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उर्दू प्रेस रिव्यू: 'क्या पाकिस्तान के अर्दोआन साबित होंगे इमरान ख़ान?'
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान में आम चुनाव के नतीजे आ चुके हैं और क्रिकेटर से नेता बने इमरान ख़ान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है. इसलिए ज़ाहिर है कि इस हफ़्ते पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बार में चुनाव से ज़ुड़ी ख़बरें ही सुर्ख़ियां बटोरती रहीं.
25 जुलाई को पाकिस्तानी संसद और प्रांतीय एसेम्बली के लिए चुनाव हुए और उसी दिन शाम के बाद से वोटों की गिनती शुरू हो गई.
इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ ने 116 सीटें जीती हैं, लेकिन अभी भी वो बहुमत से 20 सीटें पीछे हैं. नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग(नवाज़) 64 सीट जीतकर दूसरे नंबर पर रही जबकि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) केवल 43 सीट ही जीत पाई.
पाकिस्तानी संसद में कुल 342 सीटें होती हैं. इनमें से 272 जनरल सीटें हैं, 60 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं और 10 अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के लिए.
25 जुलाई को 270 सीटों के लिए चुनाव हुए थे.
'जनता के मैंडेट पर डाका'
लेकिन विपक्षी पार्टियों ने चुनाव में कथित धांधली के आरोप लगाते हुए चुनावी नतीजों को मानने से इनकार कर दिया है.
अख़बार जंग के अनुसार धार्मिक पार्टियों के समूह मुत्ताहिदा मजलिस-ए-अमल (एमएमए) ने शुक्रवार को सभी विपक्षी पार्टियों की बैठक बुलाई थी जिसके बाद फ़ैसला लिया गया है कि नतीजों का बहिष्कार किया जाएगा, दोबारा चुनाव की मांग करते हुए सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन छेड़ा जाएगा.
हालांकि पीपीपी ने इस बैठक में हिस्सा नहीं लिया था.
बैठक के बाद एमएमए के प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, ''चुनाव आयोग के नतीजे जनता का मैंडेट नहीं बल्कि जनता के मैंडेट पर डाका डाला गया है.''
उन्होंने कहा कि इस बैठक में निर्वाचित लोगों से शपथ नहीं लेने की अपील की गई है. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि धांधली से जीतकर आए लोगों को सदन में घुसने नहीं देंगे.
लेकिन मुस्लिम लीग (नवाज़) के प्रमुख शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि इस बारे में कोई भी फ़ैसला पार्टी फ़ोरम में लिया जाएगा.
'चुनाव आयुक्त इस्तीफ़ा दें'
अख़बार एक्सप्रेस के मुताबिक़ पीपीपी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा कि वो चुनावी नतीजों को नहीं मानते हैं, लेकिन संसद का बहिष्कार करना ठीक नहीं है. उन्होंने इस मौक़े पर कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव कराने में नाकाम रहा है इसलिए चुनाव आयुक्त को इस्तीफ़ा देना चाहिए.
लेकिन यूरोपीय यूनियन और कॉमनवेल्थ देशों के चुनावी पर्यवेक्षकों ने कहा है कि चुनाव में किसी बड़े पैमाने पर धांधली के कोई सबूत नहीं मिले हैं.
अख़बार दुनिया के अनुसार, ''भारतीय पर्यवेक्षक एसवाई कुरैशी का भी कहना है कि मतदान के समय किसी बड़े घपले की कोई जानकारी नहीं हैं, अलबत्ता वोटों की गिनती के दौरान कुछ कमियां थीं जो सिर्फ़ और सिर्फ़ इस वजह से हुई थीं कि चुनाव आयोग के कर्मचारी पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं थे.''
'सेना का कोई रोल नहीं'
कुरैशी का ये भी कहना था कि पाकिस्तानी सेना का इस पूरे चुनाव में कोई रोल नहीं था. उनके अनुसार सेना ने किसी भी तरह से चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश नहीं की थी.
इससे पहले इमरान ख़ान के संभावित प्रधानमंत्री बनने पर अख़बारों में अलग-अलग तरह की राय पेश की जाने लगी.
अख़बार जंग के अनुसार पाक सरज़मीन पार्टी के प्रमुख मुस्तफ़ा कमाल के अनुसार इमरान ख़ान बहुत ज़्यादा दिनों तक सरकार नहीं चला पाएंगे.
क्रिकेट की बातें होंगी
जाने माने पत्रकार इम्तियाज़ आलम ने जंग अख़बार में एक कॉलम लिखा है जिसका शीर्षक है 'क्या इमरान ख़ान पाकिस्तान के अर्दोआन होंगे'.
इम्तियाज़ आलम लिखते हैं कि ऐसा कहा जा रहा है कि इमरान ख़ान पाकिस्तान के अर्दोआन बनने जा रहे हैं. लेकिन इसको ख़ारिज करते हुए इम्तियाज़ आलम लिखते हैं, '' इमरान ख़ान की सोच बहुत हद तक अर्दोआन से ज़रूर मिलती है, लेकिन इमरान ख़ान के पास अर्दोआन की तरह एक प्रशिक्षित आधुनिक कैडर नहीं है.''
अख़बार जंग में ही बाबर सत्तार ने एक कॉलम लिखा है जिसका शीर्षक दिया है 'उम्मीदों भरा नया पाकिस्तान.'
बाबर सत्तार लिखते हैं कि इमरान को अपने क्रिकेट के दिनों की बातें ज़रूर याद होंगी.
बाबर लिखते हैं, ''भारत-पाकिस्तान के दरम्यान मैचों के मनमुताबिक़ फ़ैसले नहीं आने पर लोग टीवी सेट तोड़ दिया करते थे. जज़्बात की इस दुनिया में हीरो को ज़ीरो बनते देर नहीं लगती.''
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