उर्दू प्रेस रिव्यू: इमरान ख़ान ने अपने बेटे को पाकिस्तान नहीं आने दिया

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- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते इमरान ख़ान के शपथ ग्रहण से जुड़ी ख़बरे ही छाई रहीं.
क्रिकेटर इमरान ख़ान एक दफ़ा फिर पाकिस्तान के कप्तान बन गए हैं. लेकिन इस बार उनपर पाकिस्तानी क्रिकेट टीम की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि अब वो पूरे देश के कप्तान बन गए हैं.
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के प्रमुख इमरान ख़ान ने शनिवार (18 अगस्त ) को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.
अख़बार जंग के अनुसार शपथ के दौरान उस वक़्त असहज स्थिति पैदा हो गई जब इमरान उर्दू के कई शब्दों के उच्चारण में न सिर्फ़ अटके, बल्कि कई शब्द ग़लत पढ़ गए.
काली शेरवानी पहने इमरान शपथ ग्रहण के दौरान कुछ नर्वस से नज़र आ रहे थे और उर्दू शब्दों के उच्चारण में कई बार अटके. राष्ट्रपति हुसैन ने जब 'रोज़-ए-क़यामत' (फ़ैसले का दिन) कहा तो इमरान ने इसे ठीक से सुना नहीं और इसका ग़लत उच्चारण 'रोज़-ए-क़यादत' (नेतृत्व का दिन) किया.
राष्ट्रपति ने जब शब्द दुहराया तो इमरान ने मुस्कुराते हुए 'सॉरी' कहा और शपथ ग्रहण जारी रखा. शपथ ग्रहण के दौरान इमरान की ग़लतियों को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफ़ी चर्चा हो रही है और कुछ लोग उनका मज़ाक़ भी उड़ाते नज़र आ रहे हैं.
बुशरा मेनका थीं साथ
शपथ ग्रहण समारोह में इमरान ख़ान की पत्नी बुशरा मेनका भी उनके साथ थीं.

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इससे पहले शुक्रवार को पाकिस्तानी संसद यानी नेशनल एसेंबली ने उन्हें पाकिस्तान का प्रधानमंत्री चुन लिया था.
पाकिस्तान में भारत के उलट सदन में बहुमत पहले साबित करना होता है. पाकिस्तान की संसद में 173 बहुमत का आंकड़ा होता है और संसद में हुई वोटिंग में इमरान ख़ान को इससे तीन अधिक यानी 176 वोट मिले हैं.
नेशनल असेंबली में हुई वोटिंग में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ को 176 जबकि उनके विरोधी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के अध्यक्ष शहबाज़ शरीफ़ को केवल 96 वोट मिले.
सदन की लॉबी में जाते हुए शहबाज़ शरीफ़ पीपीपी के प्रमुख बिलावल भुट्टो के पास गए और उन्हें अपना फ़ैसला बदलने की एक आख़िरी कोशिश की लेकिन भुट्टो नहीं माने. पीपीपी और जमात-ए-इस्लामी ने प्रधानमंत्री चुनाव में हिस्सा नहीं लिया.
सिद्धू का जादू
अख़बार एक्सप्रेस ने सुर्ख़ी लगाई है 'तब्दीली आ गई.'
अख़बार दुनिया के अनुसार शहबाज़ शरीफ़ ने कहा है कि कथित धांधली की जांच के लिए एक ससंदीय समिति का गठन किया जाए और अगर ऐसा नहीं होता है तो उनकी पार्टी सदन को चलने नहीं देगी. दूसरी तरफ़ पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने कहा है कि इमरान ख़ान सबके प्रधानंत्री बनकर दिखाए.
भारत के पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू इमरान ख़ान के शपथ ग्रहण में शामिल होने वाले अकेले भारतीय थे. इमरान ख़ान ने सिद्धू के अलावा पूर्व क्रिकेटर कपिल देव और सुनिल गावस्कर को भी पाकिस्तान आने की दावत दी थी, लेकिन वे दोनों नहीं गए.

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सिद्धू से पाकिस्तान के एक सिख नागरिक ने एक अजीब सी मांग की है.
अख़बार जंग के अनुसार पाकिस्तान के पहले सिख पुलिस अफ़सर गुलाब सिंह को नौकरी में लापरवाही बरतने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया था.
गुलाब सिंह ने सिद्धू से अपील की है कि वो अपने दोस्त इमरान ख़ान से बात करें और उन्हें दोबारा बहाल करवा दें. सिद्धू ने क्या किया, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है.
अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार 22 की संख्या इमरान ख़ान के लिए बहुत शुभ है. अख़बार के अनुसार इमरान ख़ान ने साल 1992 में 22 रन से ही इंग्लैंड को हराकर क्रिकेट विश्प कप जीता था. और फिर 22 साल की मेहनत से ही वो पाकिस्तान के 22 वें प्रधानमंत्री बन पाए हैं.

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अख़बार नवा-ए-वक़्त में छपी एक ख़बर के मुताबिक़ इमरान ख़ान के बेटे भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होना चाहते थे. अख़बार ने इमरान की पूर्व पत्नी जेमाइमा गोल्डस्मिथ के हवाले से ख़बर दी है कि उनके दोनों बेटे 18 अगस्त को हुए शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होना चाहते थे लेकिन इमरान ख़ान ने उन्हें पाकिस्तान आने से मना कर दिया.
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