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वियतनाम के हिंदू मिटने की कगार पर!
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वियतनाम से लौटकर
पिछले दिनों मैं हिंदू धर्म को उसके मूल रूप में देखने मध्य वियतनाम पहुंचा. यहाँ पहुँचने पर मुझे एहसास हुआ कि कुछ पारंपरिक चीज़ें बरक़रार हैं, लेकिन बहुत कुछ बदल गया है. कुछ रह गया है लेकिन बहुत कुछ खो चुका है.
चंपा समुदाय 2000 साल के इतिहास के साथ अब भी बचा है, लेकिन यहाँ हिंदू धर्म ख़त्म होने की कगार पर है.
चंपा क्षेत्र प्राचीन काल में हिंदू राज्य और हिंदू धर्म का गढ़ था. चंपा के कुछ बचे पुराने मंदिर इस बात के गवाह हैं कि कभी यहाँ हिंदू धर्म का बोल बाला था.
यहाँ के स्थानीय समुदाय चम का शासन दूसरी शताब्दी से 18वीं शताब्दी तक चला. चम समुदाय में ज़्यादा आबादी हिंदू की थी. बाद में उनमें से कई ने बौद्ध और इस्लाम धर्म को अपना लिया.
आज यहाँ का हिंदू समाज सिमट-सा गया है. उन्हें ढूंढ़ने हम उनके मी न्गेप गांव पहुंचे.
सदियों से बसे हिंदू
गांव काफ़ी छोटा था और हाइवे से कुछ किलोमीटर अंदर. दोपहर का समय था और सूरज सर पर. एक घर के बाहर खड़ा सर पर एक कपड़ा बांधे, कुरता धारी युवा इनरा जाका फ़ोन पर किसी से बात कर रहा था. रसोई घर में खाना बन रहा था. उसकी भाषा विएतनामी भाषा से अलग थी. बात ख़त्म करने के बाद उसने हमारा स्वागत किया और कहा वो चम भाषा में अपने पिता से बात कर रहा था.
घर के बाहर खाने के मेज़ लगे थे. द्वार पर एक-दो मूर्तियां लगी थीं. इनरा जाका और उसके पिता इनरा सारा हिंदू धर्म के मानने वाले थे जिनके पूर्वज सदियों से इस क्षेत्र में रहते चले आ रहे थे.
बाप-बेटे की इस जोड़ी का मिशन न केवल हिंदू धर्म को बाहर के असर से बचाना और चम संस्कृति को ज़िंदा रखना है बल्कि इस प्रक्रिया में चम समुदाय के खोए साहित्य और कला की खोज भी है
इनरा सारा चम भाषा के कवि भी हैं और उपन्यासकार भी. उन्होंने बड़ी मेहनत से चम साहित्य के पुराने कवियों की खोज की है और उनकी कवितायें छापी हैं. वो कहते हैं कि बचपन से उन्होंने अपने समुदाय के स्वर्णिम काल के बारे में सुना है जिसमें कुछ हक़ीक़त है और कुछ फ़साना.
"मेरे बचपन के शिक्षकों और रिश्तेदारों ने मुझे कई मिथकों और साधारण जीवन के बारे में बताया है. जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ, मेरी यादें दो दुनिया - मिथकों की दुनिया और तथ्यों की दुनिया - के बीच समानांतर में परवान चढ़ीं."
हिंदू धर्म के संरक्षण की कोशिश
पिता अगर चम समुदाय के साहित्य को दोबारा ज़िंदा करने में जुटे हैं तो पुत्र हिंदू धर्म को बचाने में. वो इस कोशिश में चार बार भारत का दौरा कर चुके हैं और एक बार विश्व हिंदू सम्मलेन में भाग भी ले चुके हैं. बेटे इनरा जाका कहते हैं, "भारत से प्रेरणा लेकर यहाँ हिंदू धर्म के बारे में लोगों को बताने की कोशिश करता हूं, लेकिन यहाँ का हिंदू धर्म भारत से बिल्कुल अलग है."
इनरा जाका से हमने पूछा कि हिंदू धर्म की कौन-सी पुरानी परम्परा और रीति-रिवाज उनके समाज में अब भी बाक़ी है? उन्होंने कहा, "ज़्यादातर हमने अपने माता-पिता और दादा-दादी से सुना है कि हम चट्टानों की पूजा करते थे. चट्टानों के लिंग के आकार की पूजा. हम आज भी शिव के भक्त हैं. हमारे मंदिर भी शिव मंदिर हैं."
आज चम समुदाय की आबादी 170,000 है जो तीन प्रांतों में फैले हैं जिनमें हिंदुओं की आबादी 100,000 से ऊपर है. चंपा क्षेत्र में मंदिर सिर्फ़ चार हैं जिनमें से दो में आज भी पूजा होती है. यहाँ हिंदू धर्म मिटने के क़रीब है. इनरा जाका से हमने पूछा कि आपने रामायण, भगवत गीता या महाभारत पढ़ी है?
वो कहते हैं, "हमारे समुदाय में अब ये धार्मिक पुस्तकें नहीं रहीं. तो आप कह सकते हैं कि उन्हें हम पहले ही खो चुके हैं. हमारे पुजारियों के पास भी ये किताबें नहीं हैं".
लेकिन युवा इनरा आगे कहते हैं, "हमारे समुदाय की युवा पीढ़ी हिंदू धर्म के वजूद से अधिक परिचित नहीं है"
वियतनामी हिंदुओं के पूर्वज
एक ज़माने में हो ची मिन्ह जैसे वियतनाम के दक्षिणी शहरों में भी काफ़ी हिंदू आबाद थे. अब भी हैं, कुछ पुराने, कुछ मिली-जुली नस्ल वाले लोग इस शहर में रहते हैं. अठारहवीं शताब्दी में बने इस मंदिर की देखभाल करने वाले मुतैय्या आधे भारतीय और आधे वियतनामी हैं. उनके पूर्वज तमिलनाडु से आकर यहीं बस गए थे और शादी भी यहीं की. हिंदू धर्म से ये अब भी जुड़े हैं.
मुतैय्या कहते हैं, "मेरे पिता ने सिखाया कि कैसे भगवान की पूजा करें. श्लोक भी याद कराया. मुझे मंदिर के बारे में सब कुछ पता है."
इस शहर में दो और भी मंदिर हैं जहाँ भारत से आए लोग पूजा करने जाते हैं. इनमे से कई ने चम हिंदुओं के बारे में सुन रखा है, लेकिन पर्यटक के रूप में चम समुदाय अपने धर्म और अपनी संस्कृति को बचाने की कोशिश में जुटा है. यहाँ के मंदिरों के खंडर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गए हैं.