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हिंसक प्रदर्शन के बाद फ़्रांस में आपातकाल की आशंका
फ़्रांस में सरकार के विरोध में सैकड़ों लोगों के हिंसक विरोध-प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों एक आपातकालीन सुरक्षा बैठक करेंगे.
सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि अशांति को काबू में करने के लिए आपातकाल लगाया जा सकता है. तेल पर टैक्स बढ़ने से लोग नाराज़ हैं. लोगों के बीच महंगाई को लेकर काफ़ी ग़ुस्सा है.
हालांकि कई लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया लेकिन वैसे लोगों की भी बड़ी संख्या थी, जिन्होंने पुलिस पर हिंसक हमला किया.
शनिवार को हुए इस प्रदर्शन में 100 से ज़्यादा लोग ज़ख़्मी हुए हैं. घायलों में 23 सुरक्षाकर्मी भी हैं. पुलिस का कहना है कि 400 से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. विरोध प्रदर्शन में फ़्रांस के प्रसिद्ध स्मारक अख द ट्रियोम्फ़ को भी नुक़सान पहुंचा है.
रविवार सुबह मैक्रों अर्जेंटीना में आयोजित जी20 सम्मेलन से लौटने के बाद 'अख द ट्रियोम्फ़' के हुए नुक़सान का जायज़ा लेने पहुंचे. सरकार के प्रवक्ता बेंजामिन ग्रिवेअक्स ने यूरोप वन रेडियो से कहा कि आपातकाल एक विकल्प है. उन्होंने कहा कि सरकार इस चीज़ को सुनिश्चित करना चाहती है कि ऐसी घटना दोबारा न हो.
प्रदर्शनकारी कौन हैं?
सभी प्रदर्शनकारी पीले कपड़ों में थे. ये पेट्रोल पर टैक्स बढ़ाए जाने से काफ़ी नाराज़ हैं. हालांकि मैक्रों का तर्क है कि ऐसा पर्यावरण को ध्यान में रखकर किया गया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जो शहर से दूर हैं वो अपनी कार पर निर्भर हैं, ऐसे में उन पर यह टैक्स भारी पड़ रहा है.
प्रदर्शनकारियों के किसी नेता की पहचान नहीं हो पाई है. इस विरोध-प्रदर्शन को सोशल मीडिया से भी ख़ूब हवा मिली है.
इस विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों को कट्टर वामपंथी और कट्टर राष्ट्रवादी बताया जा रहा है. इसके साथ ही इसमें वैसे लोग भी शामिल हैं जो शांतिपूर्वक विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. 17 नवंबर को पूरे फ़्रांस में हुए प्रदर्शन में क़रीब तीन लाख लोग शामिल हुए थे.
मैक्रों का क्या कहना है?
मैक्रों ने हिंसक विरोध-प्रदर्शन पर नाराज़गी जताई है. उन्होंने कहा कि असंतोष को व्यक्त करने के लिए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन होना चाहिए. मैक्रों ने कहा कि जो हिंसक विरोध प्रदर्शन के लिए ज़िम्मेदार हैं वो कोई बदलाव नहीं चाहते हैं बल्कि उनका इरादा अशांति पैदा करना है.
फ़्रांस में डीज़ल कारों में इस्तेमाल होने वाला सबसे प्रमुख ईंधन है. पिछले 12 महीनों में डीज़ल की क़ीमत में 23 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है. फ़्रांस में डीजल की क़ीमत 1.7 डॉलर प्रति लीटर है जो कि 2000 के दशक के बाद से सबसे ज़्यादा है. मैक्रों सरकार ने इस साल प्रति लीटर डीज़ल पर 7.6 फ़ीसदी हाइड्रोकार्बन टैक्स लगा दिया था.
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