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ब्लॉगः 'नेगेटिव कवरेज के बावजूद भारत में इमरान ख़ान की छवि अच्छी'
- Author, शकील अख़्तर
- पदनाम, संवाददाता, बीबीसी उर्दू सेवा
पाकिस्तान में चुनाव के समापन के बाद अब नई सरकार बनाने की तैयारियाँ चल रही हैं.
पाकिस्तान के लोगों ने इन चुनावों में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी और नवाज़ शरीफ़ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के उम्मीदवारों को ख़ारिज कर दिया है.
वहीं, लोगों ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी (पीटीआई) के चीफ़ इमरान ख़ान की अगुवाई में देश की कमान देने का फ़ैसला किया है.
पाकिस्तान चुनाव आयोग के नियमों की समझ रखने वालों का कहना है कि इमरान का प्रधानमंत्री बनना अब तय है. लेकिन प्रक्रिया पूरी करने में उन्हें दो हफ़्तों का वक़्त लग सकता है.
पीटीआई की जीत को पाकिस्तान के चुनावी इतिहास में एक नये युग की शुरुआत कहा जा रहा है. और इमरान ख़ान ख़ुद 'एक नए पाकिस्तान के निर्माण का नारा' दे ही चुके हैं.
चुनाव अभियान के दौरान जिस तरह पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को अयोग्य ठहरा दिया गया और उन्हें जेल की सज़ा सुनाई गई, उसे देखते हुए एक बार को चुनाव पर आशंका के बादल मंडराने लगे थे.
लेकिन 25 जुलाई को पारदर्शिता के साथ चुनावों का समापन हुआ. एक लंबे और कड़े चुनावी अभियान के बाद पाकिस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था की ये सबसे बड़ी सफलता कही जा सकती है.
हालांकि, इस चुनाव को लेकर यूरोपीय संघ और कुछ अन्य पर्यवेक्षकों ने सवाल उठाये हैं. उनका कहना है कि इस बार के पाकिस्तान चुनाव साल 2013 में हुए चुनावों की तरह बेहतर नहीं हैं.
भारत में सही नहीं हुई रिपोर्टिंग
यूरोपियन यूनियन के प्रतिनिधियों का कहना था कि कुछ ग़ैर-लोकतांत्रिक ताक़तों ने चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की है.
बहरहाल, भारत के लोगों में पाकिस्तान के इन चुनावों को लेकर काफ़ी दिलचस्पी देखी गई. हालांकि, भारतीय मीडिया ने पाकिस्तान के चुनावी नतीजों पर तटस्थ ढंग से रिपोर्टिंग नहीं की.
नतीजे आने के बाद भारतीय टीवी न्यूज़ चैनलों पर और अधिकांश समाचार पत्रों में इमरान ख़ान की जीत को फ़ौज की जीत के तौर पर पेश किया गया.
टीवी चैनलों की डिबेट में पीटीआई नेता इमरान ख़ान को पाकिस्तान की सेना और धार्मिक कट्टरपंथियों का क़रीबी दिखाया गया. भारत में मीडिया ने अपनी अवधारणा के हिसाब से लोगों को बताया कि इमरान ख़ान के पास वो शक्तियाँ नहीं हैं, जो प्रधानमंत्री के रूप में पिछले नेताओं के पास थीं.
भारतीय मीडिया की राय में पाकिस्तान की नई सरकार, फ़ौज के प्रभाव में होगी.
लेकिन कई अन्य पर्यवेक्षक मौजूदा राजनीतिक स्थिति को पाकिस्तान के लोगों की सफलता मानते हैं और इसे बदलते पाकिस्तान का एक संकेत कह रहे हैं.
क्रिकेट की वजह से इमरान की पहचान
कई विश्लेषकों ने लिखा है कि बीते सात-आठ साल में इमरान ख़ान ने ज़मीन पर बहुत ज़्यादा मेहनत की है और अपने लोगों को संगठित किया है.
जबकि कुछ विश्लेषक ये भी मानते हैं कि जिस तरह से पाकिस्तान की जनता ने धार्मिक कट्टरपंथियों और चरमपंथी गुटों के उम्मीदवारों को सिरे से ख़ारिज कर दिया, वो भी इस पाकिस्तान चुनाव का एक महत्वपूर्ण पहलू है.
इमरान ख़ान ने अपनी पार्टी की जीत के बाद भारतीय मीडिया में अपने नकारात्मक कवरेज का उल्लेख किया और कहा कि भारतीय मीडिया ने उन्हें एक बॉलीवुड विलेन की तरह प्रस्तुत किया.
लेकिन अपने पहले सार्वजनिक वक्तव्य में उन्होंने भारत की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया.
भारत में अच्छे ख़ासे संकोच के साथ उनके इस बयान का स्वागत किया गया. कई विश्लेषक मानते हैं कि भारत में इमरान ख़ान की छवि अच्छी है और राजनीति से पहले क्रिकेट के कारण भारत में लोग उन्हें जानते हैं.
सेना से नज़दीकी और धार्मिक दलों से सहानुभूति होने के बावजूद इमरान ख़ान को सम्मान की नज़र से देखा जाता है.
नई सरकार के निर्माण के बाद, नए नेतृत्व की सबसे पहली और बड़ी चुनौती देश की अर्थव्यवस्था होगी. लेकिन जल्द ही उन्हें अफ़गानिस्तान और भारत जैसे पड़ोसियों के साथ अपने संबंधों पर ध्यान देना होगा.
भारत भी अब आम चुनावों की ओर बढ़ रहा है. ऐसे में ये दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने का एक शानदार अवसर है.
इमरान ने कहा है कि अगर भारत पाकिस्तान की ओर एक क़दम बढ़ायेगा तो वो दो क़दम बढ़ायेंगे.
लंबे समय बाद भारत के लिए ये पाकिस्तान सरकार के साथ एक नई शुरुआत करने का नया अवसर है.
इमरान ने इस बारे में जो सकारात्मक संकेत दिये हैं, उन्हें भारत में महसूस भी किया गया है.
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