जब उत्तर कोरिया ने ग़लती से अपने ही शहर पर छोड़ दी मिसाइल

उत्तर कोरिया

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अपने अनियंत्रित परमाणु कार्यक्रम की वजह से दुनिया में चिंता का सबब बने उत्तर कोरिया को एक बार खुद अपने ही कार्यक्रम का शिकार होना पड़ा था.

उसका एक मिसाइल परीक्षण ग़लत हो गया था और मिसाइल उसके अपने ही एक शहर पर जा गिरी थी.

'द डिप्लोमैट' पोर्टल में प्रकाशित एक विश्लेषण में इस घटना के बारे में बताया गया है. इस विश्लेषण को संपादक अंकित पांडा और अमरीका के जेम्स मार्टिन सेंटर फॉर नॉन प्रॉलिफरेशन स्टडीज़ के रिसर्चर डेव सिज़मर्लर ने तैयार किया है.

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क्यों गिरी मिसाइल?

इस विश्लेषण के अनुसार यह घटना 28 अप्रैल 2017 की है.

अमरीकी सरकार के सूत्रों के अनुसार उस मिसाइल का परीक्षण ठीक तरीके से नहीं हो पाया था और वह अपने क्षेत्र से बाहर नहीं जा सकी.

बीबीसी से बातचीत में अंकित पांडा ने कहा, ''उस मिसाइल में क्या गड़बड़ी हुई थी यह कोई नहीं जानता.''

उन्होंने बताया, ''जिस समय मिसाइल लॉन्च के लिए तैयार थी उसी वक़्त इंजन ने काम करना बंद कर दिया और इसी वजह से वह मिसाइल सफलतापूर्वक अपने क्षेत्र से बाहर नहीं जा सकी.''

पांडा बताते हैं, ''आपको यह याद रखना चाहिए कि इन मिसाइलों में लिक्विड फ्यूल होता है, इसका मतलब है कि जब ये मिसाइल क्रैश होती है तो ज़बरदस्त धमाका होता है और इसके सबूत हम सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों से देख सकते हैं. ''

कितना नुक़सान हुआ?

सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर यह बता पाना मुश्किल है कि इस मिसाइल के असफ़ल परीक्षण से कितना नुकसान हुआ. वह मिसाइल टोकचोन शहर में जा गिरी थी.

डेव सिज़मर्लर ने बताया कि उस असफल परीक्षण के बाद जिस जगह मिसाइल गिरी वहां एक बड़ा सा काला धब्बा बन गया था.

हमेशा की तरह इस परीक्षण पर प्योंगयांग की तरफ़ से कोई दावा नहीं किया गया, वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने लगातार इसकी आलोचना की.

ह्वासोंग-12 नाम की यह एक इंटरमीडिएट-रेंज मिसाइल थी. अप्रैल में नाकाम होने के बाद मई में इस मिसाइल का दोबारा परीक्षण किया गया और इस बार वह सफल रहा.

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अमरीका की धमकियों के बाद भी किए परीक्षण

लगातार परमाणु परीक्षण करने की वजह से उत्तर कोरिया की विश्व समुदाय में कड़ी आलोचना हुई है. अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया को तबाह करने की धमकियां तक दीं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उस पर आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए.

लेकिन फिर भी उत्तर कोरिया की तरफ से होने वाले परमाणु परीक्षणों में कमी नहीं आई. नवंबर में उसने अपनी अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल का परीक्षण करने के बाद दावा किया था कि इसकी ज़द में पूरा अमरीका था.

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नए साल की शुरुआत में उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग उन ने कहा था कि परमाणु बम का बटन उनकी डेस्क के पास ही रहता है.

इसके जवाब में अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कहा था कि उनके पास और भी बड़ा परमाणु बटन है.

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