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जिस अमरीकी पादरी की गिरफ़्तारी से हिल गया है तुर्की
तुर्की ने अमरीकी पादरी एंड्र्यू ब्रनसन को अक्टूबर 2016 में गिरफ़्तार किया था तो उसे शायद ही पता रहा होगा कि इसका असर दो साल बाद ऐसा होगा कि मुल्क की अर्थव्यवस्था हिल जाएगी.
एंड्र्यू को रिहा नहीं करने पर अमरीका ने आर्थिक प्रतिबंध लगाने की धमकी दी और उसने ऐसा कर दिखाया. ट्रंप ने तुर्की के इस्पात और एल्यूमीनियम पर भी आयात शुल्क को बढ़ाकर दोगुना कर दिया.
तुर्की की अर्थव्यवस्था में लगातार गिरावट जारी है. उसकी मुद्रा लीरा इस साल अब तक डॉलर की तुलना में 40 फ़ीसदी गिर चुका है.
डॉलर के मुक़ाबले लीरा में पिछले हफ़्तेभर में 16 फ़ीसदी की गिरावट आई है. लीरा का गिरना कब बंद होगा कुछ कहा नहीं जा सकता है.
आख़िर तुर्की के ख़िलाफ़ अमरीका ने क्यों ऐसा फ़ैसला लिया है? इसकी वजह अलग-अलग बताई जा रही हैं, लेकिन उनमें से एक ख़ास वजह एक अमरीकी पादरी है.
राजनीतिक समूहों के साथ कथित संबंधों को लेकर तुर्की में एंड्रयू ब्रनसन नामक पादरी को साल 2016 में गिरफ़्तार किया गया था.
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सेंडर्स का कहना है, "हमें लगता है कि वह अनुचित और अन्यायपूर्ण हिरासत का शिकार हैं."
अमरीका ने ब्रनसन को रिहा करने की मांग की है, लेकिन तुर्की ने कहा है कि उनकी रिहाई की मांग 'अस्वीकार्य' है.
आर्थिक प्रतिंबध लगाए जाने के बाद बुधवार को तुर्की के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा था, "इस ग़लत फ़ैसले से पीछे हटने के लिए हम अमरीकी प्रशासन से आह्वान करते हैं."
बीबीसी तुर्की के संवाददाता मार्क लोवेन कहते हैं कि अमरीका द्वारा नेटो सहयोगी देश पर इस तरह के प्रतिबंध लगाना अनोखा है और दोनों देशों के रिश्ते दशकों में सबसे निचले स्तर पर पहुंचे चुके हैं.
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन पश्चिमी नेताओं की ओर झुकाव के लिए जाने जाते हैं.
लोवेन का कहना है कि सरकार समर्थित समीक्षकों ने अमरीकी सैन्य बेस को बंद करने की मांग की है जिससे नेटो सहयोगियों की सुरक्षा साझेदारी ख़तरे में पड़ सकती है.
हालांकि, अर्दोआन के आलोचकों का कहना है कि बड़े स्तर पर गिरफ़्तारियों, मानवाधिकार उल्लंघनों और रूस से मिसाइल रक्षा प्रणाली ख़रीदने के कारण उन पर पहले ही प्रतिबंध लग जाना चाहिए था.
पिछले सप्ताह राष्ट्रपति ट्रंप ने तुर्की को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर वह ब्रनसन को तुरंत रिहा नहीं करता है तो उसको 'कड़े प्रतिबंधों' का सामना करना पड़ेगा.
कौन हैं एंड्रयू ब्रनसन?
ब्रनसन काफ़ी समय से तुर्की में रह रहे हैं. वह अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ रहते हैं जबकि इज़्मिर के एक चर्च में वह पादरी के तौर पर काम करते हैं. इस चर्च से तक़रीबन दो दर्जन जनसमूह जुड़े हुए हैं.
तुर्की प्रशासन का आरोप है कि ब्रनसन के ग़ैर-क़ानूनी कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) और गुलेन आंदोलन के साथ संबंध हैं. गुलेन आंदोलन पर 2016 के असफल तख़्तापलट का आरोप लगाया जाता है.
वहीं, ब्रनसन ने जासूसी के आरोपों से इनकार किया है, लेकिन अगर वह दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें 35 साल तक की जेल की सज़ा सुनाई जा सकती है.
स्वास्थ्य कारणों से उन्हें पिछले महीने घर में नज़रबंद कर दिया गया था, लेकिन विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा था कि यह काफ़ी नहीं है.
पोम्पियो ने ट्वीट किया था, "हमें ब्रनसन के ख़िलाफ़ विश्वसनीय सबूत नहीं मिले हैं."
तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा था कि उसने अमरीका के साथ 'आवश्यक जानकारी' साझा की थी, लेकिन उन्होंने ज़ोर दिया कि इस मामले को न्यायपालिका पर छोड़ देना चाहिए.
तुर्की क्यों नहीं छोड़ रहा?
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, दो साल पहले असफल तख़्तापलट के बाद ब्रनसन समेत 20 अमरीकियों पर मामला चलाया गया था.
इस दौरान हुई कार्रवाई में तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने 50 हज़ार से अधिक लोगों को गिरफ़्तार कराया था. उन्होंने पेंसिल्वेनिया स्थित मुस्लिम नेता फेतुल्लाह गुलेन पर इसकी कोशिश का आरोप लगाया, लेकिन गुलेन ने इससे इनकार किया.
तुर्की चाहता है कि अमरीका उनका प्रत्यर्पण करे. अर्दोआन संकेत दे चुके हैं कि वो गुलेन के बदले पादरी को दे सकते हैं.
सीरिया के गृह युद्ध में कुर्दिश बलों को अमरीकी समर्थन से भी अर्दोआन नाराज़ हैं. उनका मानना है कि यह बल पीकेके का विस्तारित रूप है.
पीकेके तुर्क-कुर्द विद्रोह समूह है जो 1980 से स्वायत्ता के लिए लड़ रहा है. अमरीका और तुर्की इसे एक आतंकी समूह मानता है.
पूरे विवाद पर ट्रंप ने अपने ट्वीट में कहा है, ''हमारे मज़बूत डॉलर के तुलना में उनकी मुद्रा कमज़ोर है. अमरीका और तुर्की के संबंध अभी ठीक नहीं हैं.''
तुर्की राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन का कहना है कि विदेशी ताक़तों के कारण उनकी मुद्रा में गिरावट जारी है. तुर्की ने अमरीका पर पलटवार की चेतावनी दी है.
अर्दोआन ने अपने भाषण में कहा था, ''अगर उनके पास डॉलर है तो हमारे पास लोग हैं, हमारे पास अपने अधिकार हैं और हमारे पास अल्लाह हैं.''
विश्लेषकों का मानना है कि अर्दोआन के ऐसे बयान से लीरा में सुधार नहीं होगा, बल्कि हालात और ख़राब होंगे. ट्रंप के ट्वीट के बाद अर्दोआन ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन को फ़ोन मिलाया और बात की. रूस की तरफ़ से बयान आया है कि दोनों नेताओं ने अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर बात की है.
अभी लीरा का शुमार दुनिया की वैसी मुद्रा में है जिसके दुर्दिन ठीक होने के नाम ही नहीं ले रहे. इस साल लीरा में अब तक 40 फ़ीसदी की गिरावट आई है. यह गिरावट लंबी अवधि से जारी है. पांच साल पहले दो लीरा देकर एक अमरीकी डॉलर ख़रीदा जा सकता था, लेकिन अब एक डॉलर के लिए 6.50 लीरा देने पड़ रहे हैं.
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