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जमाल ख़ाशोज्जी का 'आखिरी कॉलम' छापा गया
दो अक्टूबर से लापता पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी का मामला सऊदी अरब का सिरदर्द बढ़ाता जा रहा है.
मामला बढ़ता देख सऊदी ने तुर्की के इस्तांबुल स्थित अपने दूतावास में जांचकर्ताओं को जाने की इजाज़त दे दी. जिसके बाद तुर्की की जांच टीम ने गुरुवार सुबह तक दूतावास में छानबीन की.
जांच टीम में अभियोजन पक्ष और फॉरेंसिक विशेषज्ञ भी शामिल थे. दूतावास से पहले ये टीम वाणिज्य-दूत के निवास पर भी गई थी, जहां उसने करीब नौ घंटे तक जांच की.
'द वाशिंगटन पोस्ट' ने गुमशुदा पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी का आखिरी कॉलम छाप दिया है. इन लेख में ख़ाशोज्जी ने अरब जगत में प्रेस की आज़ादी की वकालत की है.
तुर्की की सरकार का आरोप है कि सऊदी पत्रकार ख़ाशोज्जी को सऊदी अरब के दूतावास के अंदर ही मार दिया गया. लेकिन सऊदी लगातार इन आरोपों से इनकार कर रहा है.
तुर्की ने तो इस मामले में सबूत होने का भी दावा किया है. तुर्की का कहना है कि उसके पास ऑडियो और वीडियो टेप है, जिससे साबित होता है कि ख़ाशोज्जी को दूतावास के अंदर यातनाएं देने के बाद मार दिया गया. हालांकि अभी तक उसने ये सबूत सार्वजनिक नहीं किए हैं.
तुर्की के एक सरकारी अखबार ने कहा है कि तुर्की फ़िलहाल अमरीका के साथ अपनी ऑडियो रिकॉर्डिंग साझा नहीं करेगा.
बुधवार को अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने तुर्की से रिकॉर्डिंग की मांग की थी. उन्होंने कहा कि अगर ऐसे कोई सबूत हैं तो वो हमें दिए जाएं.
इस बीच, कई यूरोपीय नेताओं ने सऊदी अरब की निवेश कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार किया है. इससे पहले भी कई देश इस कॉन्फ्रेंस से किनारा कर चुके हैं.
फ्रांस और डच के विदेश मंत्रियों ने रियाद में होने वाले समारोह में शामिल ना होने की बात कही है. ये कॉन्फ्रेंस अगले हफ्ते होने वाली है.
हालांकि पेप्सिको, ईडीएफ और गोल्डमैन सैक्स जैसी कंपनियों ने कहा है कि वो सऊदी के सम्मेलन में हिस्सा लेने पर विचार कर रही हैं. इन कंपनियों पर भी सम्मेलन के बहिष्कार का दबाव था.
अमरीका का रुख
सऊदी अरब अमरीका का करीबी सहयोगी रहा है. लेकिन ख़ाशोज्जी की गुमशुदगी ने अमरीका को असमंजस भरी स्थिति में डाल दिया है.
ट्रंप ने तुर्की से ख़ाशोज्जी मामले से जुड़े कथित ऑडियो टेप साझा करने की अपील की है. हालांकि ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि "ऐसी कोई टेप तुर्की के पास हो सकती है."
डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो उन्हें इस मामले में एक रिपोर्ट दे सकते है. पोम्पियो हाल ही में तुर्की और सऊदी अरब के दौरे से लौटे हैं.
ट्रंप ने कहा कि हफ्ते के अंत तक सच सामने आ जाएगा.
उन्होंने उन आरोपों से भी इनकार किया, जिनमें कहा जा रहा था कि अमरीका सऊदी को बचाने की कोशिश कर रहा है. ट्रंप ने कहा, "ऐसा बिल्कुल नहीं है, मैं सिर्फ़ ये जानना चाहता हूं कि क्या चल रहा है."
