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क्या ट्रंप को मिलेगा शांति का नोबेल पुरस्कार?
नोबेल शांति पुरस्कार की बात करें तो लोगों को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटा जा सकता है.
एक तरफ़ वो लोग हैं जिन्हें उनके काम के लिए शांति पुरस्कार से नवाज़ा गया. इनमें मार्टिन लूथर किंग, मदर टेरेसा और नेल्सन मंडेला जैसी हस्तियां शामिल हैं.
दूसरे हिस्से में वे लोग आते हैं जिन्हें ये सम्मान मिलना चाहिए था, लेकिन उन्हें ये सम्मान नहीं मिल सका.
ऐसे लोगों में महात्मा गांधी का नाम शामिल है जिन्हें बीती शताब्दी में शांति का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है.
इसके बाद वह लोग आते हैं जिन्हें शायद एक दिन नोबेल कमेटी की ओर से शांति पुरस्कार मिल सकता है. ऐसे लोगों में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप आते हैं.
ट्रंप के नाम का औपचारिक नामांकन
रिपब्लिकन पार्टी की ओर से 18 कांग्रेस सदस्यों ने नॉर्वे की नोबेल कमेटी की अध्यक्ष को इस बारे में ख़त लिखा है.
इसमें कांग्रेस सदस्यों ने कोरियाई प्रायद्वीप के देशों को परमाणु हथियार छोड़ने के लिए सहमत करके क्षेत्र में शांति लाने से जुड़े कामों का हवाला देते हुए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया है.
इन कांग्रेस सदस्यों में शामिल स्टीव किंग कहते हैं, "जब मुझे पता चला कि राष्ट्रपति ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन से कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु हथियारों के नि:शस्त्रीकरण को लेकर बातचीत करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, तब मेरे मन में ये विचार आया."
वो कहते हैं, "मैंने सोचा कि ओबामा को नोबेल का शांति पुरस्कार मिला था और हमें आज भी पता नहीं है कि ऐसा क्यों हुआ. वह बस अमरीका के चुने हुए राष्ट्रपति थे. तब कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु हथियारों को छोड़े जाने की स्थिति बनने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप इसके लिए ज़्यादा काबिल होने चाहिए."
ऐसे में क्या नस्लवाद और बहुल्यवाद को नुकसान पहुंचाने जैसे मुद्दों पर आलोचना का सामना करने वाले ट्रंप जैसे राजनेता को शांति का सबसे बड़ा पुरस्कार मिल सकता है.
क्या ट्रंप को मिल सकता है शांति पुरस्कार
बीते कई महीनों से ट्रंप को शांति पुरस्कार के लिए नामित किए जाने की चर्चा चल रही है.
मार्च में नॉर्वे स्थित नोबेल समिति ने बताया था कि किसी अनजान व्यक्ति ने अजीब-सी वजह के लिए ट्रंप का नाम आगे बढ़ाया था.
इसके बाद अगले महीने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन ने भी कहा कि ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए.
लेकिन ट्रंप की ही पार्टी के 18 कांग्रेस सदस्यों द्वारा उनके नाम को औपचारिक रूप से नोबेल कमेटी को भेजे जाने के बाद से चर्चाओं का बाज़ार गर्म हो गया है.
जब ट्रंप से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "सभी को ऐसा लगता है, लेकिन मैं ऐसा कभी नहीं कहूंगा. मैं जो पुरस्कार चाहूंगा वो ये होगा कि विश्व की जीत हो"
लेकिन अगर ट्रंप के समर्थकों की बात करें तो कुछ दिन पहले मिशीगन में आयोजित हुए ट्रंप के एक सामाजिक कार्यक्रम में 'नोबेल-नोबेल' की आवाज़ें सुनाई दीं.
'पीस' नाम की एक किताब लिखने वाले जे नॉर्डलिंगर कहते हैं कि दुनिया में सबसे ज़्यादा विवादित और चर्चित नोबेल पीस प्राइज़ अगर ट्रंप जैसे विवादित व्यक्ति को दिया जाए तो ये बेहद अजीब बात होगी.
वह आगे बताते हैं, "लेकिन ये शांति पुरस्कार साल 1902 में शुरू होने के बाद से ही विवाद का विषय रहा है."
इस पुरस्कार को पाने वालों में पूर्व अमरीकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंगर और पूर्व फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात भी रहे हैं.
'किम जोंग-उन के साथ मिले ये पुरस्कार'
कुछ अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक मानते हैं कि उत्तर कोरिया के साथ शांति के लिए अमरीका से ज़्यादा श्रेय दक्षिण कोरिया को मिलना चाहिए.
