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उर्दू प्रेस रिव्यू: इमरान ख़ान ने कहा, 'अमरीका की ग़लत बातें नहीं मानेंगे'
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते पाकिस्तान के अमरीका और ईरान से रिश्तों के बारे में ख़ूब लिखा गया.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि वो अमरीका की कोई भी ग़लत बात नहीं मानेंगे, लेकिन वो अमरीका से सम्मान के साथ संबंध रखना चाहते हैं.
एक्सप्रेस अख़बार के मुताबिक़ इमरान ख़ान का कहना था कि वो अमरीका के मामले में अपने पुराने नज़रिए पर क़ायम हैं.
अख़बार के अनुसार इमरान ख़ान का कहना था, ''अमरीका की कोई भी ग़लत बात हम नहीं मानेंगे. हम अमरीका के साथ लड़ नहीं सकते. संबंध बेहतर करेंगे.''
इस मौक़े पर इमरान ख़ान ने एक बार फिर इस बात को दोहराया कि वो भारत समेत सभी पड़ोसी देशों से बेहतर संबंध चाहते हैं, लेकिन उनके अनुसार भारत कोई सकारात्मक रवैया नहीं दिखा रहा है.
बाजवा की तारीफ़
इस्लामाबाद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान इमरान ख़ान ने कहा कि उनके सामने इस समय ढेर सारी चुनौतियां हैं. उन्होंने सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा की भी जमकर तारीफ़ की.
इमरान ख़ान का कहना था कि हाल के दिनों में जनरल बाजवा सबसे बेहतर सेना प्रमुख रहे हैं जो लोकतांत्रिक सरकार के साथ खड़े हैं.
इमरान ख़ान ने पाकिस्तान सेना के मुख्यालय का दौरा किया था और सेना प्रमुख समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मुलाक़ात की थी.
ख़ुशनुमा माहौल नेक शगुन
अख़बार जंग ने इमरान और सैन्य अधिकारियों से मुलाक़ात पर संपादकीय भी लिखा है.
संपादकीय में लिखा गया है कि 'ये पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है कि जब देश बेशुमार आंतरिक और विदेशी चुनौतियों से घिरा हुआ है तो उसके सभी संस्थान देश को इस संकट से बाहर निकालने के लिए एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं.'
जंग के संपादकीय के अनुसार इसकी बेहतरीन मिसाल इमरान ख़ान के सेना मुख्यालय के दौरे में मिलती है.
अख़बार लिखता है कि इमरान ख़ान ने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से पूरे आठ घंटे तक देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की.
संपादकीय के अनुसार ये बात किसी से छिपी नहीं है कि बीते सालों में सरकार और सेना के रिश्ते अच्छे नहीं थे और देश को मार्शल लॉ के दौर से गुज़रना पड़ा था. लेकिन ये सब बातें अब पुरानी हो चुकी हैं और उन सबको भूलकर आगे बढ़ना ही देश और समाज के लिए बेहतर है. संपादकीय के अनुसार सियासी और सैन्य नेतृत्व के एक ख़ुशनुमा माहौल में इतनी लंबी मुलाक़ात पाकिस्तान के लिए एक नेक शगुन है.
भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सख़्त रुख़
अख़बार दुनिया ने इमरान ख़ान की पत्रकारों से इसी मुलाक़ात का ज़िक्र करते हुए सुर्ख़ी लगाई है, ''चाहे सरकार छोड़नी पड़े, लेकिन भ्रष्टाचार के मामले में पीछे नहीं हटूंगा.''
अख़बार दुनिया के अनुसार इमरान ख़ान ने कहा है कि बिना किसी भेदभाव के सबका हिसाब होगा और भ्रष्ट लोगों की चीख़ें निकल जाएंगी. उन्होंने कहा कि विपक्ष में कई लोग बहुत भ्रष्ट हैं और आने वाले दिनों में उनके ख़िलाफ़ ऐसी-ऐसी बातें सामने आएंगी कि लोगों के होश उड़ जाएंगे.
इमरान ख़ान ने पाकिस्तानी मीडिया से अपील की है कि 'वो उन्हें सिर्फ़ तीन महीने का समय दें उसके बाद उनके किसी फ़ैसले की आलोचना करें.'
जंग अख़बार ने इसी बात को अहमियत देते हुए सुर्ख़ी लगाई है, ''मीडिया तीन महीने का वक़्त दे, फिर आलोचना करे.''
ईरान के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान का दौरा किया है. ईरानी विदेश मंत्री जव्वाद ज़रीफ़ ने इमरान ख़ान के अलावा विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी और सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा से भी मुलाक़ात की.
अख़बार नवा-ए-वक़्त ने जव्वाद ज़रीफ़ और इमरान ख़ान की मुलाक़ात के बाद लिखा है कि पाकिस्तान ने ईरान के परमाणु समझौते मामले में ईरान के रुख़ का समर्थन किया है.
जव्वाद ज़रीफ़ ने ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई का एक ख़त भी पाकिस्तानी विदेश मंत्री को दिया. अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार उस ख़त में ख़ामेनेई ने भारत प्रशासित कश्मीर में संघर्ष कर रहे कश्मीरियों का समर्थन किया है. पाकिस्तान ने इसके लिए ख़ामेनेई और ईरान सरकार का शुक्रिया भी अदा किया है.
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