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वियतनाम- बीपीओ जगत की उभरती नई ताक़त
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वियतनाम से लौट कर
वियतनाम बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग या बीपीओ जगत का एक तेज़ी से उभरता देश है. भारत अब भी इस उद्योग में दुनिया का सबसे बड़ा देश है. चीन दूसरे नंबर पर है और फिलीपीन्स तीसरे स्थान पर.
लेकिन वियतनाम की गिनती अब बीपीओ उद्योग के 10 बड़े देशों में होती है.
बीपीओ है क्या? पैसों की बचत के लिए बड़े और महंगे देशों की कंपनियां अपने बैक ऑफिस के काम को सस्ते देशों में भेजती हैं. इनमें दस्तावेज़, डेटा और कॉल सेंटर ख़ास काम हैं. सस्ते देशों में दिहाड़ी और वेतन कम होने के कारण बड़ी कंपनियां अपने इन कामों को इन देशों को भेजती हैं. इस प्रक्रिया को बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग कहते हैं.
पूरी दुनिया की बात करें तो ये उद्योग या व्यापार 280 अरब डॉलर का है. अमरीका ऐसे कामों को सस्ते देशों में भेजने वाला सबसे बड़ा देश है. अमरीका का 65 प्रतिशत काम भारत को भेजा जाता है.
भारत में, 2015 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, ये उद्योग 30 अरब डॉलर सालाना का है. चीन में 24 अरब डॉलर का और वियतनाम में ये उद्योग 2 अरब डॉलर पर टिका है.
इस तरह वियतनाम भारत से काफ़ी पीछे है. लेकिन दो कारणों से सब की निगाहें वियतनाम पर केंद्रित हैं. एक तो ये कि यहाँ इस उद्योग की विकास दर 20 प्रतिशत सालाना है और दूसरा ये कि इस देश ने अपना अलग रास्ता चुना और अलग मार्किट भी.
हम इस उद्योग की प्रगति देखने वियतनाम की सबसे बड़ी बीपीओ कंपनी डिजी टेक्स के दफ्तर गए. बेंगलुरू में हम ने इस तरह के काफी दफ़्तर देखे हैं.
मुझे लगा ये दफ्तर बेंगलुरु में भी हो सकता था. वही माहौल, वही उत्साह और वही युवा एनर्जी.
कंपनी के मालिक फ्रैंक शेलेनबर्ग जर्मनी के हैं. उन्होंने ये कंपनी 2002 में खोली.
वो कहते हैं, "कंपनी खोलने से पहले मैंने भारत और कई अन्य देशों का दौरा किया. हमें लगा भारत वॉइस यानी कॉल सेंटर में काफ़ी प्रगतिशील है और यहाँ के युवा अंग्रेज़ी में महारत रखते हैं. हमने सोचा हम भारत से मुक़ाबला नहीं कर सकते."
"इसलिए हमने फोकस किया ग़ैर अंग्रेज़ी भाषा वाले दस्तावेज़ों पर. क्यूंकि मैं जर्मनी से हूँ तो मैंने जर्मन भाषा वाली कंपनियों से काम हासिल किया."
बीपीओ का बड़ा केंद्र
लेकिन फ्रैंक के वियतनाम आने का कारण क्या था?
इस पर वो कहते हैं, "वियतनाम में वेतन बहुत कम है. चीन और भारत से भी कम. दूसरा ये कि सरकार ने कई तरह की छूट देने का एलान किया था. काम नया था. यहां ये उद्योग शुरू नहीं हुआ था. इसलिए यहां आ गये."
वियतनाम का बीपीओ उद्योग भारत से अलग है. भारत में वॉइस का काम अधिक है जबकि वियतनाम में दस्तावेज़ों का अधिक.
फ्रैंक कहते हैं, "अब वियतनाम दस्तावेज़ों के बीपीओ का एक बड़ा केंद्र बन गया है. इस उद्योग में आज 20 से 30 हज़ार लोग काम करते हैं."
बैक ऑफ़िस के लिए क्यों पसंदीदा बना वियतनाम?
बीपीओ उद्योग में भारत दुनिया का सबसे पसंदीदा देश जिन कारणों से है वो कारण वियतनाम में भी मौजूद हैं.
भारत की तरह यहाँ भी युवाओं की आबादी अधिक है. सियासी स्थिरता है, सरकार हर तरह से इस उद्योग को बढ़ाने में निजी कंपनियों की मदद कर रही है. वेतन भारत से भी कम हैं और बुनियादी ढाँचे की बात करें तो ये भारत से भी बेहतर है.
भारत के बीपीओ उद्योग में वियतनाम के तेज़ी से बढ़ते क़दमों की आवाज़ें साफ़ सुनाई देने लगी है.
लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं बल्कि भारत वियतनाम की मदद कर सकता है.
हो ची मिन्ह सिटी में काम करने वाले भारतीय व्यापारी सुभाष कुमार कहते हैं, "बीपीओ में भारत वियतनाम से काफ़ी आगे है. इस व्यापार में दोनों देशों के बीच कोई मुक़ाबला नहीं है. दोनों पक्ष मिलकर काम कर सकते हैं."