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तुर्की की लीरा को संभालने के लिए क़तर चलेगा ये दांव
तुर्की इन दिनों आर्थिक संकट का सामना कर रहा है. सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी ग्रोथ पर तो असर पड़ा ही है, विदेशी मुद्रा भंडार खाली होता जा रहा है और तुर्की की मुद्रा लीरा लगातार फिसलती जा रही है.
लेकिन अमरीका के साथ तुर्की की इस दुश्मनी में क़तर ने राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है और लीरा को संभालने के लिए कुछ कदम उठाने की घोषणा की है.
क़तर ने तुर्की के अधिकारियों के साथा बातचीत के बाद घोषणा की कि उन्होंने करेंसी स्वैप के लिए द्विपक्षीय समझौता किया है.
क़तर के सेंट्रल बैंक ने एक बयान जारी कर कहा है कि करेंसी स्वैप से द्विपक्षीय व्यापार बढ़ेगा. इसके अलावा लीरा में स्थिरता आएगी. इससे पहले, क़तर ने घोषणा की थी कि वो तुर्की में 1500 करोड़ डॉलर का प्रत्यक्ष निवेश करेगा.
लीरा में इस साल डॉलर के मुक़ाबले 40 फ़ीसदी की गिरावट आई है. अमरीका ने हाल ही में तुर्की को धमकी दी है कि अगर उसने एंड्र्यू ब्रूसन नामक पादरी को रिहा नहीं किया तो उसके ख़िलाफ़ प्रतिबंध और कड़े किए जाएंगे.
'हमारे झंडे पर हमला'
इसके जवाब में तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने कहा है कि अर्थव्यवस्था पर हमला किसी देश पर हमला करने से कम नहीं है. देश को संबोधित करते हुए अर्दोआन ने कहा, "हमारी अर्थव्यवस्था पर हमला करने में और हमारी प्रार्थनाओं और हमारे झंडे पर हमला करने में कोई फर्क नहीं है."
उन्होंने कहा, "उनका इरादा तुर्की और तुर्की के लोगों को घुटनों पर ला खड़ा करना है और उन्हें बंधक बनाना है. ये लोग आतंकवादी संगठनों के दम पर और हज़ारों दूसरे तरीके अपनाकर भी तुर्की को नहीं झुका सके. वो अब सोचते हैं कि एक्सचेंज रेट के ज़रिये तुर्की को हरा देंगे, लेकिन उन्हें जल्द ही अपनी ग़लती का अहसास हो जाएगा."
अर्दोआन ने कहा, "इंशाअल्लाह, हमारे देश के पास इस संकट से उबरने की ताक़त है."
लीरा में गिरावट की कई वजहें हैं. पिछले कई हफ़्तों से तुर्की का अमरीका से विवाद बढ़ता जा रहा है. ऐसा तब है जब तुर्की पिछले 60 सालों से ज़्यादा समय से नैटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन) का सदस्य है.
तुर्की की सरकार देश में कम होते उपभोग और निर्माण आधारित अर्थव्यवस्था में आई मंदी को नियंत्रित करने के लिए कोई क़दम उठाए. तुर्की का चालू खाता घाटा भी बढ़कर उसकी जीडीपी की पांच फ़ीसदी से ऊपर चला गया है.
पादरी की गिरफ्तारी पर ठनी
अमरीकी विदेश मंत्रालय ने तुर्की पर प्रतिबंध लगाए हैं. तुर्की ने अमरीका के एंड्र्यू ब्रुसन नाम के एक पादरी को अक्टूबर 2016 में गिरफ़्तार कर लिया था. एंड्र्यू दो सालों तक तुर्की की जेल में रहे. एंड्रूयू को अब भी तुर्की ने छोड़ा नहीं है.
ट्रंप प्रशासन तुर्की के इस क़दम से काफ़ी ख़फ़ा है और आर्थिक प्रतिबंध की एक वजह ये भी बताई जा रही है. अमरीकी प्रतिबंध से तुर्की के बाज़ार पर कई प्रतिकूल असर पड़े हैं. इस हफ़्ते दोनों देशों के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन मसले सुलझ नहीं पाए.
तुर्की ने भी अमरीकी प्रतिबंधों का जवाब दिया है. तुर्की ने अमरीका से इंपोर्ट होने वाले कार, एल्कोहॉल और तंबाकू पर ड्यूटी बढ़ा दी है. हालाँकि तुर्की के इन प्रतिबंधों का ट्रंप प्रशासन पर ख़ास असर नहीं पड़ा है.
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