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ख़ाशोज्जी केस: सऊदी सरकार से 5 सवाल
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
इस्ताम्बुल में सऊदी वाणिज्य दूतावास से सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी के लापता होने का मामला एक सस्पेंस थ्रिलर की तरह बन गया है. उनके परिवार और उनकी मंगेतर निष्पक्ष जांच चाहती हैं.
इस ख़बर को बीते दो हफ़्ते से देखने वालों के मन में कई सवाल होंगे. सऊदी प्रशासन की ओर से सफाई दी गई है, लेकिन सवालों के जवाब अब तक नहीं मिले हैं. पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी अपने लेखन में सऊदी के शाही परिवार के आलोचक थे और वॉशिंगटन में रह रहे थे. वह वॉशिंगटन पोस्ट के लिए लिखते थे.
तुर्की पुलिस पास के एक जंगल में तलाशी अभियान चला रही है. नाम न बताने की शर्त पर तुर्की के अधिकारियों ने कहा कि ख़ाशोज्जी के शरीर को पास के बेलग्राद जंगल या खेत में गाड़ा गया है.
तुर्की की सरकार का आरोप है कि सऊदी पत्रकार ख़ाशोज्जी को सऊदी अरब के दूतावास के अंदर ही मार दिया गया. लेकिन सऊदी लगातार इन आरोपों से इनकार कर रहा है.
सऊदी अरब और तुर्की की एक संयुक्त जाँच टीम ख़ाशोज्जी के लापता होने की गुत्थी सुलझाने में लगी है. लेकिन सऊदी अरब को इन पांच सवालों के जवाब कई दिन पहले दे देने चाहिए थे:
1. सऊदी प्रशासन बेख़बर कैसे?
राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान समेत सऊदी नेताओं ने कहा है कि जमाल ख़ाशोज्जी ने प्रवेश के कुछ ही समय बाद वाणिज्य दूतावास को स्वतंत्र रूप से छोड़ दिया और उन्हें पत्रकार के बारे में कोई जानकारी नहीं है.
क्या राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) की जानकारी के बिना इस तरह का एक ऑपरेशन किया जा सकता है? ये मामला एक हाई प्रोफाइल मामला था. सऊदी अरब की ख़ुफ़िया एजेंसियां सीधे राजकुमार को रिपोर्ट करती हैं. तो ये कैसे संभव है कि उन्हें इस ऑपरेशन की जानकारी नहीं होगी. एमबीएस और उनके पिता किंग सलमान ने जांच के आदेश ज़रूर दिए हैं. लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार ये अपनी तरफ़ आये सवालों और शक से ध्यान हटाने की एक कोशिश हो सकती है
2. कौन थे वो 15 लोग?
ख़ाशोज्जी 2 अक्टूबर को इस्तांबुल के वाणिज्य दूतावास गए थे और तब से वो लापता हैं. वो शादी करने की तैयारी में थे और इमारत में दस्तावेज़ हासिल करने गए थे.
सऊदी अरब ने अब तक इस सवाल का जवाब नहीं दिया है कि उसी दिन वाणिज्य दूतावास में एक 15 सदस्यीय टीम क्यों आयी थी. वो अपनी गाड़ियों में वाणिज्य दूतावासदिया के अहाते में सीसीटीवी कैमरों के वीडियो पर आते -जाते देखे जा सकते हैं. तुर्की सरकार ने इस टीम के सभी 15 सदस्यों की पहचान स्थापित करके उनकी तस्वीरें और वीडियो जारी किया है लेकिन सऊदी अधिकारी इस पर ख़ामोश हैं.
अल-अरबिया नामक सऊदी अख़बार ने लिखा है कि वे 15 सऊदी वास्तव में, "साधारण सऊदी पर्यटक" थे. सऊदी सरकार के क़रीब समझे जाने वाले इस अख़बार ने दावा किया, "निर्दोष नागरिकों की तस्वीरें लीक की गई हैं और उन्हें ख़ाशोज्जी के लापता होने वाले मुद्दे पर एक काल्पनिक कहानी बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया है."
3. कैमरे के फुटेज कहां?
इस्तांबुल में सऊदी वाणिज्य दूतावास से सुरक्षा कैमरे के फुटेज को क्यों हटा दिए गए और तुर्की के सभी कर्मचारियों को 2 अक्टूबर को छुट्टी लेने के लिए क्यों कहा गया था? तुर्क मीडिया में अधिकारियों के हवाले से ये ख़बर छपी है कि कैमरे के फुटेज ग़ायब कर दिए गए हैं और इसका सऊदी दूतवास ने कोई स्पष्ट जवाब अब तक नहीं दिया है
4. मंगेतर ने बाहर निकलते क्यों नहीं देखा?
ख़ाशोज्जी 2 अक्टूबर को अपनी मंगेतर को इमारत के बाहर इंतज़ार करने सलाह देकर अंदर गए. अगर सऊदी अधिकारियों के अनुसार वो इमारत से तुरंत वापस निकल गए थे तो वे अपनी मंगेतर से मिलने क्यों नहीं गए? उनकी मंगेतर ने वहां उनका घंटों इंतज़ार किया लेकिन उन्होंने ख़ाशोज्जी को इमारत से बाहर निकलते नहीं देखा.
5. सफाई क्यों करवाई गई?
सऊदी-तुर्क संयुक्त जांच टीम के सऊदी सदस्य वाणिज्य दूतावास में एक घंटे के फ़ासले पर क्यों पहुंचे? सऊदी जांच अधिकारियों के वहां पहुंचने से पहले क्लीनर को बुलाकर अंदर सफ़ाई क्यों कराई गई? इमारत के बाहर खड़े पत्रकार सफाई कर्मचारियों को देख कर हैरान हो गए. इस सवाल पर सऊदी सरकार और मीडिया शांत है.
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