भारतीय लड़कियां चीनी लड़कों से शादी क्यों नहीं करतीं

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- Author, तिलक झा
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
चीन के इंटरनेट पर आजकल एक दिलचस्प बहस छिड़ी है.
और बहस का मुद्दा है- भारतीय लड़कियां चीनी लड़कों से शादी क्यों नहीं करतीं.
सबसे पहले ये सवाल चीनी वेबसाइट झिहू पर साल भर पहले उछाला गया था. इस वेबसाइट पर लोग सवाल पूछते हैं और यूज़र्स उसका अपने हिसाब जवाब देने की कोशिश करते हैं.
पिछले कुछ दिनों से इस सवाल पर फिर से बहस शुरू हो गई है. अभी तक 12 लाख लोग इस सवाल पर अपनी निगाह डाल चुके हैं.
दोनों ही देशों में शादी एक अहम मुद्दा है. लिंगानुपात में फ़र्क की वजह से ये मामला और पेचीदा हो जाता है.
चीन में महिलाओं के मुक़ाबले 34 लाख पुरूष अधिक हैं. इसकी वजह चीन की वन-चाइल्ड पॉलिसी है, जिसे साल 2015 में बंद किया गया था.
दूसरी ओर भारत में महिलाओं की कुल संख्या से 37 लाख पुरूष अधिक हैं.

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उत्सुकता है कि ऐसा क्यों है
भारत में दहेज पर पाबंदी के बावजूद लड़की के मां-बाप कैश के अलावा गहने और बाक़ी सामान लड़के के परिवार को देते हैं. लेकिन चीन में इससे उलट दुल्हन को क़ीमती भेंट देने का रिवाज़ है.
झिहू नाम की इस वेबसाइट पर किसी ने लिखा है कि चीन में आमतौर सगाई के लिए एक लाख युआन यानी क़रीब दस लाख रूपए उपहार के तौर पर दिए जाते हैं.
वेबसाइट पर किसी ने एक लंबा पोस्ट करते हुए लिखा है, "ये किसी भी भारतीय किसान की 10 साल की कमाई है. अपनी बेटियों की शादी के लिए भारी ख़र्च के बजाय भारतीय परिवार चीन में उनकी शादी कर मोटी कमाई कर सकता है."
पोस्ट में आगे लिखा है, "चीन के गांव भारत से बेहतर हैं और अगर किसी लड़की की शादी शहरी चीनी से होती है तो ये फ़र्क और भी कई गुना बढ़ जाता है. यही वजह है कि इस मामले में मेरी उत्सुकता बढ़ती जा रही है. चीनी मर्द वियतनाम, बर्मा और यहां तक कि यूक्रेन की लड़कियां से शादी कर रहे हैं लेकिन भारतीय लड़कियों से नहीं."

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दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक रिश्ते बेहतर हो रहे हैं लेकिन भारतीय लड़की और चीनी लड़के की जोड़ी अब भी कम ही देखने को मिलती है.
चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़ चीन के मैसेजिंग ऐप वीचैट के 200 भारतीय-चीनी जोड़ों में से सिर्फ़ एक ही जोड़ा ऐसा था, जिसमें लड़की भारतीय थी और लड़का चीनी.

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शादी का पैसों से क्या रिश्ता
झिहू के कमेंट सेक्शन में दहेज पर गर्मागर्म बहस हो रही है.
लोग अपनी टिप्पणियों में कह रहे हैं कि दहेज की मोटी रकम की वजह से लोगों की जान तक चली जाती है.
बीजिंग विश्वविद्याल में पढ़ रहे हे वेई ने झिहू पर चल रही बहस की भाषा पर आपत्ति जताई है.
मंगलवार को हे ने लिखा कि भारत में शादियां सिर्फ़ पैसों के लिए ही नहीं होतीं.
आमिर ख़ान की फ़िल्म दंगल का मिसाल देते हुए उन्होंने लिखा, "भारत और चीन के शहरी मध्यमवर्ग में कोई ख़ास फ़र्क नहीं है. ये वर्ग दोनों ही देशों में बिंदास है और इस वर्ग में से कोई भी किसी विदेशी व्यक्ति से शादी के लिए तैयार हो जाएगा. "
पारिवारिक मूल्य

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कुछ लोग ये चर्चा भी कर रहे थे कि भारत में लिंगानुपात की स्थिति चीन से भी बदतर है.
एक यूज़र ने लिखा है कि भारतीय लड़कियों के चीन लड़कों के साथ शादी न करने की एक वजह ये है कि असल ज़िंदगी में इन दोनों की भेंट ही नहीं होती है.
उन्होंने लिखा है, "कई भारतीय पुरूष चीन और हॉन्ग कॉन्ग में काम करते हैं लेकिन वहाँ भारतीय महिलाओं की संख्या न के बराबर है. इसके विपरीत अफ़्रीका में कई चीनी मर्द काम करते हैं जिसकी वजह से, इनमें से कई अफ़्रीकी लड़कियों से शादियां कर रहे हैं."
फ़ेंग नाम के यूज़र ने लिखा है, "भारतीय महिलाओं पर पारिवारिक मूल्यों को ढोने का बोझ भी रहता है. साथ ही भारतीय मर्द भी काफ़ी स्मार्ट होते हैं. उनके सामने चीनी मर्दों की एक नहीं चल सकती."
कुछ लोगों ने तो ये भी कहा कि भारतीय अपनी बेटियों की शादी चीनी मर्दों की तुलना में गोरे लोगों से करवाना पसंद करेंगे.
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