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ईरान पर नई पाबंदियां लगाएगा अमरीका?
अमरीकी वित्त मंत्री स्टीव मनुचन ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ईरान पर नए प्रतिबंध लगा सकते हैं.
ट्रंप शुक्रवार तक फ़ैसला कर लेंगे कि 2015 में ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते के तहत प्रतिबंधों में जारी छूट जारी रहेगी या नहीं.
2015 में तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान के साथ यह समझौता किया था. इस समझौते के तहत ईरान को तेल बेचने और उसके केंद्रीय बैंक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार की अनुमति मिली थी.
ताज़ा बयान में अमरीकी वित्त मंत्री स्टीव मनुचन ने कहा, "मेरा मानना है कि ईरान को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप बिल्कुल स्पष्ट हैं. ईरान के साथ हुए समझौते में कई तरह के बदलावों की ज़रूरत है. इसमें कई ऐसे पहलू हैं जो ठीक नहीं हैं. इस समझौते के बाहर कई ऐसी चीज़ें हैं जो चिंताजनक हैं. चाहे वो बैलिस्टिक मिसाइल हो, मानवाधिकारों का उल्लंघन हो या फिर दूसरे मुद्दे हों."
ईरान डील के ख़िलाफ रहे हैं ट्रंप
डोनल्ड ट्रंप ने जब अमरीकी कमान संभाली थी तब से ही ईरान को लेकर उनका रुख़ कड़ा रहा है. 2015 में तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान के साथ जो परमाणु समझौता किया था उसकी वो लगातार आलोचना करते रहे हैं.
अभी हाल ही में जब ईरानी सरकार के ख़िलाफ़ लोग सड़क पर उतरे तो अमरीका खुलकर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आया. अब ट्रंप उस समझौते को तोड़ सकते हैं जो मध्य-पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए अहम है.
ट्रंप कांग्रेस से कई बार इस समझौते को रद्द करने के लिए कह चुके हैं. हालांकि यूरोप का मानना है कि यह समझौता अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है.
इस समझौते से बेहतर विकल्प नहीं: ब्रिटेन
यूरोप के कई देशों ने अमरीका से आग्रह किया है कि वो ईरान के साथ 2015 के समझौते से पीछे नहीं हटे. इस समझौते के तहत ईरान परमाणु कार्यक्रम सीमित रखने के लिए बाध्य है. यूरोप की कई शक्तियों ने कहा कि सुरक्षित दुनिया के लिए यह एक ज़रूरी समझौता है.
ईरान, जर्मनी, फ़्रांस और यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों से मुलाक़ात के बाद ब्रिटेन के विदेश मंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि यह समझौता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकता है. उन्होंने कहा कि अमरीका को अन्य विकल्पों के साथ जाना चाहिए.
बोरिस जॉनसन ने कहा, "मेरा मानना है कि ईरान और अमरीका के बीच जो समझौता है उसका कोई विकल्प नहीं हो सकता है. यह समझौता ईरानी सेना को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकता है. मुझे नहीं लगता कि कोई इससे बेहतर विकल्प दे सकता है. जो भी इस समझौते को ख़त्म करने की बात कर रहे हैं उन्हें बेहतर विकल्प के साथ आना चाहिए."
यूरोपीय संघ में विदेशी मामलों की प्रमुख फेडेरिका मोघेरिनी ने कहा कि यह समझौता प्रभावी है.
उन्होंने कहा कि इससे मुख्य उद्देश्य को हासिल किया जा रहा है. मतलब ईरान पर पूरी निगरानी है और वो परमाणु कार्यक्रम को लेकर बंधा हुआ है.
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