घटनाएं जो बनीं ट्रंप और किम की मुलाकात का रोड़ा

पूरे विश्व की उस मुलाकात पर नज़रें टिकी थीं और वो ऐतिहासिक क्षण हो सकता था, लेकिन ऐसा हो न सका.

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की मुलाक़ात, जो कई दिनों तक चर्चा और सुर्खियों में रही, रद्द हो गई है.

दक्षिण कोरिया में विंटर ओलंपिक से शुरू हुए इस सिलसिले से उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच संबंधों में सुधार की संभावनाएं जगी थी.

शीतकालीन ओलंपिक खेलों के बाद उत्तर कोरिया और अमरीका के तेवरों में भी कमी आई.

फिर वो ऐतिहासिक पल भी आया जब उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने पहली बार दक्षिण कोरियाई की ज़मीन पर पैर रखा, यही नहीं वो दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति को भी उत्तर कोरिया की सीमा में ले गए और फोटोग्राफरों को उस ऐतिहासिक लम्हे को कैमरे में क़ैद

अपने अच्छी मंशा जाहिर करते हुए उत्तर कोरिया ने अमरीका के तीन नागरिकों को भी रिहा कर दिया था. साथ ही गुरुवार को पंग्गी-री टेस्ट सेंटर में अपने परमाणु परीक्षण केंद्र को नष्ट कर दिया था.

चीन जाने के बाद भी, किम और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन ने 27 अप्रैल को शिखर सम्मेलन किया जिसमें उन्होंने उत्तर कोरिया के "पूर्ण रूप से परमाणु हथियार खत्म करने" की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्धता जताई थी.

इसके बाद वो होने वाला था जिसकी कुछ महीनों पहले किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. डोनल्ड ट्रंप और किम जोंग उन की मुलाक़ात के लिए पहल हुई और ये मुलाक़ात सिंगापुर में 12 जून को होने वाली थी. दोनों नेताओं में मुलाक़ात का उत्साह दिखने लगा.

लेकिन, जब सबकुछ अच्छा और सकारात्मक नजर आ रहा था तभी स्थितियां फिर से पलट गईं और डोनल्ड ट्रंप ने किम जोंग उन से मुलाकात करने से इनकार कर दिया. ट्रंप ने कहा है कि इस समय इस बैठक का होना उचित नहीं है.

दोस्ती के इस रास्ते पर अचानक यू-टर्न क्यों आया. आखिरी सबकुछ एकदम से कैसे बदल गया.

1. पहली असहमति

दोस्ती की संभावनाओं में पहली दरार 6 मई को उत्तर कोरिया की उस चेतावनी से आई जो उसने अमरीका के ख़िलाफ़ जारी की थी.

उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि अमरीका यह कहकर उत्तर कोरिया को भड़का रहा है कि जब तक उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियारों को खत्म नहीं करता तब तक उस पर लगे प्रतिबंध नहीं हटाए जाएंगे.

ट्रंप ने तब ज़ोर देकर कहा था कि अमरीका उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध और दबाव बनाए रखेगा.

उत्तर कोरियाई प्रवक्ता ने भी कहा था कि अमरीका को उत्तर कोरिया के शांत व्यवहार को "कमजोरी कहकर गलत व्याख्या नहीं करना चाहिए". उन्होंने चेतावनी दी कि अमरीका के "दबाव और सैन्य धमकियों" के साथ इसे जारी रखना "अनुकूल नहीं होगा".

2. सैन्य अभ्यास

अमरीका और उत्तर कोरिया ने 11 मई को संयुक्त सैन्य अ​भ्यास किया था जिसमें एफ-22 स्टील्थ फाइटर्स, एफ-15 के और एफ-16 फाइटर्स समेत 100 एयरक्राफ्ट इस्तेमाल किये गये थे.

युद्धाभ्यास का ये तरीका उत्तर कोरियाई सरकार को पसंद नहीं आया.

तब उत्तर कोरिया ने अचानक ही दक्षिण कोरिया के साथ उच्च-स्तरीय वार्ता को रद्द कर दिया.

3. लीबिया को लेकर बयान

अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन के एक बयान के बाद उत्तर कोरिया ने पहली बार चेतावनी दी थी कि ट्रंप के साथ मुलाकात खतरे में है.

बोल्टन ने कहा था कि उत्तर कोरिया लीबिया का परमाणु निरस्त्रीकरण मॉडल अपनाएगा. हालांकि, बाद में उन्होंने इसमें बदलाव करते हुए कहा था, ''ये लीबिया के जैसा नहीं होगा लेकिन इसे ठोस और वास्तविक होने की जरूरत है.''

इसके बाद अमरीकी उप राष्ट्रपति माइक पेंस ने भी कहा था कि अगर उत्तर कोरिया अमरीका के साथ परमाणु समझौते पर नहीं पहुंचा तो वह लीबिया की तरह खत्म हो जाएगा.

इसके बाद उत्तर कोरियाई अधिकारी चो सोन हुई ने अमरीकी उप राष्ट्रपति माइक पेंस के बयान को बकवास कहते हुए ख़ारिज कर दिया था.

लीबियाई नेता मुआमार गद्दाफ़ी साल 2011 में परमाणु हथियारों को ख़त्म करने के बाद विद्रोहियों द्वारा मार दिए गए थे.

उत्तर कोरियाई अधिकारी चो पिछले दशक में अमरीका के साथ कई कूटनीतिक वार्ताओं में शामिल रहे हैं.

उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया वार्ता के लिए अमरीका के सामने ''गिड़गिड़ाएगा'' नहीं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कूटनीति नाकाम होती है तो परमाणु क्षमता दिखाई जाएगी.

4. बैठक रद्द करने का तरीका

अमरीका ने जिस तरह से उत्तर कोरिया से बैठक रद्द की वो तरीका भी सख्त था. किम जोंग उन के नाम एक खुला खत लिखकर इसकी जानकारी दी गई.

ट्रंप ने अपने पत्र में लिखा था, ''सिंगापुर सम्मेलन दोनों पक्षों के लिए अच्छा है लेकिन दुनिया के नुकसान के कारण ये नहीं होगा.''

खत जारी करने के बाद ट्रंप ने कहा कि अगर उत्तर कोरिया इसके बाद कोई 'मूर्खतापूर्ण कदम' उठाता है तो अमरीका और सहयोगी देश साथ आएंगे.

हालांकि, ट्रंप ने कहा कि वह किम जोंग उन से मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. उन्होंने कहा था कि उम्मीद है कि उत्तर कोरिया का सकारात्मक भविष्य होगा. अगर ऐसा नहीं होता है तो हम पहले से कहीं ज्यादा तैयार हैं.''

ये भी पढ़ें:

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)