एक शिक्षक जिन्होंने यहूदी बच्चों को नाजियों से बचाया था

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कुछ बच्चों को यह याद भी नहीं है कि योहान वैन होस्ट ने उन्हें नाजियों से कैसे बचाया था. बचाए गए बच्चों में से अधिकतर उस समय बहुत छोटे थे.

यह कहानी है तानाशाह हिटलर के समय की, जब यहूदियों को जड़ से मिटाने के मक़सद से वो उनका क़त्ल कर रहे थे.

क़रीब 600 यहूदी बच्चों को नाजियों से बचाने वाले वैन होस्ट का निधन बीते गुरुवार को हो गया. वो 107 साल के थे.

यह 1942 के गर्मी के दिनों की बात है. वैन होस्ट एम्स्टर्डम के कैल्बिनिस्ट टीचर ट्रेनिंग कॉलेज में पढ़ाते थे. उनके पिता फर्नीचर का काम करते थे.

उनका स्कूल यहूदियों के प्रभाव वाले इलाक़े में था. सरकार से स्कूल को मिलने वाली आर्थिक मदद पर रोक लगा दी गई थी. स्कूल बंद होने के कगार पर था.

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उस समय वैन होस्ट ने इसे बिना सरकारी मदद के चलाने का फ़ैसला किया. उन्हें बच्चों के अभिभावकों से मदद मांगी. काफ़ी मशक्कत के बाद स्कूल को फिर से खोला गया.

वैन होस्ट उस स्कूल के प्रिंसिपल बनें और सभी पुराने शिक्षक और छात्र फिल से बहाल किए गए.

सड़क पार स्कूल के सामने एक थियेटर था, जिसपर 1941 में नाजियों ने कब्ज़ा कर लिया था और उसे जेल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था.

इस बात के पुख़्ता रिकॉर्ड तो उपलब्ध नहीं है, पर इतिहासकार यह मानते हैं कि 1943 के अंत तक इस जेल में क़रीब 46 हजार लोगों को रखा गया था, जिन्हें बाद में देश छोड़कर जाना पड़ा था.

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इमेज कैप्शन, वैन होस्ट का स्कूल

दीवार पार कर बच्चों को सुरक्षित जगह पहुंचाया गया था

नाजियों ने जेल के प्रमुख वॉल्टर ससकाइंड नाम के एक यहूदी को बनाया था. जेल के प्रमुख बनने के बाद ससकाइंड ने यह देखा कि लोग वहां से आसानी से भाग रहे थे.

वहां भेजे गए यहूदियों की संख्या कम दर्ज की जाती थी ताकि जिनके नाम न हो, वो आसानी से भाग सके.

वैन होस्ट के स्कूल के बगल में और थियेटर के सामने एक शिशु गृह था, जहां यहूदी बच्चे रहते थे. बच्चों की जान ख़तरे में थी.

ससकाइंड और शिशु गृह के प्रमुख हेनरीटेट पिमेंटेल ने बच्चों को बचाने की सोची. इसके लिए उन्होंने वैन होस्ट की मदद मांगी.

वो दोनों बच्चों को सुरक्षित जगह पर ले जाना चाहते थे. शिशु गृह और वैन होस्ट के स्कूल के बीच एक दीवार का फ़ासला था.

शिशु गृह से बच्चों को दीवार पार कर वैन होस्ट को सौंपा जा रहा था. वो बच्चों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा रहे थे.

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इमेज कैप्शन, यह स्पष्ट नहीं है कि कितने बच्चे बचाए गए थे पर अनुमान लगाया जाता है कि करीब 600 बच्चे थे

कैसे जीता नाजियों का विश्वास

ये सभी बच्चे अभिभावकों की मर्जी से सुरक्षित जगह पर भेजे जा रहे थे. हिटलर की सरकार को किसी तरह का शक ना हो, इसके लिए कुछ बच्चों को वहीं छोड़ने का फ़ैसला किया गया.

पिछले साल वैन होस्ट ने डच ब्रॉडकास्टर एनओएस से कहा था, "यह बहुत मुश्किल था कि 60 बच्चों में आप 30 को चुने और 30 को छोड़ दें."

बचाए गए बच्चों में से एक थे लाइज कैरेंसा. लाइज कैरेंसा को थैले में छिपाकर शिशु गृह लाया गया था. उनके परिवार के अधिकतर सदस्यों की हत्या कर दी गई थी. लेकिन बाद में वो अपनी मां से मिलने में सफल रहीं.

लाइज ने एनओएस से कहा था, "मुझे अपनी मां और दादी से गले लगने तक नहीं दिया गया था. यहां तक की हमलोगों को अलविदा कहने को भी मना किया गया था. शायद ऐसा करने से उस समय माहौल ख़राब हो जाता."

