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दो साल बाद ख़त्म हुई तुर्की में इमरजेंसी
तुर्की की मीडिया ने कहा है कि दो साल पहले देश में लगाए गए आपातकाल को सरकार ने ख़त्म कर दिया है.
दो साल पहले देश में तख़्तापलट की नाकाम कोशिश हुई थी जिसके बाद तुर्की में आपातकाल लगा दिया गया था.
इस दौरान हज़ारों लोगों की गिरफ्तारियां हुईं जबकि हज़ारों को नौकरियों से बर्ख़ास्त किया गया.
सरकार ने आपातकाल ना हटाने के पक्ष में फ़ैसला लिया और इसकी मियाद कुछ महीनों के लिए आगे बढ़ाती रही.
देश में हाल में राष्ट्रपति चुनाव संपन्न हुए जिसमें एक बार फिर मौजूदा राष्ट्रपति रिचेप तैय्यप अर्दोआन चुनाव जीते थे.
चुनाव अभियान में विपक्षी उम्मीदवारों ने वादा किया था कि चुनाव जीतने पर वो सबसे पहले जो काम करेंगे वो आपातकाल को ख़त्म करना होगा.
आधिकारिक आंकड़ों और स्वयंसेवी संस्थाओं के एकत्र किए आंकड़ों के अनुसार आपातकाल के दौरान एक लाख सात हज़ार लोगों को सरकारी नौकरियों ने निकाला गया है जबकि पचास हज़ार से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उनकी सुनवाई बाक़ी है.
आरोप-प्रत्यारोप
माना जा रहा है कि जिन लोगों को नौकरियों से बर्खास्त किया गया है वो निर्वासित इस्लामिक मौलवी फतेहुल्लाह गुलेन के समर्थक थे.
फतेहुल्लाह गुलेन पहले अर्दोआन के मित्रों में शुमार थे लेकिन अब अमरीका में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं.
तुर्की का आरोप है कि 2016 में हुए सैन्य तख़्तापलट की कोशिश गुलेन और उनके समर्थकों ने की थी, हालांकि गुलेन इन आरोपों से इनकार करते हैं.
2016 में हुई तख़्तापलट की कोशिश के दौरान 250 से अधिक लोगों की मौत हुई थी.
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