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बीच समंदर में फंसे भारतीय नाविक को कैसे बचाया गया
पारंपरिक नौकाओं पर अकेले समुद्री यात्रा करते हुए पूरी दुनिया का चक्कर काटकर पूरी होने वाली रेस 'गोल्डन ग्लोब' में हिस्सा ले रहे एक भारतीय नाविक को बचा लिया गया है.
भारतीय नौसेना में कमांडर अभिलाष टॉमी इस रेस में भाग ले रहे थे मगर हिंद महासागर में भीषण तूफ़ान के कारण उनकी नौका क्षतिग्रस्त हो गई और वह ख़ुद भी घायल हो गए थे.
भारतीय नौसेना के मुताबिक उन्हें अब बचा लिया गया है.
अपने याट (पाल वाली नौका) पर अकेले सफ़र कर रहे अभिलाष टॉमी ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट से लगभग 3200 किलोमीटर दूर अकेले फंसे हुए थे.
क्या थे हालात?
उनके याट का मस्तूल (वह स्तंभ जिससे पाल बंधा रहता है) हिंद महासागर में आए भीषण तूफ़ान के कारण टूट गया था.
वह किसी तरह यह संदेश भेजने में क़ामयाब रहे कि उनकी कमर में गंभीर चोट आई है जिसकी वजह से वह चलने-फिरने और खाने-पीने में असमर्थ थे.
इस रेस के आयोजकों का कहना था कि टॉमी अपनी नौका के अंदर चारपाई पर मजबूर पड़े थे और मदद से इतनी दूर थे कि उनतक पहुंचना बेहद मुश्किल था. लेकिन कोशिशों के बाद उन तक पहुंच बनाई जा सकी और उन्हें सुरक्षित बचा लिया गया है.
उन्हें बचाए जाने से पहले ऑस्ट्रेलिया की मैरीटाइम सेफ़्टी अथॉरिटी के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया था, "अपनी नौका के अंदर वो घायल पड़े हैं और संपर्क स्थापित नहीं कर पा रहे थे."
बचाव अभियान
इसके बाद छलियों की निगरानी करने वाला एक जहाज़ उनकी ओर बढ़ रहा था, जो सोमवार को उन तक पहुंच सका.
ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड आर्मी कॉर्प्स (एएनज़ेडएसी) का एक युद्धपोत, जिस पर हेलिकॉप्टर भी था, अभिलाष की ओर बढ़ रहा था मगर आयोजकों का कहना था कि उसे यहां तक पहुंचने में कम से कम चार दिन लगेंगे.
भारत और ऑस्ट्रेलिया के एक-एक सैन्य विमान रविवार को अभिलाष के याट के ऊपर से उड़े ताकि उनकी हालत का जायज़ा लिया जा सके. मगर विमान क्रू के सदस्य अभिलाष से संपर्क करने में नाक़ामयाब रहे थे.
कौन हैं अभिलाष?
39 साल के भारतीय नेवी के कमांडर अभिलाष 2013 में समुद्री यात्रा के ज़रिये पूरी दुनिया का चक्कर लगाने वाले पहले भारतीय बने थे.
उनकी नौका का नाम थूरिया है जो 1968 में हुई पहली गोल्डन ग्लोब रेस के विजेता रॉबिन नॉक्स जॉनस्टन की नौका 'सुहैली' की प्रतिकृति है.
उनका सैटेलाइट फ़ोन टूट गया था, ऐसे में वह टेस्टिंग यूनिट के ज़रिये संपर्क साध रहे थे.
शनिवार को अभिलाष ने मेसेज भेजा था, "चलना बेहद मुश्किल है, स्ट्रेचर की ज़रूरत पड़ेगी, चल नहीं सकता, शुक्र है नाव के अंदर सुरक्षित हूं.... सैटलाइट फ़ोन ख़राब है."
टॉमी के पास एक और सैटलाइट फ़ोन था जो कि एक इमरजेंसी बैग में रखा गया था. मगर वो उस बैग तक पहुंच नहीं पा रहे थे.
तूफ़ान से और लोग भी हुए प्रभावित
आयरलैंड के एक प्रतिभागी ग्रेगर मैकगकिन का याट भी तूफ़ान में टूट गया था मगर उन्होंने इसकी मरम्मत कर ली थी.
शुक्रवार को तूफ़ान के कारण 70 नॉट्स की तेज़ हवाएं चली थीं और 14 मीटर ऊंची लहरें उठी थीं. इसी कारण एक अन्य प्रतिभागी मार्क स्लैट्स की नौका दो बार पलट गई थी.
आयोजकों का कहना है कि 11 प्रतिभागी अभी भी रेस में बने हुए हैं. ये लोग उत्तर में थे इस कारण तूफ़ान से बच गए.
गोल्डन ग्लोब रेस एक ऐसी रेस है जिसमें अकेले ही 30 हज़ार मील का यात्रा तय करनी होती है. इसमें सैटेलाइट कम्यूनिकेशन के अलावा और किसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया जाता.
प्रतियोगिता 01 जुलाई को फ्रांस से शुरू हुई थी. अब तक सात नावों को रेस से हटना पड़ा है.
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