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मोदी बयान देते हैं, उनकी पार्टी के लोग हिंसा भड़काते हैं: अमरीकी एजेंसी
अमरीका की संस्था यूनाइटेड स्टेट कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजिस फ्रीडम (यूएससीआइआरएफ़) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की हालत में लगातार गिरावट आ रही है.
यह रिपोर्ट इसलिए अहम है क्योंकि यूएससीआइआरएफ़ एक संवैधानिक संस्था है जिसका गठन 1998 में इंटरनेशनल रिलिजस फ्रीडम एक्ट के तहत किया गया था. इस संस्था का काम अमरीकी सरकार को परामर्श देना है.
2018 की रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति नरेंद्र मोदी सरकार के रवैए पर पाँच पन्ने का विवरण है जिसमें कहा गया है कि "भारत का बहुधार्मिक, बहुसांस्कृतिक चरित्र ख़तरे में है क्योंकि एक धर्म के आधार पर आक्रामक तरीक़े से राष्ट्रीय पहचान बनाने की कोशिश हो रही है."
अफ़ग़ानिस्तान की कतार में भारत
उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक को रिपोर्ट में उन 10 राज्यों में रखा गया है जहाँ धार्मिक स्वतंत्रता ख़तरे में है, बाक़ी 19 राज्यों के बारे में कहा गया है कि वहाँ धार्मिक अल्पसंख्यक स्वतंत्र हैं.
यूएससीआइआरएफ़ ने इस साल 12 देशों को टियर-2 में रखा है जिन्हें 'कंट्रीज़ ऑफ़ पर्टिकुलर कन्सर्न' या सीपीसी कहा जाता है, यानी ऐसे देश जिनकी हालत ख़ास तौर पर चिंताजनक है. ये देश हैं-- अफ़ग़ानिस्तान, अज़रबैजान, बहरीन, क्यूबा, मिस्र, भारत, इंडोनेशिया, इराक़, कज़ाकस्तान, लाओस, मलेशिया और तुर्की.
रिपोर्ट में कहा गया है, "प्रधानमंत्री हिंसा की निंदा तो करते हैं लेकिन उनकी ही पार्टी के लोग अतिवादी हिंदू संगठनों से जुड़े हुए हैं और उनमें से कई लोग धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए भेदभाव से भरी भाषा का इस्तेमाल करते हैं. भारत सरकार के अपने आँकड़े बताते हैं कि सांप्रदायिक हिंसा बढ़ रही है लेकिन मोदी प्रशासन ने इसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया है."
सिर्फ़ आलोचना ही नहीं की गई है
सांप्रदायिक हिंसा के पीड़ितों को न्याय न मिलने का भी ज़िक्र किया गया है, कहा गया है कि "मोदी प्रशासन ने अतीत में बड़े पैमाने पर हुई सांप्रदायिक हिंसा के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए ज्यादा कुछ नहीं किया है, इनमें से कई हिंसक घटनाएँ उनकी (मोदी की) पार्टी के लोगों को उत्तेजनापूर्ण भाषणों की वजह से हुई."
इस रिपोर्ट में गोहत्या से जुड़ी हिंसा, ईसाई धर्म प्रचारकों पर दबाव और उनके ख़िलाफ़ हिंसा, विदेशी फंडिंग से चलने वाले एनजीओ के कामकाज को रोकना, धर्म परिवर्तन विरोधी क़ानून पर भी चिंता प्रकट की गई है.
लेकिन ऐसा नहीं है कि इस रिपोर्ट में भारत की सिर्फ़ आलोचना ही की गई है, यूएससीआइआरएफ़ की रिपोर्ट कहती है कि भारत में एक स्वतंत्र न्यायपालिका है जिसने कई मामलों में सार्थक हस्तक्षेप किया है, मिसाल के तौर पर हदिया मामले का ज़िक्र है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया था कि 'शादी का निर्णय करने का निजी अधिकार हर वयस्क नागरिक को है.'
इस रिपोर्ट में अमरीकी सरकार से दस सिफ़ारिेशें की गई हैं, जिनमें भारत के साथ होने वाले बातचीत में इन मुद्दों को उठाना और भारत पर मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति में सुधार के लिए दबाव बनाना शामिल है.
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