भारत-इसराइल दोस्ती से पाकिस्तान क्यों टेंशन में ?

इसराइली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू के भारत दौरे को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों देशों के बीच मज़बूत रिश्ते का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान में इसे लेकर काफ़ी चिंताएं देखने को मिल रही हैं.

इसराइली प्रधानमंत्री ने एक भारतीय टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि उनका छह दिन का भारतीय दौरा काफ़ी संतोषजनक रहा. उन्होंने मोदी की भी तारीफ़ की.

नेतन्याहू ने पाकिस्तान से निपटने की मोदी सरकार की नीतियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत को अपने इलाके की सुरक्षा करने का पूरा हक़ है.

अपने दौरे को 'भावनात्मक और संतुष्ट करने वाला' बताते हुए नेतन्याहू ने भारत और इसराइल के रिश्तों की तारीफ़ की.

उन्होंने कहा, ''मैं भारत का सिर्फ़ इसलिए सम्मान नहीं करता क्योंकि वो महान ताक़त है बल्कि इसलिए भी करता हूं क्योंकि हमारे बीच ख़ास रिश्ता है और दोनों देश लोकतंत्र हैं. हम दोनों प्राचीन सभ्यताएं और आधुनिक लोकतंत्र हैं.''

'भारत-इसराइल की दोस्ती, ख़तरे की घंटी'

पाकिस्तान के सीनेट चेयरमैन रज़ा रब्बानी ने कहा है कि अमरीका, इसराइल और भारत के बीच ये 'सांठ-गांठ' समूचे मुस्लिम जगत के लिए ख़तरे की घंटी है.

सीनेट सचिवालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक रब्बानी ने ईरान की राजधानी तेहरान में पार्लियामेंट्री यूनियन ऑफ़ इस्लामिक कंट्रीज़ के 13वें सत्र को संबोधित करते हुए इस दोस्ती को लेकर चेताया.

उन्होंने कहा, ''दुनिया में हालात बदल रहे हैं. अमरीका, भारत और इसराइल के बीच सांठ-गांठ हो रही है और मुस्लिम जगत को इससे निपटने के लिए एकता दिखाने की ज़रूरत है क्योंकि आज ये पाकिस्तान और ईरान के साथ हो रहा है, कल किसी दूसरे देश के साथ भी हो सकता है.''

'पाकिस्तान कर सकता है अपनी सुरक्षा'

डॉन के मुताबिक रब्बानी ने ये भी कहा कि यरूशलम का कानूनी और ऐतिहासिक दर्जा बदलने से जुड़ी अमरीका की कोशिश का वो कड़ा विरोध करता है क्योंकि ये अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का उल्लंघन है.

आतंकवाद के बारे में बात करते हुए रब्बानी ने कहा कि पाकिस्तान ने पिछले 15 साल से ज़्यादा वक़्त से दहशतगर्ती के ख़िलाफ़ जंग की क़ीमत चुकाई है. इस जंग में हज़ारों पाकिस्तानी मारे गए हैं जबकि उनसे कई ज़्यादा ज़ख़्मी हुए हैं.

रब्बानी ने कहा कि इसके मुताबिक़ पाकिस्तान किसी भी तरह के चरमपंथ के ख़िलाफ़ सक्रिय भूमिका अदा करता रहेगा.

दूसरी तरफ़ पाकिस्तान के विदेश मंत्री का कहना है कि वो भारत और इसराइल के बीच 'सांठ-गांठ' के बावजूद अपनी सुरक्षा कर सकता है.

जियो न्यूज़ से बातचीत करते हुए ख़्वाज़ा आसिफ़ ने कहा कि इसराइल ने एक बड़े इलाके पर कब्ज़ा कर रखा है जो मुस्लिमों की है. इसी तरह भारत ने भी कश्मीर में मुस्लिम इलाका कब्ज़ा रखा है. उन्होंने कहा, "उन दोनों के उद्देश्य एक से हैं."

आसिफ़ ने कहा, "हम भारत और इसराइल के बीच सांठ-गांठ होने के बावजूद अपनी रक्षा कर सकते हैं." इससे पहले पाकिस्तानी फ़ॉरेन ऑफ़िस ने कहा था कि "वो भारत और इसराइल के बीच इस दोस्ती पर करीबी निगाह रखे हैं."

आसिफ़ ने बेन्यामिन नेतन्याहू के भारत दौरे की आलोचना की और उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ये रिश्ता इस्लाम-विरोधी विचारधारा पर आधारित है, जो इस बात से साबित होता है कि दोनों ने ही मुस्लिम इलाकों पर कब्ज़ा कर रखा है.

'पाकिस्तान के लिए खड़ी हो सकती हैं मुश्किलें'

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानंमत्री सय्यद यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने भी कहा है कि भारत-इसराइल की 'सांठ-गांठ' को पाकिस्तान के लिए एक बड़ा ख़तरा बताया है. उन्होंने कहा है कि "इस इलाके की बड़ी ताक़तों को संतुलन बनाए रखने के लिए भूमिका अदा करनी चाहिए ताकि शांति कायम रखी जा सके".

गिलानी से जब मोदी-नेतन्याहू की मुलाक़ात और इसराइल की अफ़ग़ानिस्तान तक 'पहुंच' हासिल करने की कोशिश के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि भारत-इसराइल के ये रिश्ते पाकिस्तान और उसकी विदेश नीति के लिए सही नहीं हैं.

उनके मुताबिक पाकिस्तान पहले से मुश्किल वक़्त का सामना कर रहा है और इस 'सांठ-गांठ' से उसके लिए नई मुसीबत खड़ी हो सकती है.

गिलानी ने कहा कि पाकिस्तान के दुश्मन चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर और ग्वादर परियोजना के ख़िलाफ़ साज़िश रच रहे हैं, जो कि पहले से राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है.

पूर्व प्रधानमंत्री का कहना है कि अमरीका, पाकिस्तान के लिए अहम सहयोगी है और उसके साथ ना केवल रिश्ते जारी रखने की ज़रूरत है बल्कि उन्हें और गहरा-मज़बूत बनाने की आवश्यकता भी है.

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़ुर्रम दस्तगीर ने नेशनल असेंबली में भारत की आलोचना करते हुए पाकिस्तान के चीन और रूस से मज़बूत होते रिश्तों का ज़िक्र किया.

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