अमरीका के नए 'परमाणु पैंतरे' का क्या होगा असर?

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अमरीका के परमाणु हथियारों का ज़ख़ीरा पुराना हो गया है और इससे चिंतित अमरीकी रक्षा मंत्रालय नए और छोटे एटम बम विकसित करना चाहता है.
ट्रंप प्रशासन के शुक्रवार को जारी दस्तावेज़ 'न्यूक्लियर पोश्चर रिव्यू' (एनपीआर) में चीन, रूस, उत्तर कोरिया और ईरान को अमरीका के लिए संभावित ख़तरा बताया गया है.
इस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं के लिए ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ा. चीन और रूस ने कड़े शब्दों में इसकी आलोचना की.
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि इससे दुनिया बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएगी.
अमरीका को लगता है कि 'रूस अमरीकी परमाणु हथियारों को इस्तेमाल के लिहाज से बहुत बड़ा मानता है.'
इसका मतलब ये निकाला जा रहा है कि अमरीका के परमाणु हथियार अब पहले की तरह असरदार अवरोधक नहीं रहे.

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नागासकी पर परमाणु हमला
'न्यूक्लियर पोस्चर रिव्यू' (एनपीआर) में इस बात की दलील दी गई है कि छोटे परमाणु हथियार रूस जैसे देशों की सोच बदल देंगे.
एनपीआर के मुताबिक़ 20 किलोटन से कम वजन का हथियार भले ही कम ताकतवर होगा लेकिन इसके बावजूद बर्बादी करने में सक्षम होगा.
दूसरे विश्व युद्ध के आख़िरी वक़्त में जापान के शहर नागासकी में अमरीका ने जो एटम बम गिराया था, उसकी विस्फोटक क्षमता भी तकरीबन इतनी ही थी. इस बम ने 70 हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान ली थी.
इस दस्तावेज़ में कहा गया है, "रूस को ये समझना चाहिए कि परमाणु हथियारों का सीमित इस्तेमाल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता. हमारी रणनीति यही सुनिश्चित कराना है."
अमरीका के डिप्टी डिफ़ेंस सेक्रेटरी पैट्रिक शानाहन ने कहा कि देश के परमाणु हथियारों का ज़ख़ीरा 70 साल से भी ज़्यादा समय से सुरक्षित है.

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परमाणु ख़तरा
पैट्रिक शानाहन ने वॉशिंगटन में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अमरीका इन हथियारों के पुराने पड़ने का ख़तरा नहीं उठा सकता है.
साल 2010 के बाद ये पहली बार है कि अमरीकी सेना ने भविष्य के परमाणु ख़तरे का आकलन सामने रखा है.
'न्यूक्लियर पोस्चर रिव्यू' में अमरीका के परमाणु हथियारों के जखीरे को बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया है. सिर्फ़ मौजूदा हथियारों को फिर से इस्तेमाल किए जाने लायक बनाने की बात कही गई है.
हालांकि आलोचक ट्रंप प्रशासन पर परमाणु निःशस्त्रीकरण के समझौतों की भावना के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाते हैं.

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चीन का पक्ष
चीन ने अमरीका से शीत युद्ध वाली मानसिकता से बाहर निकलने की अपील की है. बीजिंग ने परमाणु हथियारों पर वाशिंगटन के नए प्रस्तावों का भी विरोध किया है.
चीन के रक्षा मंत्री ने रविवार को एक बयान में कहा, "जिस देश के पास दुनिया में परमाणु हथियारों का सबसे बड़ा जखीरा है, उसे उल्टी धारा बहाने के बजाय इसे कम करने की पहल करनी चाहिए. उम्मीद है कि निःशस्त्रीकरण की दिशा में अमरीका अपनी जिम्मेदारी और चीन की रणनीति को समझेगा."
एनपीआर में अमरीका ने चीन पर अपने परमाणु हथियार भंडार को बढ़ाने का आरोप लगाया है. दूसरी तरफ़ चीन का कहना है कि उसका परमाणु हथियार कार्यक्रम रक्षात्मक किस्म का है.

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रूस और ईरान की राय
रूस के विदेश मंत्रालय ने अमरीका पर युद्ध भड़काने का आरोप लगया है.
विदेश मंत्री सर्गेई लवरोव ने परमाणु हथियारों पर अमरीका की प्रस्तावित योजना को लेकर गहरी निराशा जताई है.
साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि रूस अपनी सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी कदम उठाएगा.
ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़ारिफ़ ने अमरीकी प्रस्ताव को अंतरराष्ट्रीय परमाणु निःशस्त्रीकरण समझौते का उल्लंघन बताया है.
अमरीका से कितना बड़ा ख़तरा
शीत युद्ध के दिनों से ही तीनों महान परमाणु शक्तियां एक दूसरे के लिए ख़तरा बनी हुई हैं. लेकिन हाल के दिनों में इस बारे में चिंताएं जताई जा रही हैं.
सीरिया और यूक्रेन में रूस और अमरीका सीधे तौर पर एक दूसरे के आमने-सामने हैं.
जनवरी में जारी हुए इस दस्तावेज़ में कहा गया है कि अमरीकी सैन्य क्षमता को चुनौती देने के लिए रूस और चीन ख़ास तौर काम कर रहे हैं.
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक़ अमरीका के पास 6800 परमाणु वॉरहेड और रूस के पास 7000 वॉरहेड हैं.
दोनों मिलकर दुनिया के 90 फीसदी परमाणु हथियारों के मालिक हैं. फ्रांस के पास 300, चीन के पास 270 और ब्रिटेन के पास 215 परमाणु हथियार हैं.
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