You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ख़ाशोज्जी हत्या मामलाः क्या है सऊदी के लिए तुर्की का प्लान?
अगर सर्च इंजन गूगल पर "Erdogan slams…" टाइप करें तो एक बड़ी फ़ेहरिस्त सामने आती है जिसमें संयुक्त राष्ट्र संघ, यूरोपीय संघ, फ़्रेंच बुद्धिजीवियों से लेकर नीदरलैंड और जर्मनी जैसे नाम शामिल होंगे.
एक साल पहले तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन नीदरलैंड और जर्मनी के लिए 'नाज़ी' और 'फ़ासी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर चुके हैं.
पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या की बात कबूल चुके सऊदी अरब के लिए अर्दोआन के बयान बेहद हैरान करते हैं. उन्होंने कहा, ''मेरे पास किंग सलमान की ईमानदारी पर शक करने का कोई कारण नहीं है.''
वहीं अर्दोआन के प्रवक़्ता भी सऊदी को 'मित्र देश' बता चुके हैं.
अब इन बयानों के समझते हुए ये देखें कि इसके बावजूद सरकार समर्थक तुर्की मीडिया लगातार रिपोर्ट्स के जरिए रियाद पर शिकंजा कसता जा रहा है.
इस बात के भी संदेह जताए जा रहे हैं कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को इस हत्या की जानकारी थी या उनके ही इशारे पर ये हुआ है.
क्या है अर्दोआन की नीति?
इसे देखते हुए सबसे अहम सवाल ये है कि आख़िर सऊदी को लेकर अर्दोआन का खेल क्या है?
अर्दोआन की भाषाशैली ये जताने की कोशिश है कि ये सऊदी बनाम तुर्की की लड़ाई नहीं है. दोनों देशों का रिश्ता काफ़ी महत्वपूर्ण है. लेकिन ख़ाशोज्जी मामले में तुर्की के हस्तक्षेप से दोनों के रिश्तों में तनाव पैदा हुए हैं.
ऐसे में अर्दोआन, किंग सलमान को सीधे तौर पर बिना निशाना बनाए जांच की बात कर रहे हैं.
राष्ट्रपति के एक नज़दीकी सूत्र का मानना है कि ''अगर अर्दोआन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को पद से हटाए जाने की बात करते तो ये होना और भी मुश्किल होता.'' अर्दोआन ने अपने संबोधन में एक बार भी प्रिंस सलमान का ज़िक्र तक नहीं किया. ये एक सोचा समझा कदम था.
दरअसल, अंकारा किंग और प्रिंस के बीच एक कील गाड़ने की कोशिश कर रहा है लेकिन इसका रास्ता रियाद से नहीं बल्कि वॉशिंगटन से मुमकिन है.
पावर प्ले के मुख्य किरदार
82 वर्षीय सऊदी किंग ने हाल फ़िलहाल अपने बेटे और प्रिंस को हटाने के कोई संकेत नहीं दिए हैं. बीते दिनों उन्होंने ख़ाशोज्जी हत्या मामले में सऊदी की इंटेलिजेंस सेवा को पुनर्गठन के आदेश दिए जिसका जिम्मा प्रिंस सलमान के दिया गया.
अर्दोआन की तुर्की सरकार सऊदी अरब का इस्लाम के संरक्षक के तौर पर सम्मान करती है. लेकिन अर्दोआन दुनिया में ख़ुद को एक प्रभावशाली मुस्लिम लीडर के तौर पर पेश करना चाहते हैं तो ऐसे में प्रिंस सलमान उनके लिए सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी हैं.
मध्य पूर्व में तुर्की के क़रीबी देश की घेराबंदी में प्रिंस सलमान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. साथ ही अर्दोआन की पार्टी से जुड़े हुए मुस्लिम ब्रदरहुड विचारधारा वालों पर शिकंजा कसने में भी प्रिंस की भूमिका रही.
इसके अलावा प्रिंस सलमान की इज़राइल के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने की कोशिशें भी अर्दोआन को खटकती रही है क्योंकि तुर्की इज़राइल को नापसंद करता है. तुर्की की ईरान से दोस्ती और प्रिंस सलमान की दूरी ऐसे कई फ़ैक्टर हैं जो रियाद और अंकारा को क्षेत्रीय राजनीति में एक-दूसरे को आमने सामने लाकर खड़ा करती है.
अर्दोआन की नीति
ख़ाशोज्जी मामले में सऊदी अरब बैकफ़ुट पर है. ऐसे में वह उस शख़्स को नीचा दिखाने का एक भी मौका गंवाना नहीं चाहते जिसे तुर्की मीडिया 'तुर्की का दुश्मन' कहता है.
एक तथ्य ये भी है कि अमीरात और मिस्र दोनों ही रियाद के क़रीबी हैं और तुर्की सरकार साल 2016 के असफ़ल तख़्तापलट में अमीरात की भूमिका पर संदेह करता रहा है. इसके अलावा मुस्लिम ब्रदरहुड को हटाने को लेकर राष्ट्रपति अर्दोआन मिस्र के अब्दुल फत्तेह अल-सिसी को कभी माफ़ नहीं करेंगे.
हालांकि अर्दोआन की ये नीतियां जोख़िम भरी साबित हो सकती हैं. क्योंकि आने वाले दिनों में अगर प्रिंस सलमान के हाथों में सऊदी की कमान आई तो वो एक ऐसे शासक बन सकते हैं जो तुर्की से द्वेष रखते हों.
मौजूदा वक़्त में व्हाइट हाउस प्रिंस का क़रीबी माना जाता रहा है. ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकार और दामाद प्रिंस की दोस्ती किसी से छिपी नहीं है.
एक अजीबोग़रीब स्थिति तैयार हो रही है. एक नृशंस हत्या, एक सच छुपाने की कमज़ोर कोशिश, क्षेत्रीय रिश्तों में उठा-पटक, वॉशिंगटन-मध्य पूर्व के रिश्ते और दुनिया के बड़े तेल निर्यातक देश पर मौत का ये दाग़.
सऊदी ने सोचा था कि इंस्तांबुल में किया गया ये ऑपरेशन बेहद आसानी से छिप जाएगा लेकिन ये उसका ग़लत अनुमान था.
ये भी पढ़ेंः
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर,इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)