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"मुझे सिर्फ़ हाथ हिलाने को कहा गया था. मैं अकेला महसूस कर रही थी."

वैन होस्ट को बच्चों को बचाने के लिए नाजियों से अच्छे संबंध स्थापित करने और उनका विश्वास जीतने की ज़रूरत थी.

इसमें सफल हो सके, वैन होस्ट ने एक तरीका अपनाया. जब बच्चे हिटलर के सैनिकों की तरफ देखते थे तो वो जोर से उनपर चिल्लाते थे और कहते थे- "उन्हें अपना काम करने दो. आपको उनलोगों से कोई मतलब नहीं होना चाहिए."

वो बेहतर अभिनय करते थे ताकि उनका विश्वास जीता जा सके. वो क्या करने वाले थे, इसके बारे में उन्होंने अपनी पत्नी तक को नहीं बताया था.

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इमेज कैप्शन, साल 2015 में इसराइली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने वैन होस्ट को सम्मानित किया था

एक गैर यहूदी ने सैंकड़ों यहूदियों को बचाया

वो नहीं चाहते थे कि उनकी मंशा का पता किसी को चले. एक बार सरकार ने वैन होस्ट के स्कूल की जांच के लिए एक इंस्पेक्टर भेजा.

जांच के दौरान इंस्पेक्टर ने बच्चों के रोने की आवाज़ सुनी. बच्चों पर ख़तरा इससे पहले बढ़ता, वैन होस्ट ने उस इंस्पेक्टर से बात की. किस्मत से वो उनके मुहिम में साझेदार हो गया और इस तरह बच्चे ख़तरे से बाहर निकल गए.

किसी तरह बच्चों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया गया.

इसके बाद शिशु गृह के प्रमुख हेनरीटेट पिमेंटेल को 1943 में गिरफ़्तार कर लिया गया और इसी साल सितंबर में उनकी ऑक्सवीज में हत्या कर दी गई.

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इसी महीने शिशु गृह को तोड़ने की घोषणा की गई और उसे तोड़ दिया गया. बहुत सारे बच्चे अंदर थे और उन्हें बचाया नहीं जा सका.

वैन होस्ट ने एक बार कहा था, "इस बात का अंदाजा लगाइए कि वहां करीब 100 बच्चे खड़े होंगे और आपको कहा जाए कि आप खुद फ़ैसला करें कि किन्हें साथ ले जाना है और किन्हें छोड़ देना है."

"यह मेरी ज़िंदगी का सबसे कठिन दिन था."

एम्स्टर्डम के यहूदी सांस्कृतिक क्वार्टर में अधिकारी एनेमीक ग्रिन्गॉल्ड ने बीबीसी से कहा, "सच्चाई यह थी कि वैन होस्ट सभी को बचा नहीं सकते थे. यह बात उन्हें अंत तक परेशान करती रही."

वैन होस्ट ने एक अख़बार को 2015 में कहा था, "मैं केवल उन चीजों के बारे में सोच रहा था जो मैं नहीं कर पा रहा था. उन कुछ हज़ार बच्चों के बारे में जिन्हें मैं बचा नहीं पाया."

युद्ध के दौरान वैन होस्ट ने अपने स्कूल को बंद नहीं होने दिया. उन्होंने बच्चों को नाजियों की सेना में भर्ती होने से भी मना कर दिया.

वो कुछ दिनों तक नाजियों से छिपते भी रहें क्योंकि उन्हें यह सूचना मिली थी कि वो उन्हें गिरफ़्तार करने वाले हैं.

बाद में वो 25 सालों तक नीदरलैंड के सांसद भी रहें. वो 1961 ले 1968 तक यूरोप की संसद मे सदस्य भी रहें.

वो राजनीति और शिक्षा के क्षेत्र में काम करते रहे. 99 साल की उम्र में वो एक चेस टूर्नामेंट के विजेता भी बनें.

दूसरे विश्व युद्ध के वक्त उन्होंने क्या किया, इस पर वैन होस्ट बहुत कम ही बात करते हैं पर अधिकतर लोग यह मानते हैं कि उन्होंने जो किया वो महत्वपूर्ण था.

1972 में इसराइल की सरकार ने इस बात के लिए सम्मानित किया कि वो एक गैर-यहूदी होते हुए भी यहूदियों की मदद की.

इसराइली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने 2015 में वैन होस्ट से कहा था, "जो एक ज़िंदगी बचाते हैं, वो एक ब्रम्हांड बचाते हैं. आपने तो सैंकड़ों ब्रम्हांड बचाए हैं."

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