‘बेहद मज़ाकिया’ लेकिन ‘अजीब’ हैं मार्क ज़करबर्ग

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एक दिन दो पर्यटक कैलिफ़ोर्निया में फ़ेसबुक के ऑफ़िस घूमने पहुंचे, तभी फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क ज़करबर्ग को देखकर वो उनकी तरफ भागे.
मार्क से उन्होंने पूछा, "क्या आप फ़ेसबुक लोगो के साथ हमारी एक तस्वीर खींच सकते हैं?"
वो मुस्कराए, कपल की तस्वीर खींची और अपनी गाड़ी में बैठकर रवाना हो गए.
कौन जाने उन पर्यटकों को एक दिन एहसास हुआ हो कि उन्होंने उस शख़्स के साथ तस्वीर लेने का मौका गवां दिया जो आज दुनिया के सबसे प्रभावशाली और युवा दौलतमंद लोगों में से एक है.
ये किस्सा फ़ेसबुक के संस्थापक ने कुछ सालों पहले सुनाया था. ये किस्सा उनकी शख़्सियत के एक पहलु को दिखाता है कि ज़करबर्ग एक ऐसे युवा है जिन्होंने कभी लोगों का ध्यान अपनी और ज्यादा खींचने की कोशिश नहीं की.
"वो एक निंजा की तरह है," ये बात फ़ेसबुक मुख्यालय का दौरा करने पहुंची बीबीसी की टीम से वहां की एक रिसेप्शनिस्ट ने कही. अक्सर ये होता है कि ज़करबर्ग के नज़दीक से गुज़रने वाले लोग उन्हें पहचान नहीं पाते.
इस हफ्ते ज़करबर्ग ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा और ये सोशल नेटवर्क पर उनकी सफलता के चलते नहीं, बल्कि नाकामी के चलते हुआ.

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एक राजनैतिक कंसल्टेंट कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका ने 87 मीलियन फेसबुक यूज़र्स के डेटा का ग़लत इस्तेमाल किया. यूजर्स के डेटा का इस्तेमाल कथित तौर पर 2016 में अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव में डोनल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान के लिए किया गया.
मार्क ज़करबर्ग दो दिन अमरीकी संसद के सदस्यों के सामने पेश हुए और अपनी कंपनी और यहां तक की खुद के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब दिए.
लेकिन उनके बारे में दुनिया क्या जानती है? कैसे वो वास्तव में दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक हैं?
एक रोबोट?
फ़ेसबुक के संस्थापक के बारे में जो बात शायद सबको पता होगी वो ये है कि उन्होंने फ़ेसबुक जैसा अद्भुत सोशल नेटवर्क कहां बनाया था: उन्होंने इसे प्रतिष्ठित हार्वर्ड विश्वविद्यालय में छात्र जीवन के दौरान अपने बेडरूम में बैठकर तैयार किया था.
लेकिन उनके बारे में कई ऐसी जानकारियां भी मौजूद हैं जिसके बारे में लोग कम ही जानते हैं. जैसे कि ज़करबर्ग ने कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई के अलावा साइकोलॉजी की भी ट्रेनिंग ली है और उनके दोस्तों के मुताबिक उनकी सफलता के पीछे का एक कारण ये भी है.
बीबीसी को दिए इंटरव्यू में हार्वर्ड में उनके रूममेट रहे और दोस्त जो ग्रीन ने कहा, "वो हमेशा साइकोलॉजी और सोशल साइकोलॉजी के लिहाज़ से सोचते हैं कि लोग कैसे एक दूसरे से बातचीत करते हैं."

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सोशल नेटवर्क जैसी फिल्म में ज़करबर्ग को एक ऐसे 'अजीब शख्स' के रूप में दिखाया गया है जो खुद लोगों से ज़्यादा सोशल नहीं हो पाता.
लेकिन असल में मार्क के कई सारे दोस्त थे, जो ग्रीन बताते हैं, "वो बहुत ही मज़ाकिया इंसान हैं."
एक बड़े उद्यमी के रूप में उभरने के बाद कई मामलों में उनकी आलोचना भी गई जाती रही है: जैसे कैमरे में सामने उनका सामान्य ना दिखना.
एक ट्वीटर यूज़र ने युवा उद्यमी ज़करबर्ग की तुलना एक रोबोट से करते हुए कहा, "पानी पीना ना भूलें, इंसान पानी की तरह है."
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पिकासो और गेम ऑफ थ्रोन्स
ज़करबर्ग की फ़ेसबुक प्रोफाइल के मुताबिक उनका जन्म न्यू यॉर्क में 4 मई 1984 को हुआ था.
उनके पिता दांतों के डॉक्टर और मां साइकोलॉजिस्ट थीं. ज़करबर्ग की परवरिश डब्स फेरी में हुई और उनके तीन भाई हैं, जिनका नाम रैंडी, डोना और एरिले है.
उनकी प्रोफाइल को देखने पर आप उनके शौक और उनकी प्राथमिकताओं (जो वो दुनिया को बताना चाहते हैं) के बारे में जान सकते हैं. पिकासो और आइंस्टाइन उनकी प्रेरणा हैं, मैट्रिक्स या गेम ऑफ थ्रोन्स उनकी पसंदीदा फिल्में या सीरीज़ हैं और रिहाना उनकी म्यूज़िक लिस्ट में सबसे ऊपर हैं.