कुछ दिन से ट्रंप कह रहे हैं कि पत्रकार के लापता होने के पीछे "शरारती तत्वों" का हाथ हो सकता है. उन्होंने कहा कि जल्दबाज़ी में सऊदी अरब के खिलाफ आरोप लगाने से सभी को बचना चाहिए.
एक न्यूज़ एजेंसी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि "सऊदी के खिलाफ आरोप साबित होने से पहले ही उससे दोषियों जैसा बर्ताव किया जा रहा है."
रिकॉर्डिंग में क्या है?
तुर्की के अधिकारियों ने शुरुआती जांच के बाद कुछ ऑडियो सबूत मिलने की बात कही है. तुर्की के अधिकारियों का दावा है कि इन ऑडियो क्लिप में सऊदी अरब के शासकों की आलोचना करते रहे जमाल ख़ाशोज्जी की "हत्या" के सबूत हैं.
तुर्की मीडिया की खबरों के मुताबिक इन ऑडियो क्लिप में ख़ाशोज्जी के आखिरी वक्त में उनके साथ हुई क्रूरता के सबूत हैं. खबरों के मुताबिक क्लिप में ख़ाशोज्जी को चिल्लाते हुए भी सुना जा सकता है.
एक तुर्की अखबार के मुताबिक घटनास्थल पर सऊदी अरब दूतावास के वाणिज्य-दूत भी मौजूद थे. "उनकी आवाज़ भी इस ऑडियो में सुनी जा सकती है."
इस बीच इस्तांबुल के सऊदी अरब दूतावास के वाणिज्य-दूत मोहम्मद अल-ओतैबी रियाद वापस लौट गए हैं.
जमाल ख़ाशोज्जी का आखिरी कॉलम छपा
द वाशिंगटन पोस्ट ने गुमशुदा पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी का आखिरी कॉलम छाप दिया है. इन लेख में ख़ाशोज्जी ने अरब जगत में प्रेस की आज़ादी की वकालत की है.
अखबार ने कहा कि जब जमाल ख़ाशोज्जी के वापस लौटने की सारी उम्मीदें धुंधली हो गई हैं तो उन्होने ख़ाशोज्जी का आखिरी कॉलम छापने का फैसला किया.
दो अक्टबूर को सऊदी अरब के इस्तांबुल स्थित दूतावास में जाने के बाद से ख़ाशोज्जी लापता हैं.
द वाशिंगटन पोस्ट की ग्लोबल ओपिनीयन एडिटर कैरन इटाया ने कहा, "ख़ाशोज्जी के आखिरी कॉलम में उन्होंने अरब जगत में प्रेस की आज़ादी की बात की थी. उन्होंने उस आज़ादी की बात की थी, जिसके लिए शायद उन्होंने अपनी जान दे दी."
कैरन इटाया ने बताया कि ख़ाशोज्जी के लापता होने के एक दिन बाद उन्हें ये कॉलम मिला था. उन्होंने लिखा, "कुछ वक्त तक तो मुझे उम्मीद थी कि जमाल वापस लौटेंगे और हम दोनों साथ बैठकर इस कॉलम को एडिट करेंगे. लेकिन जब लगा कि वो वापस नहीं लौटेंगे तो उनके कॉलम को छापने का फैसला लिया गया."
सऊदी के क्राउन प्रिंस की आलोचना करने वाले जमाल ख़ाशोज्जी ने कथित धमकियों के बाद पिछले साल सऊदी अरब छोड़ दिया था. कहा जाता है कि सऊदी अरब के अधिकारी उन्हें क्रांउन प्रिंस की नीतियों की आलोचना करने की वजह से धमका रहे थे.
आखिरी कॉलम में ख़ाशोज्जी ने अरब जगत में प्रेस की आज़ादी की कमी को लेकर आलोचना की है. उन्होंने दावा किया कि अरब जगत के लोगों को जानकारी नहीं दी जाती या फिर अधूरी जानकारी दी जाती है.
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