You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
उर्दू प्रेस रिव्यूः क्या करीब आ रहे हैं पाकिस्तान और अफग़ानिस्तान?
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी का अफ़ग़ानिस्तान दौरा, भारत प्रशासित कश्मीर और पाकिस्तान की अंदुरूनी सियासत से जुड़ी ख़बरें सुर्ख़ियों में रहीं.
सबसे पहले बात भारत प्रशासित कश्मीर की. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी ने कहा है कि अतंरराष्ट्रीय बिरादरी को भारत प्रशासित कश्मीर में हो रहे कथित ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठानी चाहिए.
अख़बार जंग के अनुसार कश्मीर सॉलिडेरिटी दिवस के मौक़े पर लोगों को संबोधित करते हुए अब्बासी ने कहा कि जब तक कश्मीरियों को उनका हक़ नहीं मिल जाता तब तक पाकिस्तान उनकी राजनीतिक, नैतिक और राजनयिक मदद करता रहेगा.
वहीं एक्सप्रेस अख़बार ने इसे पहली ख़बर बनाते हुए लिखा है कि भारतीय कश्मीर में हो रहे कथित राज्य प्रायोजित दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ पाकिस्तान के कई शहरों में प्रदर्शन हुए. अख़बार के अनुसार कराची से ख़ैबर तक कई शहरों में रैलियां निकाली गईं जिनमें लोगों ने भारत के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की.
रोज़नामा ख़बरें के अनुसार पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के छोटे भाई शहबाज़ शरीफ़ ने कहा है कि भारत प्रशासित कश्मीर की जनता अपनी आज़ादी और अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है.
शहबाज़ शरीफ़ का कहना था, ''अपने अधिकारों को हासिल करने के लिए कश्मीरी अवाम ने अपने ख़ून से नई तारीख़ लिखी है. कश्मीर भारतीय विभाजन का नामुकम्मल एजेंडा है.''
पाक पीएम का अफ़ग़ान दौरा
कश्मीर के अलावा पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का अफ़ग़ानिस्तान दौरा भी इस हफ़्ते सुर्ख़ियों में रहा.
प्रधानमंत्री अब्बासी ने शुक्रवार को अफ़ग़ानिस्तान का एक दिन का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी और चीफ़ एक्ज़ीक्यूटिव अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह से मुलाक़ात की.
अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार संयुक्त बयान जारी कर कहा गया कि दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई है कि अफ़ग़ानिस्तान की समस्या का कोई सैनिक हल संभव नहीं है.
नवा-ए-वक़्त के मुताबिक़, ''दोनों नेताओं ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान मसले का सबसे बेहतरीन हल राजनीतिक हल है. अपनी धरती एक दूसरे के ख़िलाफ़ इस्तेमाल नहीं किए जाने पर सहमति जताई गई.''
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार, प्रधानमंत्री अब्बासी के काबुल दौरे पर दोनों नेताओं ने साझा बयान जारी कर कहा है कि दोनों देश एक दूसरे के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी से परहेज़ करेंगे.
बयान में ये भी कहा गया है कि दहशतगर्दी दोनों देशों के लिए संयुक्त रूप से ख़तरा हैं और इससे मिलकर निपटा जाएगा.
अख़बार दुनिया के अनुसार प्रधानमंत्री अब्बासी के अफ़ग़ानिस्तान दौरे के बाद दोनों देशों ने पूरे क्षेत्र में शांति क़ायम करने के लिए सात सूत्री एक्शन प्लान तैयार कर लिया है.
एक्शन प्लान में दोनों देशों के बीच पैदा होने वाले मुद्दों को शामिल कर लिया गया है. इनमें सबसे ख़ास बात ये है कि दोनों देश अपनी-अपनी धरती को एक दूसरे के ख़िलाफ़ इस्तेमाल नहीं करने देंगे.
अख़बार दुनिया लिखता है कि एक्शन प्लान को पूरी तरह अमल में लाने के लिए एक वर्किंग ग्रुप का गठन किया जाएगा.
नैब क़ानून पर उठाए सवाल
अब बात पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति की.
अख़बार जंग के मुताबिक़ पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने नैब यानी नेशनल अकाउंटिबिलिटी ब्यूरो की जमकर आलोचना की है.
नवाज़ शरीफ़ का कहना था, ''नैब का क़ानून एक तानाशाह( जनरल परवेज़ मुशर्रफ़) का बनाया हुआ काला क़ानून है. मुशर्रफ़ ने मेरे ख़िलाफ़ बदले की कार्रवाई करने के लिए ये क़ानून बनाया था.''
नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि वो अपनी ही पार्टी के प्रधानमंत्री शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी से अपील करते हैं कि आंतरिक सरकार के दौरान नई सरकार के गठन तक नैब के क़ानून को सस्पेंड कर दिया जाए.
नवाज़ शरीफ़ का दावा है कि नैब क़ानून का चुनाव के दौरान ग़लत इस्तेमाल हो सकता है.