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बातचीत को ट्रंप तैयार लेकिन उत्तर कोरिया नहीं दे रहा उत्तर
दक्षिण कोरिया की ओर से सोमवार को उत्तर कोरिया और अमरीका के बीच आगामी बातचीत पर एक अहम जानकारी सामने आई है.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बीते शुक्रवार उत्तर कोरिया के साथ सीधी बातचीत करने की सहमति जताई थी.
दक्षिणी कोरियाई अधिकारियों ने कहा था कि किम जोंग उन अपने परमाणु हथियारों को खत्म करने के लिए तैयार थे.
हालांकि, इस बातचीत को लेकर किसी तरह की जानकारी उपलब्ध नहीं है. इसके साथ ही इस शिखर सम्मेलन के एजेंडे और आयोजन स्थल को लेकर भी अब तक किसी तरह की सहमति नहीं बनी है.
ऐसे में विशेषज्ञ इस शिखर सम्मलेन की जटिलताओं को देखते हुए इसके परिणाम को लेकर आशंकित हैं.
दक्षिण कोरियाई एकीकरण मंत्रालय के प्रवक्ता ने सोमवार को कहा, "हमें उत्तर कोरियाई सरकार की ओर से अमरीका-उत्तर कोरिया सम्मेलन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली हैं और ना ही हमें इस बारे में कोई जानकारी है"
"मुझे लगता है कि वे इस मामले को सावधानी से देख रहे हैं और उन्हें अपना पक्ष ठीक से रखने के लिए कुछ समय की ज़रूरत है."
ट्रंप से इस बारे में बात करने वाले दक्षिण कोरियाई अधिकारी अब चीन और जापान की यात्रा पर हैं जहां वह दोनों देशों के नेताओं को इस सम्मेलन के बारे में जानकारी देंगे.
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति के सुरक्षा सलाहकार चंग-इयू-योंग चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने जा रहे हैं. वहीं, इंटेलिजेंस एजेंसी के चीफ सुह हून जापान में शिंजो अबे से मुलाकात करने जा रहे हैं.
दुनिया को चौंकाने वाली घटना
उत्तर कोरिया और अमरीका के बीच बीते साल तीखी बयानबाजी का एक लंबा दौर चला. इसके चलते दुनिया के कई नेताओं ने सैन्य युद्ध होने की आशंकाएं भी जताईं.
उत्तर कोरिया ने बीते साल कई परिक्षण करने के साथ ही लंबी दूरी की मिसाइल भी विकसित की. उत्तर कोरिया के मुताबिक़, ये मिसाइल अमरीका तक परमाणु बम ले जा सकता है.
दोनों देशों के नेताओं के बीच आगामी बातचीत एक अप्रत्याशित घटना होगी क्योंकि अब तक किसी भी अमरीकी राष्ट्रपति ने पद पर रहते हुए किसी उत्तर कोरियाई नेता से बात नहीं की है.
लेकिन इस बातचीत से जुड़ी जानकारियां अब तक सामने नहीं आई हैं.
पेसेफिक फोरम सीएसआईएस में रिसर्च फेलो एंड्री अब्राहमियन ने बीबीसी को बताया, "प्योंगयांग शायद इस प्रस्ताव को लेकर अमरीका में आ रही प्रतिक्रियाओं को देखना चाहता है."
अब्रहामियन कहते हैं, "व्हाइट हाउस की ओर से इस बारे में काफी भ्रमपूर्ण स्थिति है, ऐसे में ये ठीक है कि इस पर सार्वजनिक घोषणा करने से पहले स्थिति स्पष्ट कर ली जाए."
उत्तर कोरिया को मिलेगी प्रतिबंधों से राहत
अगर सब कुछ ठीक रहा तो उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की ट्रंप से मई के अंत तक मुलाकात होगी.
इसके बाद किम जोंग उन और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून के बीच अलग बैठक होगी.
अमरीका और उत्तर कोरिया के संबंधों पर नज़र रखने वाले इस बैठक को लेकर दो धड़ों में बंटे हुए हैं. एक धड़े के मुताबिक़, इस बैठक से प्योंगयोंग के परमाणु हथियार ख़त्म करने का रास्ता खुल जाएगा. वहीं, दूसरे पक्ष का मानना है कि उत्तर कोरिया लंबे समय से चले आ रहे अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों में छूट पाने की कोशिश है.
अब्राहमियन कहते हैं, "इस सम्मलेन के रास्ते उनका तात्कालिक उद्देश्य प्रतिबंधों से राहत हासिल करना होगा. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि किम जोंग उन इस शिखर सम्मलेन का इस्तेमाल प्रोपोगेंडा के लिए करेंगे. ये बड़ी चिंता का विषय नहीं है. इसका मतलब ये नहीं है कि अमरीका उत्तर कोरिया के राजनीतिक तंत्र, मानवाधिकार के क्षेत्र में उनके प्रदर्शन और हथियारों के जखीरे को अपनी सहमति दे रहा है."
सीआईए के निदेशक पोमपेओ ने रविवार को डोनल्ड ट्रंप के फैसले का समर्थन करते हुए कहा है कि उनके राष्ट्रपति इस सम्मलेन से जुड़े ख़तरे समझता है लेकिन ये प्रशासन उत्तर कोरिया के मामले में अपनी आंखें खोलकर काम कर रहा है.
अमरीकी राष्ट्रपति ने शनिवार को एक रैली के दौरान कहा है कि उन्हें लगता है, उत्तर कोरिया शांति चाहता है लेकिन अगर हथियारों के जखीरे के खत्म किए जाने पर सहमति नहीं बनती है तो वह वार्ता खत्म कर देंगे.
अमरीकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, ट्रंप ने किम जोंग उन से मिलने का फ़ैसला करने से पहले अपने प्रशासन के शीर्ष नेताओं से विमर्श नहीं किया.
अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने भी संवाददाताओं से इस बात की पुष्टि की थी कि राष्ट्रपति ने ये फ़ैसला अपने स्तर पर लिया है.
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