सीरिया को लेकर अमरीका के साथ युद्ध के हालात बन सकते हैं: रूस

संयुक्त राष्ट्र के लिए रूसी दूत वसिली नेबेन्ज़िया ने चेतावनी दी है कि अगर अमरीका सीरिया पर हमला करता है तो इससे रूस और अमरीका के बीच युद्ध के हालात बन सकते हैं. उन्होंने कहा कि वो किसी भी तरह की संभावना से इनकार नहीं करते.

नेबेन्ज़िया ने अमरीका और उसके मित्र देशों पर आरोप लगाया कि वो अपनी आक्रामक नीतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय शांति को ख़तरे में डाल रहे हैं. उन्होंने मौजूदा स्थिति को 'बहुत ख़तरनाक' बताया.

आने वाले कुछ घंटों में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे से बात कर सकते हैं और विद्रोही गुट के कब्ज़े वाले इलाके में हुए केमिकल हमले का जवाब किस तरह देना है इस पर चर्चा कर सकते हैं.

इधर व्हाइट हाउस ने कहा है कि फिलहाल सैन्य कार्यवाई के बारे में कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है.

मैक्रों के पास हैं सीरिया पर 'रसायनिक हमले के सबूत'

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि उनके पास इस बात के 'सबूत' हैं कि सीरियाई सरकार ने बीते सप्ताह डूमा शहर पर हमला किया था और केमिकल हथियारों का इस्तेमाल किया था.

उन्होंने कहा कि 'वो वक्त आने पर फ़ैसला करेंगे कि हवाई हमलों से इसका जवाब दिया जाना चाहिए या नहीं.

मीडिया में आ रही रिपोर्टों के अनुसार अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि डूमा में पीड़ितों के ख़ून और मूत्र के जो नमूने लिए गए थे उनमें क्लोरीन और एक नर्व एजेंट पाया गया है.

माना जा रहा है कि पश्चिमी देश इस हमले के ख़िलाफ़ मिसाइल हमले की तैयारी कर रहे हैं.

रूस ऐसे किसी कदम का विरोध कर रहा है. रूसी सरकार के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव पहले ही कह चुके हैं, "कोई भी कदम मौजूदा तनाव को बढ़ा सकता है."

ट्रंप की चेतावनी

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 11 अप्रैल को चेतावनी दी थी कि "रूस अपने दोस्त सीरिया पर मिसाइल हमले के लिए तैयार रहे."

इसके चौबीस घंटे बाद उन्होंने ट्वीट किया, "मैंने कभी नहीं कहा कि वो सीरिया पर कब हमला करेंगे. हो सकता है जल्द या फिर कभी भी नहीं! कुछ भी हो मेरे प्रशासन में अमरीका ने उस इलाके से इस्लामिक स्टेट को खदेड़ने के लिए बेहतरीन काम किया है. किसी ने हमें इसके लिए धन्यवाद नहीं कहा."

अमरीकी राष्ट्रपति ने इससे पहले लैटिन अमरीका के अपने दौरे को भी रद्द कर दिया था ताकि वो रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस के साथ रह सकें और सीरिया के मुद्दे पर ध्यान दे सकें. वो फ्रांस और ब्रिटेन के नेताओं के साथ मिल कर हमलों के बारे में चर्चा भी कर रहे थे.

गुरुवार को अमरीकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस के एक पैनल को बताया था कि, "मुझे लगता है कि वहां केमिकल हमला हुआ था और हम इसके सबूत तलाश रहे हैं."

नेटो के सेक्रेटरी जनरल जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने कहा, "हम कड़े शब्दों में केमिकल हथियारों के इस्कतेमाल की निंदा करते हैं. जो हमला हुआ है वो भयावह है."

इस पूरे मामले पर ब्रिटेन की कैबिनेट की एक अहम बैठक में फ़ैसला लिया गया है कि "इस मुद्दे पर कार्यवाई की जानी चाहिए".

क्या मैक्रों ने सबूत पेश किए?

फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने इससे पहले कहा था कि सीरियाई सरकार के 'रसायनिक हथियार बनाने की काबीलियत' को निशाना बनाया जा सकता है.

मैक्रों ने जानकारी किस सूत्र से मिली है ये नहीं बताया, लेकिन कहा कि, "हमारे पास सबूत हैं कि बीते सप्ताह हुए हमले में केमिकल हथियारों का इस्तेमाल हुआ था, बशर अल-असद सरकार ने कम से कम क्लोरीन का इस्तेमाल तो किया ही है."

टेलीविज़न को दिए एक इंटरव्यू में उनसे सीरिया पर हमला करने के बारे में उनकी राय के बारे में पूछा गया. इसके उत्तर में उन्होंने कहा, "जब वक्त आएगा और ये फायदेमंद और कारगर होगा, हम ये फ़ैसला लेंगे."

"ऐसी सत्ता जिन्हें लगता है कि वो जो चाहते हैं वो कर सकते हैं और जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लघंन कर सकते हैं, उन्हें सत्ता में रहना नहीं चाहिए."

वादा निभाने की चुनौती

पेरिस में मौजूद बीबीसी संवाददाता लूसी विलियमसन कहती हैं, "एक साल पहले फ्रांस के वर्साय में नए चुने गए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने घोषणा की थी कि अगर सीरिया में कभी केमिकल हथियारों का इस्तेमाल हुआ तो वो फ्रांस के लिए "ख़तरे की लकीर के समान होगा" और फ्रांस "इसका तुरंत जवाब ज़रूर देगा". इस दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लदिमीर पुतिन भी वहीं मौजूद थे.

"अब मैक्रों के सामने चुनौती है कि उन्होंने जो कहा वो कर के दिखाएं."

"बीते साल एक अख़बार को दिए इंटरव्यू में मैक्रों ने कहा था कि अगर आप अपने लिए ख़तरे की लकीरें बनाते हैं तो आपको सुनिश्चित करना चाहिए कि ये लांघी न जाएं. आपको इसके ख़िलाफ़ कदम उठाने पड़ते हैं. ऐसा ना करने पर अपको कमज़ोर मान लिया जाता है."

सीरिया के डूमा में क्या हुआ?

सीरिया में राहत और बचावकर्मियों और डॉक्टरों ने दावा किया कि डूमा शहर में बीते शनिवार हवाई हमला हुआ और जो बम यहां गिराए गए उनमें ज़हरीली गैस भरी हुई थी. इस कारण यहां दर्जनों लोगों की मौत हुई है.

सीरिया की असद सरकार ने हमले के पीछे अपना हाथ होने की ख़बरों से इनकार किया है.

केमिकल हथियारों के इस्तेमाल के ख़िलाफ़ काम करने वाला अंतरराष्ट्रीय संगठन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ केमिकल वीपन्स, डूमा में अपने जांच दल को भेज रहा है. लेकिन हमले के कई दिनों बाद वहां अब इसके कितने सबूत मिलेंगे.

दमिश्क के नज़दीक डूमा विद्रोही लड़ाकों का आख़िरी गढ़ है. स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि रूस और विद्रोहियों के बीच समझौता हुआ है जिसके बाद विद्रोही नेता पहले ही इलाका छोड़ चुके हैं.

रूस का दावा है कि सीरियाई सेना ने शहर पर कब्ज़ा कर लिया है. हालांकि स्वतंत्र रूप से अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है.

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