क्या कम हो रही है सऊदी अरब और ईरान की दुश्मनी?

ईरान और सऊदी अरब के बीच दुश्मनी का इतिहास पुराना है. साल 2015 में मक्का भगदड़ के दौरान 400 ईरानी नागरिकों की मौत होने के बाद दोनों देशों के बीच जारी दुश्मनी दुनिया के बीच आ गई.

लेकिन, बीते हफ़्ते ईरान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों को हाथ मिलाते देखा गया है.

ये अपने आप में एक अप्रत्याशित घटना थी. इंटरनेट पर इस मुलाकात की तस्वीरें जारी हुई हैं.

चेहरों पर मुस्कुराहट और सऊदी-ईरानी दुश्मनी

ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद ज़रीफ़ और सऊदी विदेश मंत्री अदल अल-जुबैर को हाथ और गले मिलते वक़्त मुस्कराते हुए देखा गया.

लेकिन इस मुलाक़ात को एक सामान्य राजनयिक हाव-भाव बताया जा रहा है.

सऊदी विदेश मंत्री ज़रीफ़ ने पत्रकारों से कहा, "सऊदी अरब के विदेश मंत्री से मेरी मुलाकात रियाद के साथ एक बार फ़िर राजनयिक संबंध स्थापित करने की शुरुआत नहीं है."

उन्होंने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में लोग एक दूसरे से मुलाकात करते ही हैं और सऊदी अरब और ईरान के विदेश मंत्री ख़ासकर मुलाकात करते हैं क्योंकि दोनों देशों के बीच रिश्तों का अपना इतिहास है."

इसके साथ ही ज़रीफ़ ने जोर देते हुए कहा है कि ईरान अपने पड़ोसियों के साथ बेहतर रिश्ते चाहता है. हालांकि, उन्होंने यमन में सऊदी अरब के सैन्य अभियान की निंदा की है.

रिश्तों का सफ़र

क़तर की राजनयिक घेराबंदी से लेकर यमन में सैन्य अभियान के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच गंभीर तनाव है.

सीरिया के मुद्दे पर भी दोनों देश एक दूसरे के सामने हैं.

सऊदी अरब जहां एक ओर असद सरकार के ख़िलाफ़ है तो वहीं दूसरी ओर ईरान सीरिया का सबसे बड़ा सहयोगी है.

साल 2015 में ईरान परमाणु समझौते के बाद से सऊदी अरब ने ईरान के मामले में अपनी विदेश नीति को आक्रामक रुख़ दिया है क्योंकि इस समझौते से ईरान को आर्थिक पहुंचने के बाद मध्य पूर्व में उसका रुतबा बढ़ने का डर है.

साल 2015 में ही मक्का में हुई भगदड़ में 400 ईरानी हज यात्रियों के मरने के बाद दोनों देशों के बीच संबंध अपने सबसे ख़राब दौर में पहुंच गए थे.

इसके बाद साल 2016 में ईरानी धर्मगुरु अयातुल्लाह खेमनेनी ने हज़ यात्रा का बायकॉट करते हुए सऊदी अरब को "बेशर्म", "दुष्ट" और "अपराधी" जैसे शब्दों की संज्ञा दी.

लेकिन इसके ठीक एक साल बाद अयोतुल्लाह खामनेई ने मक्का जाने वाले हज यात्रियों के पहले तीन जत्थों को विदा करते हुए हज को देशों के बीच तनाव कम करने का अवसर बताया है.

क्या सुधर रहे हैं रिश्ते?

दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हाथ मिलाने की ये घटना बीते दो सालों से जारी खराब राजनयिक रिश्तों में सुधार का संकेत है. लेकिन इस हफ़्ते राजनयिक रिश्तों के लिहाज से भी एक बड़ी घटना हुई है.

ईरानी विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब के मक्का, जेद्दाह और मदीना में अपने दस राजनयिकों के पहुंचने की पुष्टि की है जो ईरानी हज यात्रियों को राजनयिक सहयोग देंगे.

ऐसे में क्या ये सभी संकेत दोनों शक्तिशाली देशों के बीच संबंध सुधरने की ओर इशारा कर रहे हैं? ये कहना कठिन है.

दोनों देशों की ओर से अब तक राजनयिक संबंधों पर आधिकारिक बयान जारी नहीं हुए हैं.

ऐसे में ये कहा जा सकता है कि संबंधों में मधुरता लाने के लिए सिर्फ़ दोनों देशों के नेताओं के ओर से सकारात्मक बातचीत के साथ-साथ दोनों देशों की जनता में भी एक दूसरे के प्रति सोच में परिवर्तन लाने की जरूरत है.

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