'पेशावर में चरमपंथियों का निशाना थी आईएसआई, मारे गए निर्दोष छात्र'

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बीते शुक्रवार को पेशावर के कृषि प्रशिक्षण संस्थान पर हमला करने के बाद चरमपंथियों ने एक वीडियो जारी किया है.
वीडियो से यह पता चलता है कि साज़िश रचने वालों ने आत्मघाती हमलावरों को उनके लक्ष्य के बारे में नहीं बताया था.
जमरुद रोड पर पेशावर विश्वविद्यालय के सामने कृषि प्रशिक्षण केंद्र पर हमले की जिम्मेदारी प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने ली थी.
संगठन ने इस हमले का दो मिनट का एक वीडियो मीडिया के प्रतिनिधियों को भेजा है, जिसमें चरमपंथी छात्रों पर गोली चलाते हुए दिख रहे हैं. जबकि वीडियो में कुछ छात्रों को भागते हुए देखा जा सकता है.

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मोबाइल से वीडियो
बीबीसी उर्दू संवाददाता रिफ़तुल्लाह ओराकज़ई के मुताबिक पुलिस और जांचकर्ताओं ने कहा है कि हमलावरों से एक मोबाइल फ़ोन मिला है, जिससे यह प्रतीत हो रहा है कि वीडियो उसी से बनाया गया है. हालांकि इस बात का पता नहीं चल पाया है कि वीडियो कैसे बनाया गया है.
कुछ अधिकारियों का मानना है कि हमले का फ़ेसबुक लाइव किया गया था या फिर विशेष ऐप से इसे रिकॉर्डिंग की गई थी.
मीडिया के जारी किए गए वीडियो में यह स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि हमलावर एक कमरे में घुसते हैं, जहां उनकी और छात्रों के बीच पश्तो भाषा में छोटी बातचीत होती है.
हमलावर छात्र से कहते हैं कि आपको कुछ नहीं करूंगा लेकिन मुझे यह बताएं कि क्या यह गुप्तचर एजेंसी आईएसआई का केंद्र है है या नहीं? डरे हुए छात्र के मुंह से हां निकल जाता है.
हालांकि यह पता नहीं चल पाया है कि जिस छात्र से हमलावर ने बात की थी उसे छोड़ दिया गया या नहीं.

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पहले मांगी गई थी सुरक्षा
प्रतिबंधित संगठन के प्रवक्ता उमर खुरासानी के जारी किए गए बयान में कहा गया है कि यह हमला गुप्तचर एजेंसी आईएसआई के केंद्र पर किया गया था.
वास्तव में वह केंद्र कृषि प्रशिक्षण संस्थान का हॉस्टल है, जहां हमले के दौरान करीब 30 छात्र मौजूद थे.
वीडियो देखने के बाद अधिकारियों ने कहा कि हमलावर आईएसआई केंद्र पर हमला करने गए थे, लेकिन वास्तव में वहां कोई कार्यालय नहीं था.
कृषि प्रशिक्षण संस्थान के अधिकारियों के मुताबिक छह महीने पहले संस्थान ने सरकार से सुरक्षा देने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया.

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इमारत में दूसरे सरकारी कार्यालय हैं
अधिकारी का कहना है कि संस्थान की सुरक्षा के लिए बूढ़े सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं. उनके ज्यादातर हथियार काम नहीं कर रहे थे. संस्थान में लगे ज्यादातर सीसीटीवी कैमरे ख़राब हैं. उसमें कई दिनों की रिकॉर्डिंग रखने की क्षमता नहीं है.
पेशावर के खैबर रोड पर स्थित कृषि प्रशिक्षण संस्थान एक बड़ी इमारत का हिस्सा है, जहां हॉस्टल के अलावा दूसरे 11 सरकारी विभागों के दफ्तर हैं.
इस इमारत से लगी मशहूर चिकित्सा संस्थान खैबर अस्पताल के नर्सों और डॉक्टरों के हॉस्टल भी हैं

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पुलिस के मुताबिक़ शुक्रवार की सुबह तीन बंदूकधारी बुर्का पहने हुए प्रशिक्षण संस्थान में घुस गए थे, जिसमें नौ लोग मारे गए थे और दर्जनों घायल हुए थे. सेना और पुलिस की जवाबी कार्रवाई में तीनों हमलावर मारे गए थे.
सरकार का कहना है कि योजना अफ़ग़निस्तान में बनाई गई थी. हालांकि अफ़ग़ानिस्तान की सरकार ने इस पर कुछ नहीं कहा है.
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