उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया की बैठक होगी?

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- Author, प्रज्ञा मानव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया को 9 जनवरी को उच्च-स्तरीय बैठक की पेशकश की है.
इस बैठक में साल 2018 के विंटर ओलंपिक में प्योंगयांग के शामिल होने की संभावनाओं पर चर्चा होनी है.
ये पेशकश उत्तर कोरिया के अगुवा किम जोंग-उन के उस बयान के बाद की गई है जिसमें उन्होंने कहा था कि वो फ़रवरी में दक्षिण कोरिया में होने वाली गेम्स में हिस्सा लेने के लिए अपनी टीम को प्योनचांग भेजने पर विचार कर रहे हैं.
उन्होंने कहा था कि दोनों पक्षों को तुरंत बैठकर संभावनाओं पर चर्चा करनी चाहिए.

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क्या कहा था किम ने?
अपने नए साल के भाषण में कहा था कि वे दक्षिण कोरिया के साथ "बातचीत के लिए तैयार हैं और फ़रवरी में होने वाले विंटर ओलंपिक में 'दल भेजने पर विचार कर रहे हैं."
किम ने दक्षिण कोरिया को सलाह दी थी कि, "दोनों कोरियाई देशों के अधिकारियों को संभावनाएं तलाशने के लिए तुरंत मिलना चाहिए."
किम जोंग के इस बयान का स्वागत करते हुए दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन ने कहा था कि 'वे तो पहले से ही कहते आ रहे हैं कि ओलंपिक खेल दोनों देशों के बीच शांति कायम करने के लिए एक ऐतिहासिक मौक़ा हो सकता है.'
ग़ौरतलब है कि पिछले साल राष्ट्रपति बने मून जे-इन लगातार संबंध सुधारने की बात करते रहे हैं. ऐसे में क्या ये कहा जा सकता है कि विंटर ओलंपिक दोनों कोरियाई देशों के बीच एक नए दौर की शुरुआत हो सकती है.

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वरिष्ठ पत्रकार सैबल दासगुप्ता के मुताबिक़, ''उत्तर कोरिया कोई दिल से दक्षिण कोरिया के पास नहीं गया है. किम जोंग-उन ने अमरीका के साथ गाली-गलौज करके देख लिया, कोई नतीजा नहीं निकला. अब तेल के जहाज़ पकड़े जा रहे हैं और उत्तर कोरिया जैसे ठंडे देश को ईंधन चाहिए.''
''किम जोंग को पता है कि उन्हें दक्षिण कोरिया की ज़रूरत है. विंटर ओलंपिक इसके लिए एक सही मौक़ा था.''
सैबल मून जे-इन की भूमिका पर बात करते हुए कहते हैं कि, ''इससे राष्ट्रपति मून को भी फ़ायदा होगा क्योंकि वे राष्ट्रपति बनने के बाद से संबंध सुधारने की बात करते रहे हैं. ऐसे में अगर वे अपने देशवासियों को दिखा सकें कि उनके प्रस्ताव पर उत्तर कोरिया की टीम ओलंपिक में आ गई तो इससे उनकी छवि भी बेहतर होगी क्योंकि भारत-पाक की तरह दोनों देशों के कई परिवार सीमाओं से बंटे हुए हैं. दोनों देशों के लोगों के भावनात्मक रिश्ते हैं. कुछ साल पहले वहां परिवारों को मिलाने की कोशिश भी हुई थी.''

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राष्ट्रपति मून ने संकेत दिया है कि वे किम जोंग से परमाणु कार्यक्रम पर बात करने की कोशिश भी करेंगे. ऐसे में विंटर ओलंपिक को ज़रिया बनाकर की जा रही कूटनीति क्या फ़रवरी में खेल ख़त्म होने के बाद भी जारी रह सकेगी.
सैबल दासगुप्ता इसके जवाब में कहते हैं कि ''यह बहुत जटिल मामला है. किम जोंग और मून जे-इन दोनों जानते हैं कि यह मामला उनका आपसी है. दोनों देश चाहते हैं कि उनके मामले में अमरीका और चीन का दखल ख़त्म हो लेकिन यह मानना ग़लत होगा कि किम जोंग राष्ट्रपति मून के कहते ही अपना परमाणु बम बनाने का कार्यक्रम रोक देंगे.''
''किम जोंग को पता है कि अगर वे बम नहीं बनाएंगे तो उनसे कोई डरेगा नहीं. कोई डरेगा नहीं तो गद्दी चली जाएगी. अमरीका तो ये चाहता ही है. किम के देश में गद्दी जाने का मतलब है जान जाना. तो ऐसे में यह नहीं माना जा सकता कि सिर्फ़ विंटर ओलंपिक में जाने से किम जोंग में कोई बड़ा परिवर्तन आ जाएगा.''

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अमरीका और चीन पर इस बातचीत का कैसा असर रहेगा? इस पर सैबल कहते हैं कि ''इन दोनों देशों की प्रतिक्रिया देखने वाली होगी. चीन तो खामोशी से देखेगा लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति तो शायद खामोश भी न रह पाएं.''