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यहां आपको उनके और उनकी पत्नी प्रीसिला चान के रिश्ते के बारे में भी बहुत कुछ जानने को मिलेगा. ज़करबर्ग हार्वर्ड में एक पार्टी के दौरान बाथरूम की कतार में लगे थे, वहीं उनकी मुलाकात उनकी पत्नी से हुई थी.
उनका ये रिश्ता 2003 से शुरू हुआ और नौ साल बाद दोनों ने शादी कर ली.
पत्नी प्रीसिला चान के पिता चीन से हैं और ज़करबर्ग जल्द चीन की भाषा सीखना चाहते हैं ताकि वो अपनी पत्नी के परिवार से और ज़्यादा घुल मिल सकें.
चार साल में 100 मीलियन
कॉलेज के दिनों में जब ज़करबर्ग और प्रीसिला मिले तब ज़करबर्ग सफलता की सीढ़ी नहीं चढ़े थे. इन दोनों के मिलने के कुछ सालों बाद ज़करबर्ग ने शोहरत हासिल की.
फ़ेसबुक की कहानी एक 'स्टडी' टूल के साथ शुरू हुई थी. युवा ज़करबर्ग ने अपने एक सबजेक्ट से लगाव के कारण इसे बनाया था.
एक जर्मन अख़बार को इंटरव्यू देते हुए उन्होंने कहा, "ऐसा कोई टूल नहीं था, जिससे आप दूसरों तक पहुंच सकते और उन्हें जान सकते. मुझे नहीं पता था कि मैं ऐसा टूल कैसे बनाऊंगा. मैंने छोटे टूल बनाना शुरू किया."
वो पहल जिसने आगे चलकर एक सोशल नेटवर्क खड़ा किया, उसे आर्ट हिस्ट्री की जानकारी साझा करने का एक विकल्प था.
ज़करबर्ग याद करते हैं, "आख़िरी क्लास में वो हमें आर्ट के कुछ सैंपल दिखाने वाले थे और फिर हमें एक आर्ट पीस के मायने के बारे में निबंध लिखना था. मैं उस क्लास में ज़्यादा ध्यान नहीं दे पाया था क्योंकि मैं दूसरी चीज़ों की प्रोग्रामिंग में लगा था. लेकिन जब फ़ाइनल एक्ज़ाम का वक्त आया, मुझे लगा कि अब मैं क्या करूंगा."
इसके बाद ज़करबर्ग ने एक स्टडी टूल बनाया. इसकी मदद से सभी छात्रों ने वो जानकारी साझा की जो उनके पास थी और इसी के साथ ज़करबर्ग ने फ़ेसबुक का पहला वर्जन विकसित करने में भी कामयाबी हासिल कर ली थी.

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इन छोटे-छोटे टूल्स की मदद से उन्होंने फ़ेसबुक को अगले दो हफ्तों में बना लिया. चार साल बाद इस वेबसाइट के कुछ 100 मीलियन यूज़र्स हो गए.
ज़करबर्ग और उनके वो दोस्त जिन्होंने फ़ेसबुक बनाने में मदद की, उन्हें कई तरह के ऑफ़र मिलने लगे.
23 साल की उम्र और थोड़े से अनुभव के साथ मार्क ने कमाल कर दिया था.
याहू! ने उनकी कंपनी को 1,000 मीलियन अमरीकी डॉलर में खरीदने का प्रस्ताव दिया, जिसे उन्होंने इनकार कर दिया.
बीबीसी के साथ इंटरव्यू में उनके दोस्त जो ग्रीन याद करते हैं, "हर किसी ने कहा, हम इसे बीलियन डॉलर में बेच सकते हैं, चलो ऐसा करते हैं, क्या तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है?"
"उन्हें आत्म विश्वास की ज़रूरत थी जो उस स्थिति में ही उन्हें मिल सकता था."
आज फ़ेसबुक के दो बिलियन से ज़्यादा सक्रिय यूज़र्स हैं और ज़करबर्ग दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक हैं. लेकिन आज फ़ेसबुक मुश्किल दौर से गुज़र रहा है.
कैम्ब्रिज एनालिटिका कंसलटेंसी के स्केंडल ने फ़ेसबुक पर कई सवाल उठाए हैं. इस कंपनी ने फ़ेसबुक यूज़र्स के डेटा का ग़लत तरीके से इस्तेमाल किया, जिसकी वजह से कई लोगों ने फ़ेसबुक छोड़ दिया और कंपनी में उनके पर सवाल उठाए. फ़ेसबुक की ओर से यूज़र्स को सुरक्षा के दावों पर भी कई उंगलियां उठीं.
क्या ज़करबर्ग इस मुश्किल दौर से निकल पाएंगे?
उन्होंने कहा, "जो हम कर रहे हैं मुझे उस पर भरोसा है, और अपने आगे आ रही चुनौतियों से निपट रहे हैं. मैं जानता हूं कि हम मुड़कर देखेंगे कि किस तरह फ़ेसबुक ने लोगों को जोड़ने में मदद की और किस तरह इसने बहुत से लोगों को आवाज़ दी. इसका दुनिया पर एक सकारात्मक प्रभाव रहा."













