्ल्ड प्रिज़न की तरफ से जारी सूचना के अनुसार ब्राज़ील में करीब 7 लाख लोग जेलों में बंद हैं. यह संख्या अमरीका और चीन के बाद सबसे अधिक है.
63 वर्षीय बोलसोनारो ने राष्ट्रपति चुनाव में वामपंथी नेता फ़र्नेंडो हद्दाद को मात दी थी.
चुनाव प्रचार के दौरान बोलसोनारो को नस्लभेदी और समलैंगिकों के ख़िलाफ़ विचार रखने वाले नेता बताया गया था.
राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले भाषण में उन्होंने सेना और पुलिस का समर्थन करने की शपथ ली थी.
नेता बनने से पहले बोलसोनारो ब्राज़ील की सेना में काम कर चुके थे, वे सेना में कैप्टन के पद तक पहुंचे थे.
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