यही नहीं, वे मानते हैं कि दक्षिण कोरियाई लोगों ने रणनीतिक रूप से कदम उठाए जिससे अमरीकी सरकार बातचीत के लिए तैयार हो सकी क्योंकि बीते अगस्त में जब ट्रंप ने कहा था कि अगर उत्तर कोरिया ने अमरीका को धमकाया तो वह ज़ोरदार कार्रवाई करेगा. इसके बाद से चिंता का माहौल देखा जा रहा था.
ट्रंप ने तीन अमरीकी नागरिकों की रिहाई के बाद कहा है कि उनकी और किम जोंग-उन की मुलाकात सिंगापुर में 12 जून को होगी.
लेकिन यहां से उत्तर कोरियाई नेता को अपने परमाणु हथियारों को ख़त्म करने के लिए तैयार करना एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है.
और अगर ऐसा हो भी जाता है तब भी ये बहस का मुद्दा रहेगा कि क्या ट्रंप को ये पुरस्कार दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन और किम जोंग-उन के साथ नहीं मिलना चाहिए जिनकी सरकार मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए चर्चित है.
और पुरुस्कार लेने से पहले ट्रंप का अपना इतिहास कितना मायने रखेगा.
बीते गुरुवार को अमरीकी कॉमेडियन सेथ मेयर्स ने एनबीसी टेलीविज़न के लेट नाइट कार्यक्रम में कहा, "ये वही व्यक्ति है जो मुस्लिमों पर रोक लगाना चाहता था, और कहा था कि आतंकवादियों के परिवारों को ख़त्म कर देना चाहिए और कहा था कि वो चाहते हैं कि अफ्रीका और हेती से आने वाले प्रवासियों की संख्या कम हो."
ओबामा को क्यों मिला था नोबेल
जब ओबामा को नोबेल पीस प्राइज़ मिला तो उनके कार्यकाल को सिर्फ नौ महीने हुए थे और उन्हें "लोगों के बीच अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सहयोग को मज़बूत करने के उनके असाधारण प्रयासों" ये पुरस्कार दिया गया था.
लेकिन ट्रंप पर ठीक इसके विपरीत काम करने का आरोप लगाया जाता है.
जनमत सर्वेक्षण के मुताबिक़, ट्रंप के राष्ट्रपति पद ग्रहण करने के एक साल बाद अमरीका की छवि दुनियाभर में कमज़ोर हुई है.
ट्रंप ने अमरीका को पेरिस जलवायु समझौते से बाहर कर लिया. इसके साथ ही इस हफ़्ते ईरान परमाणु समझौते से भी अमरीका को बाहर निकाल लिया जबकि ओबामा ने जर्मनी, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस के साथ इस डील को मूर्त रूप दिया था.
लेकिन रिपब्लिक पार्टी के कांग्रेस सदस्य पेट ओल्सन जिन्होंने ट्रंप को नोबेल के लिए नामित करने वाले पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, ये नहीं मानते कि ईरान परमाणु डील से बाहर होने की वजह से ट्रंप की उम्मीदवारी पर कोई असर पड़ेगा क्योंकि हर राष्ट्रपति वैश्विक संकटों के प्रति अलग प्रतिक्रिया देता है.
ओल्सन ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "ये याद किया जाना चाहिए कि इस पुरस्कार को पाने वाले अमरीका के पहले राष्ट्रपति थ्योडोर रूज़वेल्ट ने ये पुरस्कार संघर्ष में समझौता कराकर शांति कायम करके हासिल किया था जबकि उन्होंने फिलीपींस में एक बेहद ही विवादित युद्ध छेड़ा था.''
वहीं, नॉरडिंगर मानते हैं कि 'ईरान परमाणु डील' से बाहर निकलने से ट्रंप की उम्मीदवारी पर असर पड़ सकता है. लेकिन वह चेतावनी देते हुए कहते हैं कि पीस प्राइज़ लोगों को उनके ख़ास कामों के लिए दिया जाता है और इस पर उनके दूसरे कामों का असर नहीं पड़ता है.
वह कहते हैं, "इस बारे में बहुत विवाद होगा, लेकिन अगर कोरियाई प्रायद्वीप में किसी तरह की शांति या परमाणु निरशस्त्रीकरण हो जाता है तो ये संभव है कि ट्रंप का नाम नोबेल शांति पुरस्कार पाने वालों में शामिल कर लिया जाए."
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